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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें लोकपाल को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई को चार्जशीट दायर करने की मंजूरी देने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।

Cash for Query Case: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 13 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें लोकपाल को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई को चार्जशीट दायर करने की मंजूरी देने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था। यह मामला कथित कैश-फॉर-क्वेरी घोटाले से जुड़ा है, जिसमें मोइत्रा पर लोकसभा में सवाल पूछने के बदले में एक व्यवसायी से पैसे और उपहार लेने का आरोप है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर 2025 को लोकपाल के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें सीबीआई को मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दायर करने की मंजूरी दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के पैरा 89 पर रोक लगा दी है, जिसमें लोकपाल को एक महीने के भीतर मंजूरी देने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।

कोर्ट ने तीन हफ्तों में मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा, सीबीआई और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। यह मामला लोकपाल की शक्तियों और प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाता है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा 

लोकपाल अधिनियम की धारा 20 पर सुप्रीम कोर्ट की नजर
चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ ने लोकपाल अधिनियम की धारा 20 के तहत निहित शक्तियों और प्रक्रियाओं से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया। कोर्ट अब इस कानूनी पहलू की जांच करेगा कि लोकपाल द्वारा सीबीआई को अभियोजन की मंजूरी देने की सही प्रक्रिया क्या होनी चाहिए। लोकपाल ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था, क्योंकि हाई कोर्ट ने प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए पहले की मंजूरी को खारिज कर दिया था।

कैश फॉर क्वेरी मामले की पूरी टाइमलाइन
महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने एक व्यवसायी से महंगे उपहार और पैसे लेकर संसद में सवाल पूछे थे। इस पूरे घटनाक्रम को नीचे दिए गए बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • 14 अक्टूबर 2023: एडवोकेट जय अनंत देहाद्रई ने सीबीआई और लोकसभा अध्यक्ष के पास भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराई।
  • दिसंबर 2023: एथिक्स कमेटी की सिफारिशों के आधार पर महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया।
  • 21 मार्च 2024: लोकपाल के निर्देश पर सीबीआई ने मोइत्रा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की।
  • जून 2024: निष्कासन के बावजूद महुआ मोइत्रा ने कृष्णानगर निर्वाचन क्षेत्र से 2024 का आम चुनाव जीता और दोबारा संसद पहुंचीं।
  • 12 नवंबर 2025: लोकपाल ने सीबीआई को मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी दी।
  • 19 दिसंबर 2025: दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रक्रियात्मक त्रुटियों का हवाला देते हुए लोकपाल की मंजूरी को रद्द कर दिया।
  • 13 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की विस्तृत जांच के लिए नोटिस जारी किए।

इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर सबकी नजरें टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि क्या सीबीआई महुआ मोइत्रा के खिलाफ तत्काल चार्जशीट दाखिल कर पाएगी या उन्हें अभी और राहत मिलेगी।

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