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महिला आरक्षण संशोधन बिल के लोकसभा में गिरने के बाद देशभर में सियासी माहौल गरमा गया है। संसद में टकराव के बाद अब यह लड़ाई सड़कों तक पहुंच गई है, जहां भाजपा और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं।

सरकार का दावा है कि वह महिलाओं को जल्द 33% आरक्षण देना चाहती थी, जबकि विपक्ष इस संशोधन को राजनीतिक रणनीति करार दे रहा है।

बिल के पक्ष में बहुमत होने के बावजूद दो-तिहाई आंकड़ा न जुटा पाने से यह प्रस्ताव पास नहीं हो सका, जिसके बाद अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

सबसे बड़ा सवाल यही है-

महिला आरक्षण पर यह टकराव सशक्तिकरण की लड़ाई है या सियासी रणनीति?

महिला आरक्षण के नाम पर किसने की सियासत?

इसी मुद्दे पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ विशेष चर्चा में राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं और वरिष्ठ पत्रकारों ने अपनी राय रखी।

Debate Panel

  • राकेश शुक्ला – वरिष्ठ पत्रकार
  • सुमित मेहरोत्रा – प्रवक्ता, AITC
  • राधिका खेड़ा – राष्ट्रीय प्रवक्ता, भाजपा
  • सुरेंद्र राजपूत – राष्ट्रीय प्रवक्ता, कांग्रेस

महिला आरक्षण पर सियासी घमासान में किसने क्या कहा? ऊपर दिए गए वीडियो में देखें पूरी चर्चा

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