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संपादकीय लेख : महंगाई में राहत के बाद अब जीडीपी पर हो जोर

कोरोना वायरस महामारी से त्रस्त आम आदमी को खुदरा महंगाई दर में राहत अर्थव्यवस्था, सरकार व रिजर्व बैंक लिए सुकून है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में खुदरा महंगाई दर 5.30 फीसदी रही, जो जुलाई में तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंचकर 5.59 फीसदी हो गई थी। यह पिछले 4 महीने में सबसे कम है। अगस्त 2020 के दौरान आपूर्ति श्रृंखला में अड़चनों के कारण देश में खुदरा महंगाई की दर 6.69 फीसदी पर पहुंच गई थी।

संपादकीय लेख : महंगाई में राहत के बाद अब जीडीपी पर हो जोर
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : कोरोना वायरस महामारी से त्रस्त आम आदमी को खुदरा महंगाई दर में राहत अर्थव्यवस्था, सरकार व रिजर्व बैंक लिए सुकून है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में खुदरा महंगाई दर 5.30 फीसदी रही, जो जुलाई में तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंचकर 5.59 फीसदी हो गई थी। यह पिछले 4 महीने में सबसे कम है। अगस्त 2020 के दौरान आपूर्ति श्रृंखला में अड़चनों के कारण देश में खुदरा महंगाई की दर 6.69 फीसदी पर पहुंच गई थी। अगस्त 2021 में खाद्य वस्तुओं के दाम में कमी के कारण खुदरा महंगाई दर लगातार दूसरे महीने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के लक्ष्य के भीतर रही है। आरबीआई का लक्ष्य खुदरा महंगाई दर को 2 फीसदी मार्जिन के साथ 4 फीसदी पर बनाए रखना है। रिजर्व बैंक ने इस वित्त वर्ष में महंगाई दर 5.70% रहने का अनुमान लगाया है।

कच्चे तेल की मांग कमजोर रहने और खाने-पीने के सामान के दाम काबू में रहने से महंगाई ज्यादा नहीं बढ़ेगी। महंगाई दर में गिरावट की मुख्य वजह सब्जियों की कीमत में 11.7 फीसदी की कमी है। हालांकि समीक्षाधीन माह में खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई है। साल-दर-साल आधार पर खाद्य तेल की कीमतों में 33 फीसदी की तेजी आई है। ईंधन और बिजली की महंगाई दर भी बढ़कर 12.95 फीसदी पर पहुंच गई। सेवा क्षेत्र की महंगाई दर भी अगस्त में 6.4 फीसदी के उच्च स्तर पर बनी रही है। ये सभी मानक चिंता बने हुए हैं। अगस्त में ग्रामीण क्षेत्र में महंगाई दर 5.28% रही, जो शहरी क्षेत्र की महंगाई दर 5.32% के मुकाबले कम है। दरअसल, महंगाई आगे भी काबू में रहे, इसके लिए मॉनसून सीजन में अच्छी बारिश होना जरूरी है। भारतीय रिजर्व बैंक का अनुमान है कि महंगाई दूसरी तिमाही तक ही कम हो पाएगी, जब खरीफ फसल की कटाई का सीजन आएगा। अगस्त के महंगाई के ताजा आंकड़ों के हिसाब से दूसरे अहम उभरते बाजारों के बीच भारत की स्थिति बेहतर है। तुर्की में 19.25 फीसदी, ब्राजील में 9.68 फीसदी, रूस में 6.68 फीसदी महंगाई दर जुलाई के मुकाबले बढ़ी है। महंगाई की मार सिर्फ भारत और दूसरे विकासशील देशों पर नहीं पड़ रही है, विकसित देशों का भी बुरा हाल है।

अमेरिका में महंगाई दर के आंकड़े 13 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है। उसकी वजह जरूरी सामान की सप्लाई में आ रही रुकावट और कोविड के चलते देशभर में लगी पाबंदियों का एक समान तरीके से नहीं हटना है। ब्रिटेन में महंगाई जून में तीन साल के उच्चतम स्तर 2.4 फीसदी पर पहुंच गई थी। अगले महीने में महंगाई मामूली तौर पर घटी, लेकिन गिरावट का यह ट्रेंड पक्का नहीं है। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अगस्त में इनफ्लेशन रेट 3 फीसदी पर पहुंचने का अनुमान दिया है। यूरोपियन यूनियन में भी महंगाई बढ़कर 3 फीसदी तक पहुंच गई। यह नवंबर 2011 के बाद सबसे ज्यादा है। ये आंकड़े बताते हैं कि विश्व के अधिकांश देशों में महंगाई दर ऊंची है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने हाल में कहा था कि खुदरा महंगाई दर में धीरे-धीरे सुधार दर्ज किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि जल्द ही खुदरा महंगाई 6 फीसदी के दायरे के भीतर पहुंचकर थम जाएगी। भारत में फिलहाल ऐसा होता दिख रहा है। दास ने जुलाई में मौद्रिक नीति समिति की बैठक में कहा था कि मौद्रिक नीति को फिलहाल देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तय करना जरूरी है। खुदरा महंगाई के थमने के बाद अब रिजर्व बैंक व सरकार को अर्थव्यवस्था को मजबूत कर जीडीपी बढ़ाने पर जोर देना चाहिए।

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