Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

भाजपा के ‘शुभचिंतकों’ को संभलने की जरूरत

उमा भारती, गिरिराज सिंह और विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया ने अपने बयानों से भाजपा को संकट में डाला है।

भाजपा के ‘शुभचिंतकों’ को संभलने की जरूरत
सोलहवीं लोकसभा चुनावों के इस निर्णायक मोड़ पर भाजपा से जुड़े कुछ बयानवीरों के‘कृत्य’चिंता पैदा करती है। सबसे अलग (पार्टी विद डिफरेंस) और अनुशासित पार्टी होने के दावा करने वाली भाजपा से ताल्लुक रखने वाले इन नेताओं की ओर से वैमनष्यपूर्ण और घृणा फैलाने वाले बयानों के चलते निश्चित रूप से पार्टी के सिद्धांत और छवि को अघात पहुंचता है। अब तक तमाम सर्वेक्षणों के मुताबिक जब इस चुनाव में भाजपा सबसे आगे चल रही है, देश में बदलाव की लहर है, जिसका लाभ भी इस पार्टी को ही मिलने जा रहा है और पार्टी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का पूरा चुनावी अभियान सबके साथ समावेशी विकास और सुशासन के मुद्दे पर केंद्रित है, ऐसे में भाजपा के कुछ ‘हितैषियों’ की ओर से पार्टी को संकट में डालने वाले बयान देने का औचित्य समझ में नहीं आता है। हार की दहलीज पर खड़ी कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा हताशा में गलतबयानी का कारण समझ में आता है, वोट बैंक की राजनीति करने वाले मुलायम-लालू-राज ठाकरे जैसे नेताओं की ओर से घृणा से भरे बोल का कारण भी समझ में आता है और इन नेताओं की सोच की संकीर्णता से भी लोग वाकिफ हैं, लेकिन विजय पथ पर अग्रसर भाजपा के कुछेक बयानवीर नेताओं के ‘हेट स्पीच’ का कारण समझ से परे है।
यूं तो किसी भी दल के नेता हो, उनकी समाज को बांटने वाली भाषा और वैमनष्य फैलाने वाली संकीर्ण सोच निंदनीय है। इसे हर कोई नकारेगा। खासकर देश की एकता और अखंडता की चाह रखने वाला कोई भी नेता इस तरह के बयानों को पसंद नहीं करेगा। इधर कुछ दिनों में भाजपा नेता उमा भारती, गिरिराज सिंह और विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया ने अपने कथित विवादास्पद बयानों से जिस तरह भाजपा को संकट में डाला है, उससे आहत होकर नरेंद्र मोदी को इन नेताओं को कड़ी नसीहत देनी पड़ी है। मोदी को ट्वीट कर कहना पड़ा कि वे भाजपा के ‘शुभचिंतक’ होने का दावा करने वालों के गैरजिम्मेदाराना और संकीर्ण बयानों को खारिज करते हैं क्योंकि वे पार्टी की मुहिम को मुद्दों से भटका रहे हैं।
ऐसे बयान विकास और सुशासन के मुद्दों से ध्यान हटाते हैं। ऐसे बयान देने वालों से अपील है वे ऐसा करने से परहेज करें। आज संपूर्ण देश सुशासन एवं विकास के मामले को लेकर भाजपा की ओर देख रहा है। अपनी पार्टी के गैरजिम्मेदार नेताओं के इस तरह के किसी भी कदम से शीर्ष जिम्मेदार नेताओं का आहत होना लाजिमी है। इससे पहले भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भी पार्टी के गिररिराज जैसे नेताओं को अनर्गल बयानों से बचने की हिदायत दी थी। यूं तो विवादास्पद बयान देने वाले नेता चाहे किसी भी दल के हों, नफरत भरे बयानों से वे राजनीतिक अहमियत ही खोते हैं। इस तरह के बयान सनसनी तो फैलाते हैं, लेकिन उससे राजनीति में गंभीर पहचान नहीं बनती है। एक समय आता है जब जनता ऐसे नेता को खारिज कर देती है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के शब्दों में कहें तो राजनीति की विरासत छवि पर टिकी होती है। एक नेता के लिए छवि ही उनकी पूंजी है। इसलिए भाजपा समेत तमाम दलों के बयानवीर नेताओं को अपनी वाणी पर संयम रखने की जरूरत है।
Next Story
Top