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चिंतनः प्रकृति से खिलवाड़ कहीं धुंध-कहीं बाढ़

आज मानव जीवन की सबसे पहली प्राथमिकता प्रकृति के कर्ज को लौटाने की है।

चिंतनः प्रकृति से खिलवाड़ कहीं धुंध-कहीं बाढ़
प्राकृतिक आपदाओं को भले ही हम रोक नहीं सकते हैं, लेकिन दुनिया आज प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करने वाले जिस रास्ते पर चल रही है वह विनाश की ओर जाता है, इसे यह बात भी याद रखनी होगी। आपदाएं हर दौर में आती रही हैं, लेकिन आज न सिर्फ इनकी आवृत्ति बढ़ गई, बल्कि स्वरूप भी बदल गया है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि इससे मानव जीवन के सामने भयावह संकट खड़ा हो गया है। तमिलनाडु में भयानक बाढ़ आई हुई है।
देश की राजधानी दिल्ली में हवा में प्रदूषण मानक स्तर से दस गुना बढ़ गया है। चीन की राजधानी बीजिंग में तो वायु प्रदूषण के चलते धुंध की चादर फैल गई है, जिसके कारण वहां अलर्ट जारी करना पड़ा है। दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी धरती का तापमान बढ़ने के कारण मौसम का पूरा चक्र उलट पुलट गया है। जिसके कारण कहीं असमय भारी बारिश, सूखा और तूफान देखने को मिल रहे हैं।
दरअसल, हमने अपने लिए संसाधन और ऐशोआराम की चीजों को जुटाने के लिए प्रकृति का लगातार दोहन व उपभोग किया है। प्रकृति से हमने जितना लिया है, उसे देने की कभी नहीं सोची। विकास के नाम पर बेतरतीब निर्माण कार्य जोर-शोर से किए जा रहे हैं। इस होड़ में लोग नियमों को ताक पर रखकर नदियों के किनारों तक घर बनाने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। नहरें और तालाब तो बहुत पहले से सिकुड़ते जा रहे हैं। इससे शहरों में जल निकासी प्रभावित हुई है।
आज मानव जीवन की सबसे पहली प्राथमिकता प्रकृति के कर्ज को लौटाने की है, उसके साथ दोस्त की तरह सामंजस्य बैठाकर चलने की होनी चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य है कि अब भी हम उसकी अनदेखी कर रहे हैं। हमारा कर्त्तव्य है कि हम धरती को हराभरा बनाएं। आज तमिलनाडु बाढ़ के कारण एक तरह से डूबा हुआ है। राज्य का उत्तरी क्षेत्र और राजधानी चेन्नई तो भयावह संकट में हैं। पिछले एक महीने से वहां लगातार बारिश हो रही है। इसके कारण करीब दौ सौ लोगों की मृत्यु हो गई है। आठ हजार करोड़ रुपये की धन हानि हुई है।
वहीं लाखों लोग प्रभावित हुए हैं, सो अलग। राज्य एक तरह से थम-सा गया है। मंगलवार को वहां कई अखबारों के दफ्तर तक नहीं खुल सके। चिंता की बात है कि मौसम विभाग की ओर से अगले तीन दिनों तक भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है। अच्छी बात है कि इस मुश्किल घड़ी में पूरा देश तमिलनाडु के साथ खड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।
एनडीआरएफ और सेना के जवान राहत और बचाव कार्य में जी जान से जुट गए हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रदेश इस संकट से जल्द ही उबर जाएगा और वहां जन-जीवन सामान्य हो जाएगा। बहरहाल, इस तरह की बेमौसम बाढ़ की घटनाएं देश में भी बढ़ी हैं। पूर्व में राजस्थान, गुजरात, मुंबई, जम्मू-कश्मीर और उससे पहले उत्तराखंड में बारिश कहर बरपा चुकी है।
यह ठीक है कि पेरिस में इन दिनों दुनिया के करीब 196 देश जलवायु परिवर्तन से लड़ने को लेकर चर्चा कर रहे हैं। उनका मकसद ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार ग्रीन हाउस गैसों या कार्बन उत्सर्जन में बेतहाशा वृद्धि पर रोक लगाने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाना है। यदि अब भी हम नहीं चेते तो विनाश नहीं रोक पाएंगे।
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