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पीएम मोदी ने 8.5 करोड़ किसानों के खातों में 17 हजार करोड़ रुपये किये ट्रांसफर

किसानों से जुड़ी जितनी भी योजनाएं हैं, जितने भी रिफॉर्म हो रहे हैं, इनके केंद्र में हमारा छोटा किसान है। यही छोटा किसान है, जिस पर सबसे ज्यादा परेशानी आती रही है।

पीएम मोदी ने 8.5 करोड़ किसानों के खातों में 17 हजार करोड़ रुपये किये ट्रांसफर
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पीएम मोदी, फ़ोटो ट्विटर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत एक लाख करोड़ रुपये की वित्तपोषण सुविधा की शुरुआत की और 'पीएम-किसान योजना' के तहत 8.5 करोड़ किसानों के खातों में 17,000 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आज हलषष्टी है, भगवान बलराम की जयंति है। सभी देशवासियों को, विशेषतौर पर किसान साथियों को हलछठ की, दाऊ जन्मोत्सव की, बहुत-बहुत शुभकामनाएं! इस बेहद पावन अवसर पर देश में कृषि से जुड़ी सुविधाएं तैयार करने के लिए एक लाख करोड़ रुपए का विशेष फंड लॉन्च किया गया।


बीते डेढ़ साल में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से 75 हज़ार करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खाते में जमा हो चुके हैं। इसमें से 22 हज़ार करोड़ रुपए तो कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन के दौरान किसानों तक पहुंचाए गए हैं। एक देश,एक मंडी के जिस मिशन को लेकर बीते 7 साल से काम चल रहा था, वो अब पूरा हो रहा है। पहले e-NAM के जरिए, टेक्नॉलॉजी आधारित एक बड़ी व्यवस्था बनाई गई। अब कानून बनाकर किसान को मंडी के दायरे से और मंडी टैक्स के दायरे से मुक्त कर दिया गया। अब किसान के पास अनेक विकल्प हैं।

अब हम उस स्थिति की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां गांव के कृषि उद्योगों से फूड आधारित उत्पाद शहर जाएंगे और शहरों से दूसरा औद्योगिक सामान बनकर गांव पहुंचेगा। यही तो आत्मनिर्भर भारत अभियान का संकल्प है, जिसके लिए हमें काम करना है। 2 दिन पहले ही, देश के छोटे किसानों से जुड़ी एक बहुत बड़ी योजना की शुरुआत की गई है, जिसका आने वाले समय में पूरे देश को बहुत बड़ा लाभ होने वाला है। देश की पहली 'किसान रेल' महाराष्ट्र और बिहार के बीच में शुरु हो चुकी है।

किसानों से जुड़ी जितनी भी योजनाएं हैं, जितने भी रिफॉर्म हो रहे हैं, इनके केंद्र में हमारा छोटा किसान है। यही छोटा किसान है, जिस पर सबसे ज्यादा परेशानी आती रही है। इस छोटे किसान तक सरकारी लाभ पूरी तरह पहुंचे, ये हमारा संकल्प है। 'किसान रेल' पूरी तरह से वातानूकुलित है। ये एक तरह से पटरी पर दौड़ता कोल्ड स्टोरेज है। इससे शहर के लोगों को ताजी वस्तुएं मिल सकेंगी और किसानों को अपनी फसल स्थानीय मंडियों पर मजबूरन बेचना नहीं पड़ेगा।

देश के बड़े शहरों तक छोटे किसानों की पहुंच हो रही है तो वो ताजा सब्जियां उगाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे, पशुपालन और मत्स्यपालन की तरफ प्रोत्साहित होंगे। इससे कम जमीन से भी अधिक आय का रास्ता खुल जाएगा, रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

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