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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में आज ‘लैंड फॉर जॉब’ केस को लेकर अहम सुनवाई होनी है। इस बहुचर्चित मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के साथ कुल 41 आरोपियों पर पहले ही आरोप तय हो चुके हैं।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में आज ‘लैंड फॉर जॉब’ केस को लेकर अहम सुनवाई होनी है। इस बहुचर्चित मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के साथ कुल 41 आरोपियों पर पहले ही आरोप तय हो चुके हैं। रविवार शाम दोनों पटना से दिल्ली पहुंचे। आज की कार्यवाही को ट्रायल से पहले की बड़ी कड़ी माना जा रहा है, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हैं।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी से बढ़ा दबाव
पिछली सुनवाई के दौरान स्पेशल जज विशाल गोग्ने ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि सरकारी नौकरी के बदले संपत्ति लेने की साजिश के प्रथम दृष्टया संकेत मिलते हैं। अदालत ने ‘आपराधिक गिरोह’ जैसे शब्दों का भी उल्लेख किया। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि आरोप तय होना दोष सिद्धि नहीं है और बचाव पक्ष को ट्रायल में पूरा अवसर मिलेगा।

इस केस में तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव और मीसा भारती समेत परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी आरोपियों की सूची में शामिल हैं, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई है।

CBI की चार्जशीट पर अदालत की मुहर
जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने आरोप लगाया है कि 2004 से 2009 के बीच रेलवे में ग्रुप-डी नियुक्तियों के बदले जमीन ट्रांसफर कराई गई। यह वही अवधि है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे।

चार्जशीट में कई मामलों में गिफ्ट डीड के जरिए संपत्ति हस्तांतरण का जिक्र है। अदालत ने कहा कि जमीन के मूल्य और ट्रांसफर की प्रक्रिया में असामान्यता की जांच जरूरी है। साथ ही अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश भी दिया गया है। अगली सुनवाई 29 जनवरी तय की गई है।

2004–2009 के फैसलों पर अब कानूनी कसौटी
CBI के मुताबिक कथित साजिश रेलवे के अलग-अलग जोनों में नियुक्तियों से जुड़ी थी। आरोप है कि नौकरी देने से पहले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। अब ट्रायल के दौरान दस्तावेज, गवाह और संपत्ति ट्रांसफर के रिकॉर्ड अदालत में परखे जाएंगे। बचाव पक्ष का कहना है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। वहीं अभियोजन पक्ष इसे भ्रष्टाचार का गंभीर मामला बता रहा है।

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