नई दिल्ली : केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है और सत्ताधारी दल सीपीआई-एम (CPI-M) ने अपने पत्तों का खुलासा कर दिया है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में पार्टी ने इस बार 86 सीटों पर चुनाव लड़ने का बड़ा फैसला किया है, जबकि बाकी सीटें सहयोगियों के खाते में गई हैं।
क्या वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर केरल की राजनीति में एक नया इतिहास दर्ज करेगा? इस सवाल ने पूरे राज्य में सस्पेंस पैदा कर दिया है, क्योंकि चुनावी समर में उतरे दिग्गजों की साख दांव पर लगी है।
धर्मदम से विजयन और पेरावूर से शैलजा: दिग्गजों की सीट पर टिकी निगाहें
केरल की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट 'धर्मदम' एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है, जहाँ से मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन खुद मैदान में उतर रहे हैं। कन्नूर जिले की यह सीट सीपीआई-एम का अभेद्य किला मानी जाती है। वहीं, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा को इस बार 'पेरावूर' सीट से मैदान में उतारकर पार्टी ने बड़ा सस्पेंस पैदा कर दिया है।
पिछले चुनाव में शैलजा ने रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार उनका मुकाबला केरल कांग्रेस प्रदेश कमेटी के अध्यक्ष सनी जोसेफ की सीट पर है। क्या ये दिग्गज अपने नए और पुराने गढ़ को बचा पाएंगे?
56 मौजूदा विधायकों पर दोबारा भरोसा: क्या काम करेगा 'प्रो-इन्कम्बेंसी' दांव?
सीपीआई-एम ने अपनी चुनावी रणनीति में एक बड़ा जोखिम लेते हुए 56 मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट थमाया है। पार्टी के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन का कहना है कि यह चयन पूरी तरह से लोकतांत्रिक और 'पोलित ब्यूरो' के दिशा-निर्देशों के तहत किया गया है।
सस्पेंस इस बात पर है कि क्या जनता अपने पुराने प्रतिनिधियों पर दोबारा भरोसा जताएगी या विपक्ष की लहर इस 'प्रो-इन्कम्बेंसी' कार्ड को फेल कर देगी। पार्टी ने साफ कर दिया है कि उनका हर कदम तीसरी बार सत्ता में वापसी के मिशन को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
9 अप्रैल को 'आर या पार' और 4 मई का सस्पेंस
केरल की सभी 140 सीटों पर मतदान की तारीख 9 अप्रैल 2026 तय की गई है। चुनाव आयोग के इस कार्यक्रम ने राजनीतिक दलों को तैयारी के लिए बहुत कम समय दिया है, जिससे प्रचार का रोमांच और बढ़ गया है। असम और पुडुचेरी के साथ ही केरल में भी एक ही चरण में मतदान होगा, जिसका परिणाम 4 मई को घोषित किया जाएगा।
क्या एलडीएफ अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखेगा या केरल की 'बारी-बारी से सत्ता बदलने' की पुरानी रवायत वापस लौटेगी? यह सस्पेंस मतगणना के दिन ही खत्म होगा।
एलडीएफ का इतिहास रचने का दावा: विपक्ष की चुनौतियों के बीच वामपंथ की परीक्षा
सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा है कि एलडीएफ तीसरी बार सत्ता पाकर इतिहास रचेगा। हालांकि, चुनावी मैदान में सक्रिय उम्मीदवारों के सामने विपक्षी गठबंधनों की कड़ी घेराबंदी है।
86 सीटों पर सीपीआई-एम का लड़ना और बाकी 54 सीटों पर सहयोगियों का तालमेल बिठाना वामपंथ के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है। आने वाले दिनों में एलडीएफ का राज्यव्यापी जोरदार प्रचार अभियान इस चुनावी सस्पेंस को और भी गहरा कर देगा।










