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हरिभूमि संपादकीय लेख: बेलौस और सर्वप्रिय कलाकार चला गया

सा कहा जाता है कि ऋषि कपूर उर्फ चींटूजी जन्म के साथ ही अपना फिल्मी सफर भी लिखवाकर आए थे। उनका जन्म 4 सितम्बर 1952 को अपने जमाने के मशहूर अभिनेता, निर्देशक राज कपूर के घर हुआ। महज तीन साल की उम्र में ही वे फिल्मी पर्दे पर उतर आए थे।

Rishi Kapoor Death: ऋषि कपूर को दो साल पहले हुआ था ल्यूकेमिया, जानें इस बीमारी से जुड़ी जानकारीऋषि कपूर दो साल पहले हुए थे ल्यूकेमिया का शिकार (फाइल फोटो)

कोकोराेना संकट में पूरा देश लॉकडाउन से जूझ रहा है। वहीं फिल्म नगरी बॉलीवुड के लिए ये दिन किसी सदमे से कम नहीं हैं। फिल्म जगत अभी इरफान खान के जाने के गम से उभरा भी नहीं था कि गुरुवार की सुबह ऋषि कपूर की मौत की खबर आ गई। 67 साल के ऋषि कपूर को खराब तबीयत के चलते बुधवार रात मुंबई के एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रोमांस के बादशाह ऋषि कपूर अपने चाहने वालों का दिल तोड़कर वहां चले गए, जहां से कोई वापस नहीं आता।

ऐसा कहा जाता है कि ऋषि कपूर उर्फ चींटूजी जन्म के साथ ही अपना फिल्मी सफर भी लिखवाकर आए थे। उनका जन्म 4 सितम्बर 1952 को अपने जमाने के मशहूर अभिनेता, निर्देशक राज कपूर के घर हुआ। महज तीन साल की उम्र में ही वे फिल्मी पर्दे पर उतर आए। उन्होंने अपनी पहली स्क्रीन अपीयरेंस पिता राज कपूर की फिल्म श्री 420 में दी। राजकपूर और नर्गिस के सदाबहार गीत प्यार हुआ इकरार हुआ है के एक सीन में वो अपने भाई और बहन के साथ नजर आए।

ऋषि कपूर ने 1970 में राज कपूर की ड्रीम प्रोजेक्ट फिल्म मेरा नाम जोकर में उनका बचपन का किरदार निभाया, जो इतना पसंद किया गया कि उन्हें अपनी पहली ही फिल्म के लिए ही सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय पुरस्कार मिल गया। इसके बाद राज कपूर ने 1973 में फिल्म बॉबी बनाई जिसमें ऋषि कपूर को डिंपल कपाड़िया के साथ लॉन्च किया। इस फिल्म ने तो मानो युवाओं को ऋषि कपूर का दीवाना ही बना दिया। उनके पिता राजकपूर ने फिल्म का निर्माण मेरा नाम जोकर से हुए नुकसान की भरपाई के लिए किया था, लेकिन इसमें ऋषि कपूर के चॉकलेटी चेहरे को युवाओं ने इतना पसंद किया कि फिल्म अपने आप में मील का पत्थर साबित हुई। इसी फिल्म के लिए ऋषि कपूर को पहली बार बेस्ट मेल कलाकार फिल्मफेयर सम्मान से नवाजा गया।

यह अपने आप में इतिहास है कि 1970 से लेकर 2000 तक लगातार 30 साल ऋषि कपूर फिल्मों में रोमांस के बादशाह बने रहे। ऋषि कपूर ने 92 फिल्मों में रोमांटिक हीरो का किरदार अदा किया। इनमें से 36 फिल्में सुपरहिट रहीं। ऐसा नहीं है कि चींटूजी केवल रोमांटिक भूमिका तक ही सीमित थे। उन्होंने हर तरह के किरदार किए और अपने खास तरह छाप छोड़ी। ऋषि कपूर ने एक दो नहीं बल्कि 51 फिल्मों में बतौर सोलो हीरो काम किया, इसमें से सिर्फ 11 ही सुपरहिट रहीं। 1989 में आई चांदनी फिल्म में ऋषि कपूर, विनोद खन्ना और श्रीदेवी मुख्य भूमिका में थे। यह इतेफाक ही है कि इन तीनों कलाकारों ने तीन साल के अंदर दुनिया को अलविदा कह दिया।

साल 2000 के बाद ऋषि कपूर अक्सर सपोर्टिंग रोल्स में ही नजर आए। इस दौर में उनका ये है जलवा, हम तुम, फना, नमस्ते लंदन, दिल्ली-6, लव आज कल, दो दूनी चार, पटियाला हाउस, अग्निपथ, स्टूडेंट ऑफ द ईयर, हाउसफुल 2, जब तक है जान, चश्मे बद्दूर, डी-डे, बेशर्म, शुद्ध देसी रोमांस, कपूर एंड संस, पटेल की पंजाबी शादी, मुल्क, 102 नॉट आउट और राजमा चावल जैसी फिल्में कीं। इनमें भले ही ऋषि कपूर लीड रोल में नहीं थे, लेकिन उनके किरदारों और सशक्त अभिनय को जबरदस्त सराहना मिली। राजनीति और समाज को लेकर अपने बेबाक राय रखने वाले ऋषि ने अपने करियर में 135 से ज्यादा फिल्में कीं, 15 से ज्यादा बड़े अवॉर्ड हासिल किए।

हमेशा मुस्कुराते रहने वाले ऋषि कपूर को फिल्म अग्निपथ में खलनायक के किरदार को देख सभी हैरान रह गए। ऋषि को इसके लिए आईफा बेस्ट निगेटिव रोल के अवॉर्ड से भी नवाजा गया। फिल्म 102 नॉट ऑउट में अमिताभ बच्चन के सनकी बेटे के किरदार में ऋषि कपूर ने फिल्म समीक्षकों को भी चौंका दिया। केवल फिल्म ही नहीं ऋषि असल जिंदगी में भी हीरो से कम नहीं थे। अपने पुस्तक खुल्लम-खुला में उन्होंने अपनी जिंदगी के कई ऐसे राज खोले जिन्हें बताने में हर कामयाब इंसान बताने में गुरेज करता है। ऐसी बेबाक, बेलौस और सर्वप्रिय हस्ती का यूं चले जाने बॉलीवुड ही नहीं बल्कि पूरे देश की क्षति है। जिसकी भरपाई होना संभव नहीं, अलविदा ऋषि कपूर।

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