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महिलाओं के प्रति बर्बरता पर लगाम लगाना जरूरी

महिलाओं पर बर्बरता का अजीब ट्रेंड देखा जा रहा है। यूं तो हमारा समाज सदियों से महिलाओं के प्रति असहिष्णु रहा है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हाल के वर्षों में महिलाओं के प्रति हिंसा बढ़ी है। देश के अलग-अलग हिस्से से अक्सर महिलाओं, युवतियों व नाबालिग लड़कियों के प्रति यौन हिंसा समेत अन्य प्रकार की दरिंदगी की घटनाएं सामने आती रहती हैं।

महिलाओं के प्रति बर्बरता पर लगाम लगाना जरूरी
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महिलाओं पर बर्बरता का अजीब ट्रेंड देखा जा रहा है। यूं तो हमारा समाज सदियों से महिलाओं के प्रति असहिष्णु रहा है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हाल के वर्षों में महिलाओं के प्रति हिंसा बढ़ी है। देश के अलग-अलग हिस्से से अक्सर महिलाओं, युवतियों व नाबालिग लड़कियों के प्रति यौन हिंसा समेत अन्य प्रकार की दरिंदगी की घटनाएं सामने आती रहती हैं।

आधी आबादी के साथ अपमान, छेड़छाड़, बलात्कार, गैंगरेप, मारने-पीटने की घटनाओं में इस कदर वृद्धि देखने को मिल रही है, जैसे वह कोई प्रॉपर्टी हो। कोई जैसा चाहे, उनके साथ सलूक करे। यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मसार करने वाली है। हम दुनिया में श्रेष्ठ संस्कृति का, श्रेष्ठ समाज का, उच्च नैतिकता का, संवेदनशील मानवता का ढिंढोरा पीटते हैं, लेकिन हम देश के अंदर महिलाओं के प्रति हिंसा को रोक नहीं पा रहे हैं।

देश की राजधानी दिल्ली में एक पुलिसकर्मी के बेटे का एक लड़की को बेरहमी से पीटना और उसका वीडियो बनाकर वायरल करना दिखाता है कि पुरुषों का एक तबका किस मध्ययुगीन मानसिकता में है। उनमें महिलाओं के लिए जरा भी आदर-सम्मान का भाव नहीं है। सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर चल रहे वीडियो में दिखता है कि आरोपित पुलिसकर्मी का बेटा रोहित पहले लड़की को पीटता है, फिर पेट पर जोर की लात मारकर गिरा देता है।

उसके बाद उसे घसीटता है। वीडियो में युवक के दोस्तों की आवाज आती है जो उसे मारने से रोकते हैं, लेकिन कोई उसे रोकने को आगे नहीं बढ़ता है। यह घटना दिखाती है कि एक लड़की को पीटना न आरोपित युवक को खलता है और न उसके दोस्तों को। अभी एक दिन पहले ही रेवाड़ी में एक टॉपर युवती के साथ गैंगरेप की घटना घटी है। ऐसी घटनाएं इकलौती नहीं हैं,

बल्कि निर्भया कांड के बाद रेप के खिलाफ कठोर कानून बनने के बावजूद दरिंदगी की इंतहा पार कर देने वाले कई दुष्कर्म की घटनाएं हुई हैं। ऐसा नहीं है कि महिलाओं के प्रति अनपढ़ लोग हिंसा कर रहे हैं, बल्कि पढ़े-लिखे लोग भी यौन अपराध व मारपीट कर रहे हैं। दिल्ली की एक कोर्ट ने पर्यावरणविद व टेरी के पूर्व प्रमुख आरके पचौरी पर यौन उत्पीड़न का आरोप तय करने का आदेश दिया है।

इससे पहले भी एलएलबी की छात्रा प्रियदर्शिनी रेप-हत्या में आईपीएस अधिकारी का बेटा संतोष सिंह और जेसिका लाल हत्याकांड में अमीर नेता का बेटा मनु शर्मा को सजा मिली है। इन सभी केस में आरोपित में पढ़े-लिखे हैं। ये घटनाएं सामंती मानसिकता के उदाहरण हैं। महिलाओं के प्रति प्रताड़ना, स्वच्छंदता, उदंडता, हिंसा और अपराध की घटनाओं को तत्काल रोकने की जरूरत है, वरना हमें सभ्य समाज कहलाने का कोई हक नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़ केस में पति की तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधान को बहाल करने से दहेज के नाम पर महिलाओं को प्रताड़ित करने वालों में कानून का भय बढ़ेगा। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के सालाना आंकड़े में भी महिलाओं के प्रति यौन अपराध के मामले ज्यादा बढ़े हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध को रोकने के लिए कानून के पालन को सुनिश्चित करने के साथ-साथ समाज को भी सेंसेटाइज करने की जरूरत है।

आज बेटों को अधिक संस्कारित करने की जरूरत है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर बेहतर उदाहरण पेश किया है। पुलिस, अफसर या नेता के बेटों को कानून तोड़ने का अधिकार नहीं मिल जाता है, कानून सबके लिए समान है। बिना किसी भेदभाव के हर अपराधी को कानूनसम्मत सजा मिलनी ही चाहिए, ताकि महिलाओं के प्रति अपराध पर लगाम लग सके।

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