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संपादकीय लेख : ड्रोन पॉलिसी से रोजगार के अवसरों में इजाफा होगा

नई ड्रोन नीति को एयर टैक्सी की दिशा में बढ़ाया गया पहला कदम भी कह सकते हैं। नीति के अनुसार नॉन कमर्शियल यूज वाले नैनो ड्रोन और माइक्रो ड्रोन के लिए पायलट लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी। 250 ग्राम या कम वजन के ड्रोन नैनो होते हैं और 2 किलो तक के माइक्रो की गिनती में आते हैं। ड्रोन के ट्रांसफर और डीरजिस्ट्रेशन का प्रॉसेस आसान किया गया।

संपादकीय लेख : ड्रोन पॉलिसी से रोजगार के अवसरों में इजाफा होगा
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : अगर आप ड्रोन उड़ाने को लेकर बहुत उत्साहित हैं, आसमान के रोमांच का आनंद लेना चाहते हैं, लेकिन नियमों की लंबी चौड़ी लिस्ट से परेशान हैं तो आपकी परेशानी का समाधान कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने देश की पहली ड्रोन नीति का ऐलान कर दिया है, जिसमें ड्रोन उड़ान को लेकर न केवल नियमों को उदार बनाया गया है, बल्कि रोजगार सृजन के लिए नए रास्ते खोले गए हैं। सड़कों पर लगातार बढ़ रही भीड़-भाड़ को देखते हुए बीते एक दशक से देश में एयर टैक्सी की चर्चाएं तो हो रही थी, लेकिन इस पर किसी भी सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई।

नई ड्रोन नीति को एयर टैक्सी की दिशा में बढ़ाया गया पहला कदम भी कह सकते हैं। नीति के अनुसार नॉन कमर्शियल यूज वाले नैनो ड्रोन और माइक्रो ड्रोन के लिए पायलट लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी। 250 ग्राम या कम वजन के ड्रोन नैनो होते हैं और 2 किलो तक के माइक्रो की गिनती में आते हैं। ड्रोन के ट्रांसफर और डीरजिस्ट्रेशन का प्रॉसेस आसान किया गया। सभी ड्रोन का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर होगा। पहले ड्रोन के लिए कई तरह के अप्रूवल लेने पड़ते थे, वे अब जरूरी नहीं होंगे। जैसे यूनीक ऑथराइजेशन नंबर, मेंटेनेंस सर्टिफिकेट, ऑपरेटर परमिट, स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस, उसके कंपोनेंट के इंपोर्ट की इजाजत। सरकार ने इन सभी झंझटों से मुक्ति दिला दी है। केवल इतना ही नहीं रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेने के लिए सिक्योरिटी क्लियरेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। रिमोट पायलट लाइसेंस 10 साल तक वैलिड रहेगा और फीस 3000 के बजाय 100 रुपये होगी। जरूरी फॉर्म्स की संख्या 25 से घटाकर 5 कर दी गई है। 72 तरह की फीस अब सिर्फ 4 तक सिमट गई है। फीस मामूली होगी और वह ड्रोन के साइज से जुड़ी नहीं होगी। डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर ग्रीन, येलो और रेड जोन का इंटरैक्टिव एयरस्पेस मैप होगा।

येलो जोन यानी एयरपोर्ट के करीब 12 किलोमीटर के दायरे के बाहर ड्रोन उड़ाया जा सकेगा। पहले यह दायरा 45 किलोमीटर था। ड्रोन रूल्स में वेट लिमिट को 300 किलो से बढ़ाकर 500 किलो कर दिया गया है। इससे हैवी पेलोड उठाने वाले ड्रोन और ड्रोन टैक्सी भी इसके दायरे में आ जाएंगी। कार्गो डिलीवरी के लिए ड्रोन कॉरिडोर बनाया जाएगा। ग्रीन जोन और एयरपोर्ट से 8-12 के दायरे में 200 फुट ऊपर तक ड्रोन उड़ाने के लिए किसी इजाजत की जरूरत नहीं होगी। ड्रोन रूल्स टूटने पर अधिकतम जुर्माना एक लाख रुपये तक होगा, लेकिन दूसरे रूल्स अपनी जगह होंगे। ड्रोन के प्रति जागरुकता और युवाओं को आकर्षिक करने के उद्देश्य से भी नई नीति में कई कदम उठाए गए हैं, जिसमें ड्रोन से जुड़ी ट्रेनिंग देने और परीक्षा लेने का काम ऑथराइज्ड ड्रोन स्कूल करेंगे। ट्रेनिंग किस तरह की होगी, यह डीजीसीए बताएगा। वह ड्रोन स्कूल की निगरानी और पायलट लाइसेंस ऑनलाइन देने का काम करेगा। ड्रोन केवल रोमांच के लिए ही नहीं रह जाएंगे।

हम अकसर सुनते हैं कि विकासशील देशों में किसान ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं। इस नीति के बाद जल्द ही देश में भी ऐसा होते देख सकेंगे। केवल खेती ही नहीं ड्रोन से खनन, इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विलांस, आपात सहायता, परिवहन, जियोस्पैटियल मैपिंग, रक्षा और कानून व्यवस्था-अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में बहुत फायदा मिल सकता है। ये खास तौर पर दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच, कई तरह के काम करने की क्षमता और इस्तेमाल में आसान होने की वजह से इकोनॉमिक ग्रोथ और रोजगार पैदा करने में अहम योगदान दे सकते हैं। इससे न केवल रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी, बल्कि कम खर्च में बेहतर परिणाम भी प्राप्त किए जा सकेंगे। बस जरूरत केवल इस बात की है कि ड्रोन को लेकर आम आदमी को जागरूक किया जाए और नई नीति की पालना गंभीरता से हो। कहीं ऐसा न हो कि यह कदम देश की सुरक्षा में नई बाधा बन जाए। यह किसी से छिपा नहीं है कि पड़ोसी पाक ड्रोन का इस्तेमाल अपने नापाक इरादों को पूरा करने के लिए करता रहा है। हमें इसे लेकर भी सतर्क और चौक्कना रहना होगा। अगर ऐसा करने में कामयाब रहे तो नई ड्रोन नीति देश की तस्वीर बदलने वाली साबित होगी इसमें कोई दोराय नहीं।

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