नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान हुए कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन और सुरक्षा संबंधी खामियों को लेकर केंद्र सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पूरे मामले का बड़े स्तर पर संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शाम पांच बजे तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। गृह मंत्री अमित शाह ने टीएमसी सरकार के इस व्यवहार को 'अराजक' और संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों पर आघात बताया है।
পশ্চিমবঙ্গের তৃণমূল সরকার আজ তাদের নৈরাজ্যপূর্ণ আচরণের মাধ্যমে আরও নিম্নস্তরে নেমে গেল। প্রোটোকলের প্রতি চরম অবহেলা দেখিয়ে তারা ভারতের রাষ্ট্রপতিকে অপমান করেছে।
— Amit Shah (@AmitShah) March 7, 2026
এই ঘটনা তৃণমূল সরকারের গভীর অবক্ষয়কে প্রকাশ্যে এনে দিয়েছে। যে সরকার ইচ্ছামতো নাগরিকদের সাংবিধানিক অধিকার লঙ্ঘন…
9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में प्रोटोकॉल की अनदेखी का आरोप
पूरा विवाद राष्ट्रपति मुर्मू के दार्जिलिंग जिले में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने के दौरान सामने आया। राष्ट्रपति ने स्वयं इस बात पर हैरानी और दुख जताया कि न तो राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और न ही कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने पहुँचा, जबकि पद की गरिमा के लिए प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है। उन्होंने ममता बनर्जी को अपनी 'छोटी बहन' बताते हुए पूछा कि क्या वे उनसे नाराज हैं।
सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और अव्यवस्था पर उठे सवाल
राष्ट्रपति की सुरक्षा से संबंधित 'ब्लू बुक' के कई नियमों का उल्लंघन हुआ है। यह आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रपति को रिसीव और सी-ऑफ करने के लिए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी में से कोई भी मौजूद नहीं था। इसके अलावा, प्रशासन की घोर लापरवाही के भी मामले सामने आए हैं; राष्ट्रपति के लिए बने वॉशरूम में पानी नहीं था और जिस रास्ते से उनका काफिला गुजरा, वहां कचरे के ढेर लगे थे।
कार्यक्रम स्थल में अचानक बदलाव पर राष्ट्रपति की नाराजगी
समारोह मूल रूप से फांसीदेवा ब्लॉक के बिधाननगर में प्रस्तावित था, जहाँ बड़ी संख्या में संथाल आदिवासी समुदाय के लोग पहुँच सकते थे। हालांकि, राज्य प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ का हवाला देकर अंतिम समय में कार्यक्रम को बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोसाईपुर में स्थानांतरित कर दिया।
राष्ट्रपति ने इस बदलाव पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नया स्थान छोटा था, जिससे हजारों लोग उनके दर्शन करने और सम्मेलन में शामिल होने से वंचित रह गए।
अमित शाह का टीएमसी सरकार पर तीखा हमला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया के माध्यम से टीएमसी सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने अराजक व्यवहार करते हुए भारत के राष्ट्रपति का अपमान कर एक नया निचला स्तर छू लिया है।
शाह ने आरोप लगाया कि यह घटना टीएमसी सरकार में व्याप्त अव्यवस्था को दर्शाती है, जो न केवल नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, बल्कि सर्वोच्च संवैधानिक पद का सम्मान भी नहीं करती।
ममता बनर्जी ने आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपति का पूरा सम्मान करती हैं, लेकिन जिस कार्यक्रम का जिक्र किया जा रहा है, उसके आयोजकों या फंडिंग के बारे में राज्य सरकार को कोई आधिकारिक जानकारी नहीं थी।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि वे उस वक्त धरने पर बैठी थीं और उनके लिए हर उस कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं है जहाँ राष्ट्रपति साल में 50 बार आएं।
संवैधानिक मर्यादा और संघीय ढांचे पर छिड़ी बहस
इस विवाद ने एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार के बीच के तनावपूर्ण संबंधों को उजागर कर दिया है। भाजपा इसे एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति के अपमान के रूप में देख रही है, जबकि टीएमसी इसे केंद्र द्वारा राज्य के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप बता रही है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और अधिक कड़े कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।










