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आतंकवाद पर पाक के प्रति अमेरिकी नरमी, भारत के लिए चिंंतनीय

अमेरिका का पाकिस्तान को आतंक के खिलाफ कार्रवाई करने का सर्टिफिकेट दे देना चौंकाता है।

आतंकवाद पर पाक के प्रति अमेरिकी नरमी, भारत के लिए चिंंतनीय

अमेरिका बेशक आतंकवाद को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात करता रहा हो, लेकिन पाकिस्तान के मामले में अमेरिकी सरकार का रवैया हमेशा नरम रहा है और भारत को परेशान करने वाला रहा है। आज जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा से ठीक पहले सीमा से लेकर समुद्र तक पाक प्रायोजित आतंकी भारत में घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं और इस बात के पक्के सुबूत भी मिले हैं, इतना ही नहीं खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ अमेरिकी राष्टÑपति ओबामा भी आतंकी निशाने पर हैं, फिर भी अमेरिका का पाकिस्तान को आतंक के खिलाफ कार्रवाई करने का सर्टिफिकेट दे देना चौंकाता है।

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इससे साफ है कि आतंकवाद को लेकर अमेरिका दोहरी नीति अपना रहा है। दरअसल, भारत की यात्रा पर आने से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने पाकिस्तान सरकार को अल कायदा, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने का सर्टिफिकेट दिया है। इस सर्टिफिकेट का कूटनीतिक महत्व यह है कि अमेरिकी कांग्रेस से 2010 में पारित केरी-लुगार बिल के तहत पाक को 2010-14 के दौरान 1.5 अरब डॉलर प्रति वर्ष असैन्य अमेरिकी सहायता मिल सकती है। इस बिल में शर्त यह है कि पाक आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की गारंटी दे जिसका अमेरिका को भरोसा हो। इस कड़ी में जॉन कैरी के यह कहने से कि पाकिस्तान अल कायदा, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, बिल की शर्त पूरी हो जाती है। इससे पाक को अमेरिकी मदद का रास्ता साफ हो जाता है। जबकि दुनिया को पता है कि पाकिस्तान अमेरिकी व अन्य विदेशी मदद का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने में करता रहा है और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद के साथ-साथ पाक-अफगान बोर्डर पर सक्रिय आतंकी गुट अलकायदा भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं।

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अलकायदा ने भारत में अपने ‘तबाही मिशन’ का खुलासा भी किया है। अलकायदा से जुड़े होने के संदेह में बेंगलुरु में एक शख्स की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। यह सब अमेरिका जानता है। वह यह भी जानता है कि पाकिस्तान दशकों से परोक्ष रूप से भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में शामिल है। पेशावर हमले के बाद पाक ने आतंकवाद के खिलाफ बिना भेदभाव ठोस कार्रवाई का आश्वासन जरूर दिया और पाक में कुछ आतंकियों को फांसी भी दी गई। लेकिन पाक के इस अश्वासन व ‘फांसी’ पर अगर अमेरिका ने भरोसा कर उसे क्लीनचिट दी है तो यह भी उतना ही सच है कि मुंबई 26/11 हमले के आरोपी आतंकी जकी उर रहमान लखवी व हाफिज सईद और मुंबई बम विस्फोट के आरोपी दाऊद इब्राहिम जैसे भारत में वांछित कई आतंकी पाकिस्तान में हैं, पाक सरकार की जानकारी में हैं। इनके खिलाफ पाक ने कोई कदम नहीं उठाया है। फिर कैसे माना जा सकता है कि पाक लखवी व सईद से जुड़े आतंकी गुट लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद और अल कायदा के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है? यह भारत के लिए चिंता की बात है।

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