Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

बहुत कुछ तय करेंगे पांच राज्यों के चुनाव

पिछले लोकसभा चुनाव में इन क्षेत्रों में भी कुछ सीटों पर भाजपा को सफलता मिली थी।

बहुत कुछ तय करेंगे पांच राज्यों के चुनाव

पांच राज्यों- असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पांडिचेरी में चुनावी बिगुल बज गया है। ये सभी राज्य सियासी रूप से अहम हैं। इस बार तीन राष्ट्रीय दलों-भाजपा, कांग्रेस, वामदल व दो क्षेत्रीय छत्रपों की अग्नि परीक्षा है। इस समय केरल और असम में कांग्रेस सत्ता में है, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी तो तमिलनाडु में जयललिता का शासन है। पांडिचेरी में एन रंगस्वामी की पार्टी-एनआर कांग्रेस की सरकार है। इन सभी राज्यों में अब तक चुनाव द्विध्रुवीय रहे हैं, लेकिन चुनावी समर में भाजपा की मजबूत एंट्री से इस बार बहुध्रुवीय होंगे। असम की 126 सीटों के लिए भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला होगा। कांग्रेसी सीएम तरुण गोगोई 15 साल से सत्ता में हैं। उनकी अधिक उम्र, हाल-फिलहाल के विवादित फैसले और एंटी इन्कंबेंसी कांग्रेस के लिए भारी पड़ने वाली है, जबकि भाजपा ने राजनीतिक सूझबूझ दिखाते हुए पूर्व सीएम प्रफुल्ल कुमार महंत की पार्टी असम गण परिषद व अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन किया है। इससे सरकार विरोधी मतों का विभाजन रुकेगा। सांसद बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एयूडीएफ का भी मजबूत जनाधार है, इससे चुनाव त्रिकोणीय हो जाएगा। असम में भाजपा व अगप गठबंधन के लिए मौका है। भाजपा ने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को पहले ही सीएम प्रत्याशी घोषित कर दिया है। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए सत्तासीन दीदी की पार्टी टीएमसी, वाममोर्चा व कांग्रेस के संभावित गठबंधन और भाजपा के बीच तगड़ा घमासान देखने को मिल सकता है। ममता वाममोर्चा के 37 साल के शासन को उखाड़ कर सत्ता में आई थीं। ममता से पहले वाम और कांग्रेस के बीच मुकाबला होता था, लेकिन इस बार ममता को हराने के लिए दोनों दल साथ आ सकते हैं। मालदा कांड से ममता सरकार की छवि खराब हुई है व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बंगाल का कई बार दौरा कर चुके हैं। केरल में कांग्रेस नीत यूडीएफ सत्ता में है। सीएम ओमन चांडी पर करप्शन के आरोप लगे हैं। यहां यूडीएफ व वाम दलों का मोर्चा एलडीएफ में मुकाबला रहता है। इस बार भाजपा भी उतरेगी। इसलिए कुल 140 सीटों पर लड़ाई त्रिकोणीय हो जाएगी। तमिलनाडु में जयललिता की पार्टी अन्नाद्रमुक की सरकार है। 234 सीटों वाले इस दक्षिणी राज्य में अन्नाद्रमुक व पूर्व सीएम एम करुणानिधि की पार्टी द्रमुक के बीच फाइट रहती है। लेकिन इस बार भाजपा मैदान में होगी। सुपर स्टार रजनीकांत से मोदी मिल चुके हैं। यहां कांग्रेस व डीएमके ने गठबंधन किया है। लड़ाई अन्नाद्रमुक, द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन व भाजपा के बीच त्रिकोणीय होगी। 30 सीटों वाले पुडुचेरी में भी सत्ता तमिलनाडु की तरह अन्नाद्रमुक व द्रमुक के बीच बदलती रहती है, लेकिन पहले यहां कांग्रेस का दबदबा था। अभी कांग्रेस से अलग होकर एन रंगास्वामी की पार्टी की सरकार है। भाजपा भी यहां किस्मत आजमाएगी। ऐसे में यहां भी मुकाबला त्रिकोणीय ही होगा। खास बात यह है कि इन सभी राज्यों के चुनावों में कांग्रेस, ममता बनर्जी, जयललिता व रंगास्वामी की प्रतिष्ठा दांव पर होगी, जबकि भाजपा के लिए अपना जनाधार बढ़ाने का मौका होगा। पिछले लोकसभा चुनाव में इन क्षेत्रों में भी कुछ सीटों पर भाजपा को सफलता मिली थी। लेकिन बाद में हुए विस चुनावों में महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड व जम्मू में भाजपा को विजय मिली और दिल्ली व बिहार में हार। ऐसे में इन चुनावों में मोदी सरकार के कामकाज की परीक्षा भी होगी कि लोकप्रियता बरकरार है या नहीं। इन विस चुनावों में अगर भाजपा की सीटें बढ़ेंगी तो पार्टी को राज्यसभा में अपनी संख्या बढ़ाने में भी मदद मिलेगी, जहां पार्टी अभी अल्पमत में है।

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

Next Story
Top