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बदले माहौल में पटरी पर लौटी अर्थव्यवस्था

राजग सरकार ने विकास का एक बेहतर खाका देश के सामने रखा है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दो साल में जीडीपी की विकास दर के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़ देगा।

बदले माहौल में पटरी पर लौटी अर्थव्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत के आर्थिक आउटलुक को स्थिर से सकारात्मक करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों पर एक तरह से भरोसा व्यक्त किया है। यह दिखाता हैकि भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और उसे गति देने के लिए केंद्र सरकार सही दिशा में कदम उठा रही है।

राजग सरकार ने विकास का एक बेहतर खाका देश के सामने रखा है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दो साल में जीडीपी की विकास दर के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़ देगा। हालांकि मूडीज ने फिलहाल रेटिंग में कोई बदलाव नहीं किया है और यह अब भी बीएए3 ही है, लेकिन इस बात के संकेत जरूर दिए हैं कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं में अपेक्षित सुधार हुआ तो 12-18 महीनों में वह रेटिंग को सुधारेगी।

मूडीज ने तीन साल पहले भारत की रेटिंग घटा दी थी, जब देश में एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे थे। महंगाई चरम पर थी। चालू खाता में घाटा के साथ-साथ बढ़ता राजकोषीय घाटा सरकार के लिए चिंता का सबब बना हुआ था। अब मूडीज ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति अपना दृष्टिकोण बेहतर किया है, तो उसकी वजह मोदी सरकार की ओर से आर्थिक सुधार की दिशा में उठाए कदम हैं। भारत ने अन्य देशों की तुलना में जीडीपी विकास की ऊंची दर हासिल की है।

मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जनसंख्या की अनुकूल संरचना, आर्थिक विविधता, अधिक बचत और निवेश के कारण भारत की विकास दर बीते दशक में समान रेटिंग वाले देशों के मुकाबले अधिक रही। अभी कुछ ही दिन पहले दिग्गज रेटिंग एजेंसी फिच ने भी चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर के आठ फीसदी होने की संभावना जताई थी। रेटिंग का महत्व इसलिए है कि तमाम निवेशक किसी भी देश की रेटिंग देखकर ही वहां निवेश का फैसला लेते हैं। अभी तकनीकी तौर भारत की रेटिंग बीएए3 है। यह निवेश ग्रेड की सबसे निचली रेटिंग है।

इस श्रेणी का मतलब है कि उस देश में निवेश किया जा सकता है, इस पर जोखिम बहुत ज्यादा नहीं है। दूसरी रेटिंग एजेंसियों स्टेंडर्ड एंड पुअर्स यानी एसएंडपी और फिच ने भी भारत को इसी श्रेणी के समतुल्य रेटिंग दी है। केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के दस माह बाद की स्थितियों पर नजर डालें तो पाते हैं कि सरकार की सजगता और नीतिगत फैसलों के कारण महंगाई अभी नियंत्रण में है। राजकोषीय घाटा को बेहतर आर्थिक प्रबंधन से काबू में किया जा रहा है।

भ्रष्टाचार और घोटाले का कहीं नामलेवा नहीं है। साथ ही नीतिगत फैसले लेने में भी तेजी आई है। भारतीय अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा फायदा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट से मिला है। हालांकि अभी भी अर्थव्यवस्था के सामने ढेर सारी चुनौतियां बरकरार हैं, जिनकी ओर मूडीज ने भी इशारा किया है। बेमौसम बारिश से कृषि को नुकसान पहुंचा है, उससे महंगाई में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। केंद्र व राज्य सरकारों पर अभी भी भारी कर्ज है। ढांचागत क्षेत्र पर दबाव साफ देखा जा सकता हैै। वहीं बैंकों में फंसे कर्ज के मामले बढ़ रहे हैं। लिहाजा, सुधारवादी एजेंडे को आगे बढ़ते हुए केंद्र सरकार को इन कमजोरियों को दूर करने पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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