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छोटा राजन से महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद

भारत लंबे समय से दाऊद को पकड़ना चाहता है। देश में कई आतंकी घटनाओं की उसने साजिश रची है।

छोटा राजन से महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली. देश के सर्वाधिक वांछित गैंगस्टर्स में शामिल छोटा राजन, जिसका असली नाम राजेंद्र सदाशिव निखालजी है, की गिरफ्तारी मुंबई के अपराध जगत के इतिहास की एक बहुत बड़ी घटना है। उसे सोमवार को इंटरपोल द्वारा जारी रेडकार्नर नोटिस के आधार पर इंडोनेशिया के बाली में गिरफ्तार किया गया। वह पिछले दो दशक से कानून की पकड़ से भाग रहा था।

छोटा राजन पत्रकार जे डे हत्याकांड सहित करीब 20 मामलों में वांछित है। भारत ने उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ दिनों में उसे यहां लाया जा सकेगा। छोटा राजन ने अपराध की दुनिया का अपना सफर सत्तर और अस्सी के दशक में टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग से शुरू किया था।

बाद के दिनों में वह दाऊद इब्राहिम का सबसे वफादार बन गया, लेकिन यह साथ ज्यादा दिनों तक बरकरार नहीं रह पाया। 1993 के मुंबई बम विस्फोटों में दाऊद की भूमिका के बाद राजन उससे अलग हो गया था। इस घटना ने मुंबई ही नहीं बल्कि पूरे देश को झकझोरने के साथ अपराध जगत के कई समीकरण भी बदल दिए। दरअसल, इसके बाद दोनों के बीच दुश्मनी का एक नया दौर शुरू हुआ। इस दौरान छोटा शकील ने दाऊद की मेहरबानी हासिल कर ली थी और उसने राजन की जगह ले ली थी।

मुंबई में अपना वर्चस्व स्थापित करने के चक्कर में इन दोनों गुटों ने आतंक का जो खेल खेला उसे सोचकर ही सिहरन पैदा होती है। दोनों ने एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने की भरसक कोशिश की। माना जाता हैकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां राजन को दाऊद के खिलाफ एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती रही हैं। वहीं दाऊद ने भी कई बार राजन पर हमले करवाए, लेकिन वो हमेशा बचता रहा। बाद के दिनों में उसके कई साथी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए या उसे छोड़कर चले गए।

इन दिनों वह कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से भी जूझने लगा था। जिससे अपराध जगत में उसकी धाक कम होने लगी। इस बीच दाऊद से उसको खतरा भी बढ़ गया। कहा जाता है कि पिछले कुछ सालों से छोटा राजन दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में भागता फिर रहा था, लेकिन अंतत: सुरक्षा एजेंसियां उसे खोज निकालने में सफल रहीं। हालांकि उसकी अचानक गिरफ्तारी पर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं।

बहरहाल, एक अपराधी की असली जगह जेल की काल कोठरी होती है, जहां देर से ही सही छोटा राजन को भी अंतत: आना पड़ा है। उसकी गिरफ्तारी से कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद की जा रही है, जिसके आधार पर अंडरवर्ल्ड जगत की कई कड़ियों को आने वाले दिनों में जोड़ने में मदद मिलेगी। अब कानून को अपना काम करने देना चाहिए और अपराध साबित होने पर सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। वहीं सुरक्षा एजेंसियों का यह भी कहना हैकि राजन दाऊद और उसके कई आदमियों के बारे में महत्वपूर्ण सूचना दे सकता है।

भारत लंबे समय से दाऊद को पकड़ना चाहता है। देश में कई आतंकी घटनाओं की उसने साजिश रची है। छोटा राजन की गिरफ्तारी उन अपराधियों के लिए भी सबक है जो कानून को कमजोर समझने की भूल करते हैं।

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