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कालेधन पर सरकार की सक्रियता से बढ़ी उम्मीद

साठ खातों में कालाधन होने की बात सामने आई है।

कालेधन पर सरकार की सक्रियता से बढ़ी उम्मीद
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विदेशी बैंकों में रखे भारतीयों के कालेधन की जांच में तेजी की खबर सुकून देने वाली है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि भारत सरकार को फ्रांस अथॉरिटी से 628 विदेशी खाताधारकों के नाम मिले थे, जिसमें से 350 खातों की जांच पूरी हो चुकी है और बाकी खातों की जांच भी इस साल के 31 मार्च तक पूरी हो जाएगी। यही नहीं इनमें से 60 अवैध खाताधारकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी पूरी हो गई है। इसका अर्थ है कि आने वाले दिनों में उन लोगों के नाम सार्वजनिक हो जाएंगे जिन्होंने इन खातों को अवैध रूप से खुलवा रखा था। दूसरे शब्दों में कहें तो इन साठ खातों में कालाधन होने की बात सामने आई है।

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हालांकि इस बीच सोमवार को देश के एक अंग्रेजी दैनिक अखबार ने 1195 भारतीयों के नामों की सूची प्रकाशित की, जिनका खाता स्विट्जरलैंड की एचएसबीसी बैंक में है। इनमें करीब 25 हजार करोड़ रुपये होने का दावा भी किया है। अखबार द्वारा पेश की गई सूची में देश के कई बड़े उद्योगपतियों समेत कई राजनीतिक हस्तियां, हीरा व्यापारी और एनआरआई के नाम शामिल हैं। हालांकि, स्विट्जरलैंड के किसी बैंक में किसी का पैसा होने भर से यह कालाधन नहीं हो जाता है और ऐसा भी नहीं कहा जा सकता कि विदेशों में भारतीयों द्वारा खोले गए सभी खाता अवैध ही हैं। कानूनन कोई भी विदेश में खाता खोल सकता है। इसीलिए सिर्फ नाम आने से सरकार कार्रवाई नहीं कर सकती। अब नई सूची में आए नामों की सच्चाईजांच से ही सामने आ पाएगी।

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जाहिर है, सरकार उन्हें एसआईटी को सौंपेगी। इन नामों के आने से केंद्र सरकार द्वारा कालेधन की जांच का दायरा और बढ़ जाएगा, क्योंकि उसके पास कुछ और नाम होंगे। हालांकि वित्त मंत्री ने इस सूची के बारे में साफ किया है कि इसमें बहुत से नाम ऐसे हैं जो पहले से ही भारत सरकार के पास हैं। दरअसल, अधिकतर खाताधारकों के नाम 2010 में ही केंद्र सरकार के पास आ गए थे, लेकिन कांग्रेस की अगुआई वाली पूर्व की यूपीए सरकार इस पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी थी। वह तो सुप्रीम कोर्ट के बार-बार के निर्देशों के बाद भी कालेधन की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन को टालती रही, लेकिन गत वर्षकेंद्र में सरकार बदलने के बाद सत्ता में आई मोदी सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही कालेधन की जांच के लिए एसआईटी के गठन का निर्णय किया। बीते सात-आठ महीनों में जिस तरह से एसआईटी इसकी जांच में आगे बढ़ी है उससे उम्मीद हैकि विदेशों में रखे कालेधन पर से जल्द ही परदा उठेगा।

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मोदी सरकार ने विदेशों से सहयोग पाने के लिए इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है। इसमें उन्हें सफलता भी मिली है। कालेधन को पनाह देने वाले देशों पर इससे दबाव बढ़ा है और वे भारत से सूचनाएं साझा करने पर राजी हो रहे हैं। कालाधन देश में बड़ा मुद्दा है। अलग-अलग लोग विदेशों में लाखों करोड़ रुपये जमा होने का अनुमान लगाते रहे हैं। हालांकि पुख्ता जानकारी किसी के पास नहीं है। भारत सरकार के पास भी कोई ठोस जानकारी नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उनकी सरकार पाई-पाई कालाधन वापस लाएगी। जाहिर है, यदि इसमें सफलता मिलती है तो यह एक बड़ी कामयाबी होगी। साथ ही इससे देश की आर्थिक हालत भी सुधरेगी।

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