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संपादकीय लेख : बहुत जांच परख के बाद बच्चों का टीकाकरण हो

भारत सरकार को बच्चों के लिए नए कोविड वैक्सीन को मंजूरी देने व उसे शुरू करने की दिशा में हड़बड़ी में कोई कदम नहीं उठाना चाहिए। इस बात से सभी चिकित्सक भी अवगत हैं कि बच्चों का इम्यून सिस्टम काफी मजबूत होता है, उन्हें जल्दी कोई रोग नहीं होता है, इन्फेक्सियस डिजीज भी अपनी चपेट में जल्दी नहीं ले पाते हैं, इसलिए बच्चों के लिए कोविड वैक्सीनेशन की शुरूआत संभावित दुष्प्रभाव की जांच परख के बाद सरकार को सोच समझकर करनी चाहिए।

संपादकीय लेख : बहुत जांच परख के बाद बच्चों का टीकाकरण हो
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : यह सही है कि कोरोना महामारी का खतरा अभी टला नहीं है, इसके डेल्टा प्लस वैरिएंट के बाद ओमिक्रॉन वैरिएंट आने से कोरोना की दहशत फिर से दस्तक देने लगी है। खास बात है कि दो गंभीर लहर झेलने के बावजूद भारत में डेल्टा प्लस वैरिएंट का असर नहीं देखा गया, इक्के-दुक्के केस से अधिक कुछ नहीं हुआ। ओमिक्रॉन वैरिएंट के भी केस अभी देश में नहीं है, लेकिन भारत सरकार ओमिक्रॉन के संभावित खतरे से निपटने के लिए मुस्तैदी के तैयार है। सरकारों ने ऑफलाइन स्कूल बंद कर दिए हैँ, अंतराष्ट्रीय उड़ानों को शुरू करने के फैसले को टाल दिया है, राज्यों को अलर्ट पर रहने को कहा गया है। टीकाकरण अभियान भी तेजी से जारी है। भारत ने बहुत ही समझदारी से कोरोना को नियंत्रित किया है, देश में रोजाना आने वाले केस कम हुए हैं, उपचाराधीन एक्यूट केस भी काफी कम हैं, कहीं भी स्टि्रक्ट लॉकडाउन नहीं है, अर्थव्यवस्था कोरोना मुक्त हो गई है। चाहे पहली लहर हो या दूसरी, भारत में बच्चों के कोविड पॉजिटव केस काफी कम आए, आबादी के अनुपात में नहीं के बराबर।

इन सब सकारात्मक स्थिति को देखते हुए भारत सरकार को बच्चों के लिए नए कोविड वैक्सीन को मंजूरी देने व उसे शुरू करने की दिशा में हड़बड़ी में कोई कदम नहीं उठाना चाहिए। इस बात से सभी चिकित्सक भी अवगत हैं कि बच्चों का इम्यून सिस्टम काफी मजबूत होता है, उन्हें जल्दी कोई रोग नहीं होता है, इन्फेक्सियस डिजीज भी अपनी चपेट में जल्दी नहीं ले पाते हैं, इसलिए बच्चों के लिए कोविड वैक्सीनेशन की शुरूआत संभावित दुष्प्रभाव की जांच परख के बाद सरकार को सोच समझकर करनी चाहिए। ऐसा इसलिए भी कि नार्वे, स्वीडन, फिनलैंड, ताइवान, पाकिस्तान, क्यूबा जैसे देशों ने साइड इफेक्ट के चलते बच्चों के वैक्सीनेशन को बीच में ही रोक दिया है। अभी तक विश्व में 100 से अधिक देशों ने अपने यहां बच्चों के टीकाकरण को मंजूरी दी है, जिसमें भारत भी शामिल है, लेकिन दो तिहाई देशों ने टीकाकरण शुरू नहीं किया है। अमेरिका, कनाडा, यूके, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मोरक्को, 27 देशों वाले यूरोपीय संघ, क्यूबा, वेनेजुएला, ब्राजील, यूएई, बहरीन आदि देशों ने बच्चों का टीकाकरण शुरू किया है। अभी बच्चों की वैक्सीन के लिए 92 से अधिक देशों ने मोडर्ना, ईयू समेत 57 देशों ने फाइजर, चीन व यूएई ने सिनोफार्म, सिनोवैक और क्यूबा समेत 17 देशों ने सोबरोना को मंजूरी दी है।

पर शुरू सबने नहीं किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फाइजर समेत कई टीके को स्वीकृति दी है। भारत में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2 से 18 साल तक के बच्चों के लिए भारत बायोटेक की स्वदेशी वैक्सीन को मंजूरी दी है। और टीके भी मंजूरी की लाइन में हैं। अभी देखा गया है कि बच्चों को टीके की पहली डोज दिए जाने के बाद उनकी हृदय धमनियों सूजन की शिकायतें आईं। दरअसल वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया में करीब दस साल लगते हैं, तभी जाकर किसी वैक्सीन के सटीक होने का प्रमाण मिलता है। कोविड वैक्सीन मामले में इस चिकित्सकीय गाइडलाइन का पूर्ण पालन नहीं हुआ है। कम समय व कम सैंपल के ट्रायल के बाद जल्दीबाजी में कोविड टीके को अपात मंजूरी दी गई है। इसका नतीजा भी देखने को मिला है कि दोनों डोज लेने के बावजूद कई लोग संक्रमित हुए। वैक्सीनेशन अभियान से जुड़े संगठन, चिकित्सक खुद लोगों को सावधान करते नजर आए कि टीके बाद भी कोविड होने का खतरा है और एहतियात बरतना जरूरी है। कहने का तात्पर्य यह है कि टीके के बाद भी सौ फीसदी खतरा टलता नहीं है। वैक्सीन बनने और वायरस के नए वैरिएंट के सामने आने का एक सेट पैटर्न दिखाई पड़ता है। हमारी सरकार को वैश्विक फार्मा लॉबी के दबाव में आकर कोई फैसला नहीं करना चाहिए, राष्ट्र के लिए बच्चों का भविष्य महत्वपूर्ण है, इसलिए बहुत ही ठोक बजाकर बच्चों के लिए टीकाकरण शुरू करना चाहिए।

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