मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए 'INDIA' गठबंधन के प्रमुख दलों ने एक बार फिर कमर कस ली है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी और डीएमके (DMK) ने साझा रणनीति बनाई है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सदन में ताज़ा 'रिमूवल नोटिस' लाया जाए।
विपक्ष का मानना है कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अब अनिवार्य हो गया है।
विपक्ष की इस नई तैयारी के पीछे सबसे बड़ा कारण हाल के समय में मतदाता सूचियों में हुई कथित गड़बड़ियां हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग ने मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कई महत्वपूर्ण शिकायतों को नजरअंदाज किया है।
कांग्रेस और सपा जैसे दलों का तर्क है कि चुनाव आयोग का मौजूदा रवैया निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के बजाय सत्तापक्ष के प्रति नरम दिखाई देता है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर खतरा मंडरा रहा है।
विपक्षी दल इस बार पूरी तैयारी के साथ 'रिमूवल नोटिस' पर सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल 'कदाचार' या 'अक्षमता' के आधार पर ही हटाया जा सकता है।
इसके लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव पेश करना होता है और इसे पारित कराने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। विपक्ष की योजना इस मुद्दे को संसद के पटल पर जोर-शोर से उठाकर सरकार और चुनाव आयोग पर नैतिक दबाव बनाने की है।
विपक्ष का कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने की है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में कई बार ऐसी स्थितियां बनीं जहाँ आयोग की भूमिका संदिग्ध रही।
इसी को आधार बनाकर विपक्षी दल अब एकजुट होकर ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं और जल्द ही इस पर औपचारिक रूप से सदन के भीतर बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं।









