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डॉ. जयंतीलाल भंडारी का लेख : वैक्सीन का हब बनने का मौका

जब कोरोना की दूसरी घातक लहर के बीच देश में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति दिखाई दे रही है, तब देश और दुनिया की कोरोना वैक्सीन की जरूरतों की पूर्ति के लिए रणनीतिपूर्वक आगे बढ़ रहे भारत के लिए अमेरिका की नई पेशकश महत्वपूर्ण है। इससे भारत कोरोना वैक्सीन निर्माण के नए मुकाम की ओर तेजी से आगे बढ़ते हुए वैश्विक मानव कल्याण में अहम भूमिका निभाते हुए दिखाई दे सकेगा। केंद्र सरकार ने कोरोना की वैक्सीन बनाने वाली देश की दोनों कंपनियों से कहा कि वे वैक्सीन की कीमत घटाएं। केंद्र सरकार की कोरोना टीका उत्पादन व वितरण की नई नीति से जहां टीका विनिर्माता कंपनियों के लिए बड़ा बाजार खुल गया है।

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डॉ. जयंतीलाल भंडारी

हाल ही में 26 अप्रैल को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच टेलीफोन वार्ता में जो बाइडेन ने कहा कि अमेरिका भारत के लिए कोरोना वैक्सीन के उत्पादन से संबंधित आवश्यक कच्चे माल की आपूर्ति पर लगी रोक को हटाते हुए इसकी सरल आपूति सुनिश्चित करेगा। बाइडेन ने यह भी कहा कि जिस तरह कोरोना महामारी की शुरुआत में भारत ने अमेरिका को मदद भेजी थी, उसी तरह अब अमेरिका भी भारत की मदद के लिए कटिबद्ध है।

निस्संदेह इस समय जब कोरोना की दूसरी घातक लहर के बीच देश में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति दिखाई दे रही है, तब देश और दुनिया की कोरोना वैक्सीन की जरूरतों की पूर्ति के लिए रणनीतिपूर्वक आगे बढ़ रहे भारत के लिए अमेरिका की नई मदद महत्वपूर्ण है। इससे भारत कोरोना वैक्सीन निर्माण के नए मुकाम की ओर तेजी से आगे बढ़ते हुए वैश्विक मानव कल्याण में अहम भूमिका निभाते हुए दिखाई दे सकेगा। गौरतलब है कि कोई एक साल पहले जब फरवरी-मार्च 2020 में देश में कोरोना संक्रमण की पहली लहर शुरू हुई थी, तब देश में कोरोना की रोकथाम के लिए कोरोना वैक्सीन से संबंधित शोध और उत्पादन के विचार आने शुरू हुए थे। सामान्य तौर पर किसी बीमारी का टीका बनाने में कई वर्ष लगते हैं, लेकिन भारत में कोरोना वायरस की चुनौती के मद्देनजर कुछ महीनों के अंदर कोरोना के टीका बनाने का कठिन लक्ष्य पूरा किया गया और बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर दिया गया।

यह भी महत्वपूर्ण है कि देश में कोरोना वैक्सीन के दाम दुनिया में सबसे कम हैं। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रोजेनेका के साथ मिलकर बनाई गई सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड तथा स्वदेश में विकसित भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का उपयोग 16 जनवरी से शुरू हुए देशव्यापी टीकाकरण अभियान में किया जा रहा है। देश में 26 अप्रैल तक कोरोना वैक्सीन की 14 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी है। कोविड-19 टीकाकरण के लिए भारत का डिजिटल बुनियादी ढांचा वरदान बन गया है। भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश हैं जहां सभी को टीकाकरण का तुरंत डिजिटल प्रमाण पत्र दिया जाता है। जिसे ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन कहीं भी सत्यापित किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि 20 अप्रैल को केंद्र सरकार ने टीका वितरण के जो नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, वे कोरोना से रोकथाम और अर्थव्यवस्था के लिए लाभप्रद हैं। इसके तहत 1 मई से 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी भारतीयों को टीका लगाया जा सकेगा। सरकार स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम पंक्ति पर काम करने वालों के नि:शुल्क टीकाकरण का 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के दायित्व बनाए रखेगी। राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपनी उपयुक्तता के अनुरूप कोरोना टीका उत्पादक देशी या विदेशी कंपनियों से टीके की खरीदी तथा अपने प्रदेश में टीका लगाने संबंधी उपयुक्त निर्णय ले सकेंगी । यह भी महत्वपूर्ण है कि 26 अप्रैल को केंद्र सरकार ने कोरोना की वैक्सीन बनाने वाली देश की दोनों कंपनियों से कहा कि वे वैक्सीन की कीमत घटाएं। निस्संदेह केंद्र सरकार की कोरोना टीका उत्पादन व वितरण की नई नीति से जहां टीका विनिर्माता कंपनियों के लिए बड़ा बाजार खुल गया है,वहीं मानव कल्याण के मद्देनजर भारत के लिए कोरोना वैक्सीन का वैश्विक उत्पादक देश बनने की डगर भी आगे बढ़ी है।

देश में सरकार के समर्थन से दुनिया की सबसे बड़ी टीका विनिर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया अपनी मासिक उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 20 करोड़ खुराक कर सकती है। भारत बायोटेक सालाना 70 करोड़ खुराक की उत्पादन क्षमता तथा जाइडस कैडिला सालाना उत्पादन क्षमता 24 करोड़ खुराक करने की डगर पर आगे बढ़ सकती है। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि सरकार ने कोरोना टीकाकरण में अहम भूमिका निभाने वाली दो भारतीय टीका निर्माता कंपनियों सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक को क्रमश: 3,000 करोड़ रुपये और 1,500 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि दी जानी सुनिश्चित की है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि भारत कोरोना वैक्सीन का भी वैश्विक स्तर पर बड़ा सप्लायर बनने की तैयारी कर रहा है। इस दिशा में 15 अप्रैल को सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशंस की तरफ से कई अहम फैसले लिए गए हैं। भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की इमरजेंसी यूज लिस्टिंग में सूचीबद्ध कोरोना वैक्सीन के भारत में आने का रास्ता साफ कर दिया है, जिससे तत्काल विदेशी वैक्सीन का आयात किया जा सकेगा। वैक्सीन उत्पादन से जुड़े कच्चे माल का आयात करके बड़ी मात्रा में कोरोना वैक्सीन का निर्यात भी किया जा सकेगा। अब शीघ्र ही विदेशी कंपनियां भारत में अपनी सब्सिडियरी या फिर अपने अधिकृत एजेंट के माध्यम से वैक्सीन का उत्पादन कर सकेंगी। हैदराबाद की प्रमुख दवा कंपनी डॉ. रेड्डी लैबोरेटरीज कोविड-19 के लिए रूस में तैयार टीका स्पूतनिक वी के लिए भारतीय साझेदार है।

स्तूपनिक वी का 60 से 70 फीसदी वैश्विक उत्पादन भारत में होगा। इतना ही नहीं क्वाड ग्रुप के चार देशों अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत के द्वारा भारत में वर्ष 2022 के अंत तक कोरोना वैक्सीन के सौ करोड़ डोज निर्मित कराने और इस कार्य में भारत को वित्तीय व अन्य संसाधन जुटाकर सहयोग करने का जो निर्णय लिया है, इससे भी भारत के दुनिया की कोरोना वैक्सीन महाशक्ति के रूप में उभरने में मदद मिलेगी। विभिन्न रिपोर्टों में कहा गया है कि दुनिया कुछ विकसित देश इस वर्ष 2021 के अंत तक कोरोना टीकाकरण के पूर्ण लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे। पर भारत के लिए भी 2022 अंत तक टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त करना मुश्किल भरा काम होगा। दुनिया के अधिकांश गरीब व विकासशील देशों के लिए टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त करने में लंबा समय लगेगा।

ऐसे में यदि सभी गरीब और विकासशील देशों की पहुंच वैक्सीन तक संभव नहीं हो सकी, तो विश्व मानवता और विश्व अर्थव्यवस्था को नुकसान उठाना पड़ेगा। यदि गरीब और मध्यम आय वर्ग वाले देशों को वैक्सीन नहीं मिली, तो दुनिया के करोड़ों लोगों को कोरोना की पीड़ाओं से बचाने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना कठिन होगा, क्योंकि कोरोना नए-नए रूप में जान लेता रहेगा। ऐसे में दुनिया के गरीब और विकासशील देशों के लोगों के लिए टीकाकरण में भारत की कल्याणकारी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी।

निश्चित रूप से दुनिया में कोरोना महामारी से हाहाकार के बीच भारत के कोरोना वैक्सीन के उत्पादन का वैश्विक हब बनने की जो नई संभावनाएं निर्मित हुई हैं, उन्हें रणनीतिक प्रयासों से मुठ्ठियों में लिए जाने का हरसंभव प्रयास किया जाना होगा। हम उम्मीद करें कि भारत कोरोना वैक्सीन का वैश्विक हब बनकर देश और दुनिया के करोड़ों लोगों को कोरोना महामारी की पीड़ाओं से बचाने में मानवीय कल्याणकारी भूमिका निभाते हुए दिखाई देगा।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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