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डॉ. जयंतीलाल भंडारी का लेख : जीडीपी के सामने कोरोना की चुनौती

हाल ही में 9 मार्च को आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नए वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर में बड़े इजाफे की संभावना है। लेकिन अर्थव्यवस्था को तेजी से गतिशील करने और आगामी वित्त वर्ष 2021-22 में भारत को दुनिया में सबसे तेज विकास दर वाला देश बनाने की वैश्विक आर्थिक रिपोर्टों को साकार करने के लिए कई बातों पर ध्यान देना होगा। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कई वित्तीय चुनौतियां अभी भी सामने खड़ी हुई हैं।

डॉ. जयंतीलाल भंडारी का लेख : जीडीपी के सामने कोरोना की चुनौती
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डॉ. जयंतीलाल भंडारी 

डॉ. जयंतीलाल भंडारी

विगत 17 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संक्रमण में वृद्धि पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वर्चुअल चर्चा करते हुए कहा कि देश के 16 राज्यों के 70 जिलों में कोरोना संक्रमण के मामलों में 50 फीसदी की वृद्धि देखी गई है। ऐसे में तेजी से बढ़ती हुई कोरोना की दूसरी लहर को रोकने के लिए त्वरित और निर्णायक कदम उठाने जाने की जरूरत है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि इस समय देश की बढ़ती हुई विकास दर के सामने बड़ी चुनौती बढ़ते हुए कोरोना संक्रमण की है। कोरोना संक्रमण को हरसंभव तरीके से रोकना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि बीते वर्ष 2020 की आर्थिक निराशा से निकलकर धीरे-धीरे विकास दर बढ़ने का ग्राफ दिखाई दे रहा है। साथ ही केंद्र सरकार को प्रत्यक्ष कर संग्रह के बढ़ते हुए आंकड़ों से राहत मिल रही है। चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में 16 मार्च तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह करीब 9.18 लाख करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले चार वर्षों में पहली बार संशोधित बजट लक्ष्य से अधिक है।

हाल ही में 9 मार्च को आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नए वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर में बड़े इजाफे की संभावना है। कहा गया है कि भारत की जीडीपी में नए वित्त वर्ष में 12.6 फीसदी की दर से वृद्धि होगी। इससे भारत विश्व में सबसे तेजी से विकसित होने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान फिर हासिल कर लेगा। इसी तरह वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अगले वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान पहले अनुमानित किए गए 10.8 से बढ़ाकर 13.7 प्रतिशत कर दिया है। आर्थिक गतिविधियों के सामान्य होने और कोविड-19 का टीका बाजार में आने के बाद भारतीय बाजार में बढ़ते विश्वास को देखते हुए यह नया अनुमान लगाया गया है। इस रेटिंग एजेंसी ने इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में आने वाली गिरावट के अनुमान को भी अपने पहले के 10.6 प्रतिशत में सुधार लाते हुए इसे 7 प्रतिशत कर दिया है। उल्लेखनीय है कि पिछले माह 26 फरवरी को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी किए गए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2020) में विकास दर में 0.4 फीसदी की वृद्धि हुई है। देश में विकास दर पहली तिमाही में माइनस 24.4 फीसदी और दूसरी तिमाही में माइनस 7.3 फीसदी रही थी। ऐसे में अब भारत दुनिया की 10 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में चीन के बाद दूसरा देश बन गया है, जहां विकास दर सकारात्मक हो गई है।

इसमें कोई दोमत नहीं है कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में लॉकडाउन के कारण तेज गिरावट और फिर दूसरी तिमाही में सुधार के संकेत के बाद विकास दर बढ़ने का आंकड़ा अर्थव्यवस्था में तेज सुधार का परिचायक हैं। इस सुधार में अहम भूमिका एग्रीकल्चर, कंस्ट्रक्शन, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों की रही है। हालांकि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी में 8 फीसदी गिरावट आने का अनुमान लगाया गया है। पहले 7.7 फीसदी गिरावट का अनुमान जताया गया था। यद्यपि वर्ष 2021 की शुरुआत से ही अर्थव्यवस्था में सुधार दिखाई दे रहा है, लेकिन अर्थव्यवस्था को तेजी से गतिशील करने और आगामी वित्त वर्ष 2021-22 में भारत को दुनिया में सबसे तेज विकास दर वाला देश बनाने की वैश्विक आर्थिक रिपोर्टों को साकार करने के लिए कई बातों पर ध्यान देना होगा। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कई वित्तीय चुनौतियां अभी भी सामने खड़ी हुई हैं। केंद्र और राज्य दोनों की वित्तीय स्थिति संतोषजनक रूप नहीं ले सकी हैं। बॉन्ड बाजार भी बढ़ी हुई सरकारी उधारी के लगातार जारी रहने से चिंताएं प्रस्तुत कर रहा है। मौद्रिक नीति से अधिक मदद की संभावना भी कम बनी हुई है।

इस ओर ध्यान देना होगा कि जीडीपी के आंकड़ों के अनुसार जिन सेक्टरों के लिए अपेक्षा के अनुकूल वृद्धि नहीं हुई है, उन सेक्टरों में प्राथमिकता के आधार पर समस्याओं का निवारण किए जाए। यद्यपि विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र का प्रस्तुतीकरण अपेक्षाकृत बेहतर रहा है, किन्तु सेवा क्षेत्र के कुछ हिस्से पिछड़े हुए पाए गए हैं। यद्यपि कॉर्पोरेट क्षेत्र में तेज सुधार देखने को मिला है, लेकिन असंगठित क्षेत्र और छोटे कारोबार अभी भी संतोषजनक रूप से भी गतिशील नहीं हो पाए है। उन सेक्टरों की बेहतरी के लिए खास उपाय करने होंगे, जो अधिक रोजगार के अवसर पैदा करते हैं। चूंकि इस समय कोरोना संकट देश में एक बार फिर से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है, अतएव कोरोना संक्रमण को बढ़ने से रोकने और कोरोना टीकाकरण की सफलता पर प्राथमिकता से ध्यान दिया जाना होगा।

निस्संदेह देश की विकास दर बढ़ाने के लिए पिछले माह एक फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा पेश किए गए आगामी वित्त वर्ष 2021-22 के अभूतपूर्व बजट का शुरुआत से सफल कार्यान्वयन जरूरी होगा। कोरोना वायरस से बचाव के लिए टीकाकरण एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च में भारी वृद्धि की गई है। जहाँ वोकल फॉर लोकल के तहत घरेलू उद्योगों के लिए चमकीले प्रोत्साहन दिए गए हैं, वहीं मेक इन इंडिया और निर्यात वृद्धि के लिए नई रेखाएं खीचीं गई हैं। रोजगार के नए अवसर पैदा करने के प्रयास किए गए हैं। तेजी से घटे हुए निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए आकर्षक प्रावधान किए गए हैं। नए बजट के तहत वित्तीय आवंटनों का अच्छा उपयोग देश की विकास दर को बढ़ाते हुए दिखाई दे सकेगा। इस बात पर भी ध्यान दिया जाना होगा कि देश में लोगों की खर्च संबंधी धारणा को बेहतर बनाया जाए। 9 मार्च को डेटा एनालिटिक्स फर्म नीलसन के द्वारा कोरोना के चलते भारतीय उपभोक्ताओं के खर्च की प्रवृत्ति पर प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में रह रहे शहरी आबादी पर कोरोना संक्रमण रोकने को लेकर जारी प्रतिबंध का असर अभी तक पड़ रहा है। इसके चलते 63 फीसदी उपभोक्ता की आय में गिरावट आई है। जिसके चलते वे विवशता में अपने खर्च को घटाने पर मजबूर हुए हैं। इसके साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए जरूरी है कि उपभोक्ता बाजार में बुनियादी जरूरतों के लिए अधिक खर्च करने की चाह पैदा की जाए।

हम उम्मीद करें कि 17 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा में कोरोना की दूसरी लहर को नियंत्रित करने के लिए जो सूत्र वाक्य दिए हैं। उनके क्रियान्वयन से कोरोना संक्रमण नियंत्रित होगा। इससे मंदी से बाहर निकली देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार और विकास दर बढ़ने का ग्राफ नीचे नहीं आएगा। हम उम्मीद करें कि सरकार सकल मांग और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए देश के निजी निवेश को हरसंभव तरीके से प्रोत्साहित करेगी।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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