Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

संपादकीय लेख : कोविड प्रोटोकॉल मानने से ही तीसरी लहर से बचाव

यह सही है कि अगर हम चेतेंगे नहीं तो कोरोना की तीसरी लहर आने में देर नहीं लगेगी। एक तरफ विभिन्न अध्ययन व सर्वे में दावा किया गया है कि कोरोना की तीसरी लहर सितंबर से नवंबर के बीच आ सकती है, दूसरी तरफ दूसरी लहर के थमने के बाद देश भर में राज्य सरकारों ने कोरोना लॉकडाउन में काफी ढील दी है, इसका दुष्परिणाम देखने में आ रहा है कि देश के अनेक हिस्से में बाजारों में भीड़ उमड़ने लगी है। यह एक तरह से तीसरी लहर को आमंत्रण देने जैसा है।

संपादकीय लेख : कोविड प्रोटोकॉल मानने से ही तीसरी लहर से बचाव
X

संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : यह सही है कि अगर हम चेतेंगे नहीं तो कोरोना की तीसरी लहर आने में देर नहीं लगेगी। एक तरफ विभिन्न अध्ययन व सर्वे में दावा किया गया है कि कोरोना की तीसरी लहर सितंबर से नवंबर के बीच आ सकती है, दूसरी तरफ दूसरी लहर के थमने के बाद देश भर में राज्य सरकारों ने कोरोना लॉकडाउन में काफी ढील दी है, इसका दुष्परिणाम देखने में आ रहा है कि देश के अनेक हिस्से में बाजारों में भीड़ उमड़ने लगी है। यह एक तरह से तीसरी लहर को आमंत्रण देने जैसा है। दूसरी लहर जिस तरह से घातक सिद्ध हुआ है, हजारों लोगों की जान गई है, उसे देखते हुए हमें सतर्क रहना जरूरी है। कोविड संबंधी सभी हिदायतों का पालन करना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों को चेता चुके हैं कि कोरोना गया नहीं है, इसलिए लापरवाही न बरतें। केंद्र सरकार भी कह चुकी है कि कोरोना की दूसरी लहर कमजोर पड़ गई है, पर यह अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अभी बेशक कोरोना के नए मामले रोजाना पचास हजार से कम आ रहे हैं, लेकिन मामले कुछ न कुछ आ ही रहे हैं, आने बंद नहीं हुए हैं।

वैक्सीनेशन के रफ्तार पकड़ने से केस में कमी भर आई है। इसलिए सबको सावधान रहने की आवश्यकता है। अभी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में अगस्त में तीसरी लहर आने का दावा किया गया है। 'कोविड-19: द रेस टू फिनिशिंग लाइन' नाम से पब्लिश इस रिपोर्ट में कहा गया कि थर्ड वेव का पीक सितंबर में आएगा। इससे पहले एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दूसरी लहर का पीक मई के तीसरे हफ्ते में आएगी, हालांकि पीक 6 मई को ही आ गया था। उस दिन भारत में संक्रमण के क़रीब 4,14,000 नए मामले दर्ज किए गए थे। महामारी के दौरान एक दिन में संक्रमितों की ये सबसे अधिक संख्या रही थी। अब नई रिपोर्ट के मुताबिक तीसरी लहर का पीक दूसरी लहर के पीक से दोगुना या 1.7 गुना ज्यादा होगा। अभी के डेटा के मुताबिक, जुलाई के दूसरे हफ्ते तक रोजाना नए मामलों की संख्या 10 हजार तक आ जाएगी। यह अगस्त के दूसरे पखवाड़े से फिर बढ़ना शुरू होगी। इससे पहले बेंगलुरु बेस्ड देशी-विदेशी 40 चिकित्सा विज्ञानियों की टीम ने अपने सर्वे के आधार पर दावा किया था कि सितंबर से नवंबर के बीच कोविड की तीसरी लहर आ सकती है। उससे पहले नीति आयोग ने भी तीसरी लहर आने की आशंका जताई थी। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने पिछले साल कोरोना संक्रमण मामलों का अनुमान लगाने के लिए एक पैनल का गठन किया था।

ये पैनल मैथमेटिकल मॉडल के जरिए अनुमान लगाता है। अब कोरोना की तीसरी लहर पर पैनल का मानना है कि अगर कोविड प्रोटोकॉल का ठीक तरह से पालन नहीं किया गया तो अक्टूबर-नवंबर में तीसरी लहर अपने पीक पर हो सकती है। ऐसे में अगर लोग अनलॉक में सरकार की ओर से मिली छूटों का दुरुपयोग करेंगे, सार्वजनिक प्लेस, बाजारों में भीड़ जुटेंगे, दो गज की दूरी का पालन नहीं करेंगे, मास्क नहीं लगाएंगे, तो निश्चित ही दूसरी लहर के तीसरी लहर में कन्वर्ट होने में देर नहीं लगेगी। डेल्टा प्लस वैरिएंट भी खतरा बना हुआ है। एक्सपर्ट दावा कर रहे हैं कि यूरोप में कहर बरपा रहे डेल्टा और डेल्टा प्लस दोनों ही वैरिएंट हम सभी के लिए भी चिंता का विषय हैं। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों को देखते हुए, बुजुर्ग व यंग दोनों को डेल्टा वैरिएंट का अधिक खतरा है। इसलिए सरकार की चेतावनी जायज है कि अगर कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जाता है तो वह पाबंदियों में दी गई ढील को फिर से खत्म कर सकती है। जब कोरोना के इतने सारे नए रूप सामने आ रहे हैं, तो सतर्क रहना हमारी जिम्मेदारी और कर्त्तव्य है। कोविड प्रोटोकॉल के सख्त पालन से ही तीसरी लहर से बचाव संभव है।

Next Story