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Mahatma Gandhi Jayanti 2021: गांधी जी के जीवन की सबसे बड़ी ये थी राजनीतिक विफलता, आप भी जानें

गांधी जी ने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। महात्मा गांधी जी (Mahatma Gandhi) के आंदोलनों ने ही अंग्रेजों (British) को ये एहसास दिला दिया था कि अब भारत में उनके लिए रहने की जगह नहीं बची है, इसलिए भारत को छोड़ देना अब बेहर होगा।

Mahatma Gandhi Jayanti 2021: गांधी जी के जीवन की सबसे बड़ी ये थी राजनीतिक विफलता, आप भी जानें
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Gandhi Jayanti 2021: पूरा देश आज बापू (Bapu) को याद कर रहा है। 2 अक्टूबर (2 October) यानी आज देशभर में गांधी जयंती (Gandhi Jayanti) मनाई जा रही है। गांधी जी ने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। महात्मा गांधी जी (Mahatma Gandhi) के आंदोलनों ने ही अंग्रेजों (British) को ये एहसास दिला दिया था कि अब भारत में उनके लिए रहने की जगह नहीं बची है, इसलिए भारत को छोड़ देना अब बेहर होगा। गांधी जी (Gandhiji) के द्वारा चलाए गए सभी आंदोलनों को बड़ी सफलताएं मिली थी। ऐसा भी कहा जा सकता है कि महात्मा गांधी कभी विफल (Mahatma Gandhi never failed) नहीं हुए। लेकिन, गांधी जयंती के मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं, एक ऐसी कहानी के बारे में जिसे महात्मा गांधी के जीवन की सबसे बड़ी विफलता माना जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, बात उस वक्त की है जब गांधी जी अंग्रेजों (British) को देश से भगाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे। गांधी जी ने इसी दौरान मुहम्मद अली जिन्ना (Muhammad Ali Jinnah) को दो खत (two letters) लिखे थे। गांधी जी ने अपन पहले खत में लिखा था कि कल शाम की हमारी बातचीत कुछ ज्यादा अच्छी (not very good) नहीं रही। हम कभी एक पन्ने पर नहीं मिलते। हमारी सोच और हमारा विचार (Our thinking) एक दूसरे के समानांतर में चलते दिखाई देते हैं। हम एक-दूसरे से बिछड़ना नहीं चाहते हैं। इसलिए, हमने दोबारा बातचीत करने की कवायद शुरू की। मैं चाहता हूं कि आप मुझे बताएं कि आप किन बातों पर मेरा हस्ताक्षर लेना चाहते हैं। इसकी जानकारी आप मुझे खत (letter) के जरिए दें।

मुहम्मद अली जिन्ना (Muhammad Ali Jinnah) ने गांधी जी के इस खत का जवाब बड़ी ही बेरुखी (very rudely) के साथ दिया। मुहम्मद अली जिन्ना (Jinnah) लिखा कि आपके पास ऐसी हैसियत नहीं है कि आप किसी का प्रतिनिधित्व (Representation) करें। हस्ताक्षर की बात तो तब आएगी जब आपके पास प्रतिनिधि बनने की हैसियत होगी। उन्होंने लिखा कि मेरा फैसला नहीं बदल सकता। हम 1940 में मार्च के महीने वाले लाहौर-प्रस्ताव (Lahore Resolution) के सिद्धांतों पर कायम रहेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव द्विराष्ट्र सिद्धांत और भारत (India) के विभाजन (partition) को लेकर किया गया था। इसके बाद दूसरे खत में महात्मा गांधी ने लिखा कि आज ईद (Eid) के दिन आपको क्या भेट करुं। ऐसे में मैंने सोचा कि अपने खाखरे (khakhra) में से आधा हिस्सा आपके लिए और आपकी बहन फातिमा जिन्ना (Fatima Jinnah) के लिए भेजूं, जो मेरे जैसे इंसान को बहुत शोभा देगा। मुझे आशा (hope) है कि आप इसे मेरा प्रेम समझकर जरूर खाएंगे। बता दें कि इस बारे में जानकारी नहीं मिली कि मोहम्मद अली जिन्ना (Muhammad Ali Jinnah) ने वो खाखरा खाया था या नहीं। लेकिन ऐसा माना जाता है कि जिन्ना ने इस पत्र का भी जवाब सही ढंग से नहीं दिया था।

गांधी जी की क्या थी राजनीतिक विफलता

गांधी जी (Gandhiji) हमेंशा से चाहते थे कि हिंदू और मुसलमान (Hindus and Muslims) के बीच कोई फूट नहीं डाल सके। हालांकि, महात्मा गांधी के जीवन की सबसे बड़ी विफलता (biggest failure) थी कि वो मोहम्मद अली जिन्ना को भारत विभाजन (partition of India) के मुद्दे पर राजी नहीं कर पाए। उन्होंने कई कोशिशें की थी पर वे मोहम्मद अली जिन्ना का दिल नहीं पिघला पाए। कहा जाता है कि जिन्ना (Jinnah's) का ही मुद्दा ऐसा था, जिस मामले में पहली बार महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को कमजोर पड़ते देखा गया था।

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