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हरिभूमि संपादकीय लेख: संकट में फंसा सकती है शराब के ठेकों पर भीड़

दिल्ली में सोमवार से शराब की दुकानों खोलने की अनुमति दे दी गई, हरियाणा में बुधवार से शराब की दुकानें खुलनी हैं। यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार की तरफ से जारी गाइडलाइंस को ध्यान में रखा जाएगा। एक समय में अधिकतम पांच व्यक्तियों के साथ न्यूनतम छह फीट की सामाजिक दूरी सुनिश्चित करने के बाद शराब, पान और तंबाकू की बिक्री की अनुमति होगी, लेकिन दुकानें खुलते ही सारे नियमों की धज्जियां उड़ गईं। दुकानों के बाहर लंबी कतार लग गई। न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हुआ और न ही सुरक्षा मानक अपनाए गए।

बेंगलुरु में बंद किए गए पब और शराब की दुकानें तय समय से पहले खुलेंगी :  पुलिस आयुक्तBengaluru Commissioner of Police Alok Kumar withdraws ban on sale of liquor from 6 pm today

शराब की दुकानों पर उमड़ी भीड़ देखकर निदा फाजली का शेर याद आता है, कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई, आओ कहीं शराब पिएं रात हो गई। लॉकडाउन के दो चरण पूरे होने के बाद शराब की दुकानें खुलते ही पियक्कड़ों की भीड़ उमड़ पड़ी। यहां तक कि लोग कोरोना वायरस के खतरे से भी बेखबर नजर आए। ऐसा लगा कि लोग घर बैठे-बैठे इतने उकता गए कि उन्हें शराब की याद सताने लगी। दिल्ली में सोमवार से शराब की दुकानों खोलने की अनुमति दे दी गई, हरियाणा में बुधवार से शराब की दुकानें खुलनी हैं। यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार की तरफ से जारी गाइडलाइंस को ध्यान में रखा जाएगा। एक समय में अधिकतम पांच व्यक्तियों के साथ न्यूनतम छह फीट की सामाजिक दूरी सुनिश्चित करने के बाद शराब, पान और तंबाकू की बिक्री की अनुमति होगी, लेकिन दुकानें खुलते ही सारे नियमों की धज्जियां उड़ गईं।

दुकानों के बाहर लंबी कतार लग गई। न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हुआ और न ही सुरक्षा मानक अपनाए गए। ऐसा ही हाल आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ समेत देश के अन्य राज्यों में हुआ। लोग जरूरत की एक बोतल के स्थान पर चार-चार बोतलें खरीदते नजर आए तो राज्य सरकारों ने भी इसका लाभ उठाते हुए करों में भारी भरकम बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया। सबसे पहले आंध्रप्रदेश में 25 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाने का ऐलान किया। इसके बाद भी भीड़ में कमी नहीं आई तो कर को 25 से बढ़ाकर 75 फीसदी कर दिया गया। दिल्ली सरकार ने भी शराब 70 फीसदी महंगी कर दी। शराब की दुकानों पर उमड़ी भीड़ को देखते हुए देश के दो राज्यों पंजाब और छत्तीसगढ़ ने तो शराब की होम डिलीवरी की भी तैयारी कर ली है। इससे तय है कि राज्य सरकारें किसी भी सूरत में शराब बेचने को बेचैन हैं। राज्यों की इस नीति से साफ झलता है कि वे लॉकडाउन के दौरान हुए राजस्व घाटे की पूर्ति के लिए शराब का सहारा ले रहे हैं।

एक नजारा राजधानी दिल्ली में देखने को भी मिला। एक शख्स ने शराब खरीदने वालों पर फूल बरसाने शुरू कर दिए। जब कारण पूछा गया तो उसने बताया कि सरकार के पास पैसा नहीं है और शराब खरीदार देश की अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। यह सही है कि शराब राज्य सरकारों के लिए राजस्व प्राप्ति का सबसे बड़ा जरिया है इसलिए राज्य सरकारें हर वर्ष इस मद से राजस्व बढ़ाने का जरिया खोजती रहती हैं। यही कारण रहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के 500 मीटर दूरी तक शराब की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया तो अनेक राज्यों ने सुविधा के हिसाब से राजमार्गों को ही तहसील मार्ग में बदल दिया। कैसी विडंबना है कि सरकारें शराब को ही विकास का माध्यम मान रही है। जबकि कड़वा सच यह है कि शराब ने युवा पीढ़ी को गर्त में धकेला है।

देश में हर वर्ष शराब के चलते पांच लाख से भी ज्यादा सड़क हादसे होते हैं, जिसमें एक लाख से भी ज्यादा लोग जान गंवाते हैं। जहां तक बात शराब से विकास की है तो महात्मा गांधी के गृह राज्य गुजरात को देखें। 1960 से जब महाराष्ट्र से अलग करके गुजरात को नया राज्य बनाया गया तभी से वहां शराबबंदी लागू है। राज्य में न तो दुकानें हैं और न ही शराब के निर्माण की इजाजत है। इसके बावजूद गुजरात देश का सबसे उन्नत राज्य है। अन्य राज्य सरकारों को राजस्व जुटाने के लिए शराब नहीं बल्कि अन्य संसाधानों पर ध्यान लगाना होगा। शराब विकास नहीं, विनाश करती है। ऐसे समय में जब कोरोना का संकट दिन प्रतिदिन गंभीर होता जा रहा है, शराब की दुकानों पर भीड़ जुटना पूरे देश के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

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