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लोकसभा चुनाव 2019 : नगालैंड की पहली महिला सांसद 'शाइजा' की कहानी

रानो एम शाइजा नगालैंड से लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद में पहुंचने वाली पहली महिला सांसद थीं। वर्ष 1977 के चुनाव में उन्होंने नगालैंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार होकिसे सीमा को पराजित किया था।

लोकसभा चुनाव 2019 : नगालैंड की पहली महिला सांसद

रानो एम शाइजा नगालैंड से लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद में पहुंचने वाली पहली महिला सांसद थीं। वर्ष 1977 के चुनाव में उन्होंने नगालैंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार होकिसे सीमा को पराजित किया था। रानो यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार थीं। नगालैंड में शांति बहाली में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें नगालैंड में पूर्ण शराबबंदी कराने के लिए भी याद किया जाता है। नगालैंड में महिलाएं भले ही मुखर हैं पर राजनीति में उनकी भागीदारी बिल्कुल नहीं रही है। शाइजा इसकी अपवाद रहीं।

सामान्य परिवार से थीं

शाइजा का जन्म अंगामी नागा परिवार में नगालैंड के फेक जिले में 11 नवंबर 1928 को हुआ था। उनके पिता सेविली इरालू पेशे से डॉक्टर थे। माता वितुलाई इरालू के भाई अंगामी जापू फिजो नाग सेपरेटिस्ट मूवमेंट के संस्थापक थे। शाइजा की पढ़ाई सेंट मेरीज कॉलेज शिलांग, कॉटेन कॉलेज गुवाहाटी में हुई। इसके बाद उन्होंने स्कूल टीचर के तौर पर नौकरी शुरू की।

राज्य में पूर्ण शराबबंदी कराई

सादगी भरा जीवन जीने वाली शाइजा ने नगालैंड में पूर्ण शराबबंदी कराने में भी भूमिका निभाई। उन्होंने नगा मदर्स एसोसिएशन की स्थापना की थी। उनकी संस्था ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी के लिए अवाज उठाई। उनके प्रयासों से ही नगालैंड पूर्ण शराबबंदी अधिनियम 1989 बना। राज्य में 29 मार्च 1990 को शराबबंदी लागू हो गई। शाइजा अंगामी समुदाय से आती थीं, पर उन्होंने राज्य के दूसरे नगा समुदायो के साथ एकता बनाने की पूरी कोशिश की। शाइजा नगालैंड की राजनीति में एकमात्र महिला चेहरा रहीं। पांच दशक में नगालैंड में कोई महिला विधायक भी नहीं चुनी जा सकी।

19 महीने जेल में भी रहीं

शाइजा 1970 के दशक में शिक्षक की नौकरी छोड़कर नगा आंदोलन में शामिल हो गईं। वे नगा नेशनल काउंसिल की वूमेन फेडरेशन की पहली अध्यक्ष चुनीं गईं। इसके बाद वे यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी की पहली महिला अध्यक्ष चुनीं गईं। नगा आंदोलन के दौरान 1960 के दशक में वे 19 महीने तक वे जेल में भी रहीं।

शांति समझौता कराने में भी भूमिका

शाइजा ने नगा शांति समझौता कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आंदोलन के नेता अंगामी जाफू फिजो और तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई। शांति समझौते लिए उनकी भूमिका को याद किया जाता है। रानो शाइजा 1980 में भी लोकसभा का चुनाव लड़ी थीं, पर इस बार वे कांग्रेस उम्मीदवार से महज 5 हजार मतों से पराजित हो गईं।

रानो एम शाइजा का सफर

1928 में रानो एम शाइजा का 11 नवंबर को जन्म हुआ

1960 में वे 16 महीने तक जेल में भी रहीं

1971 में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष चुनी गईं।

1977 में नगालैंड से लोकसभा का चुनाव जीता।

1980 का लोकसभा चुनाव 5 हजार के मामूली अंतर से हार गईं।

2015 में एक अप्रैल को उनका निधन हुआ।

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