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केजरीवाल सरकार ने निजी स्कूलों को मुनाफे की दुकान बनने से रोका : सिसोदिया

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में निजी स्कूलों को मुनाफे की दुकान बनने से रोका है। निजी स्कूलों की फीस नहीं बढ़ने दी।

केजरीवाल सरकार ने निजी स्कूलों को मुनाफे की दुकान बनने से रोका :सिसोदियादिल्ली स्कूल (फाइल फोटो)

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में निजी स्कूलों को मुनाफे की दुकान बनने से रोका है और निजी स्कूलों की फीस नहीं बढ़ने दी। जबकि भाजपा और कांग्रेस शासित प्रदेशों में हर साल निजी स्कूलों ने मनमाने तरीके से फीस में वृद्धि की, जिससे बच्चों के माता-पिता पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।

मनीष सिसोदिया ने प्रेसवार्ता में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में मोटे तौर पर दो समस्याएं हैं। पहली, सरकारी स्कूलों की बदहाली और दूसरी, प्राइवेट स्कूलों में लगातार फीस में की जा रही वृद्धि है। लोगों की तनख्वाह नहीं बढ़ रही है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों की फीस लगातार बढ़ा दी जाती है। जिसे दिल्ली में रोका गया।

प्रैसवार्ता में सिसोदिया ने कहा कि जहां पिछले 5 सालों में दिल्ली सरकार ने स्कूलों को मुनाफे की दुकान बनने से रोका वही उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में आज भी मुनाफे की दुकान चल रही हैं। जब अभिभावक इस बाबत शिकायत करते हैं, तो वहां के मुख्यमंत्री एवं अधिकारी स्कूलों को सुधारने की बजाय उल्टा अभिभावकों पर बरसते देखे गए हैं। दिल्ली में लगभग 1700 निजी स्कूल हैं जिनमें से बहुत सारे स्कूलों में अभिभावकों और स्कूल प्रशासन के बीच अच्छा सामंजस्य है मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ाई जाती है।

लगभग 350 बड़े प्राइवेट स्कूल हैं, जिनमें एडमिशन के लिए भी बहुत मारामारी रहती है और बढ़ती फीस को लेकर भी बहुत मारामारी रहती है। लगभग 364 प्राइवेट स्कूल है जो सरकारी जमीन पर बने हुए हैं। इनमें मनमाने तरीके से फीस बढ़ाई जाती थी लेकिन हमारी सरकार बनते ही हमने इन्हें नियमों का पालन करने को कहा। सिसोदिया ने बताया कि 2016-17 में हमने सभी स्कूलों को सरकार के साथ हुए करार का पालन करने को कहा। 2016-17 में 364 स्कूलों में से 334 स्कूलों को हमने फीस नहीं बढ़ाने दी। मात्र कुछ स्कूलों को स्क्रुटनी कराने के बाद 5 से 8 फीसदी फीस बृढ़ोतरी की अनुमति दी गई। 2017-18 और 2018-19 में किसी भी स्कूल को फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं दी गई। 2019-20 में 309 स्कूलों को फीस नहीं बढ़ाने दी गई। दी। जबकि भाजपा और कांग्रेस शासित प्रदेशों में हर साल निजी स्कूलों ने मनमाने तरीके से फीस में वृद्धि की, जिससे बच्चों के माता-पिता पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।

मनीष सिसोदिया ने प्रैसवार्ता में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में मोटे तौर पर दो समस्याएं हैं। पहली, सरकारी स्कूलों की बदहाली और दूसरी, प्राइवेट स्कूलों में लगातार फीस में की जा रही वृद्धि है। लोगों की तनख्वाह नहीं बढ़ रही है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों की फीस लगातार बढ़ा दी जाती है। जिसे दिल्ली में रोका गया।

प्रैसवार्ता में सिसोदिया ने कहा कि जहां पिछले 5 सालों में दिल्ली सरकार ने स्कूलों को मुनाफे की दुकान बनने से रोका वही उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में आज भी मुनाफे की दुकान चल रही हैं। जब अभिभावक इस बाबत शिकायत करते हैं, तो वहां के मुख्यमंत्री एवं अधिकारी स्कूलों को सुधारने की बजाय उल्टा अभिभावकों पर बरसते देखे गए हैं। दिल्ली में लगभग 1700 निजी स्कूल हैं जिनमें से बहुत सारे स्कूलों में अभिभावकों और स्कूल प्रशासन के बीच अच्छा सामंजस्य है मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ाई जाती है।

लगभग 350 बड़े प्राइवेट स्कूल हैं, जिनमें एडमिशन के लिए भी बहुत मारामारी रहती है और बढ़ती फीस को लेकर भी बहुत मारामारी रहती है। लगभग 364 प्राइवेट स्कूल है जो सरकारी जमीन पर बने हुए हैं। इनमें मनमाने तरीके से फीस बढ़ाई जाती थी लेकिन हमारी सरकार बनते ही हमने इन्हें नियमों का पालन करने को कहा। सिसोदिया ने बताया कि 2016-17 में हमने सभी स्कूलों को सरकार के साथ हुए करार का पालन करने को कहा। 2016-17 में 364 स्कूलों में से 334 स्कूलों को हमने फीस नहीं बढ़ाने दी। मात्र कुछ स्कूलों को स्क्रुटनी कराने के बाद 5 से 8 फीसदी फीस बृढ़ोतरी की अनुमति दी गई। 2017-18 और 2018-19 में किसी भी स्कूल को फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं दी गई। 2019-20 में 309 स्कूलों को फीस नहीं बढ़ाने दी गई।



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