कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों की घोषणा से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बड़ा दांव चला है। राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू होने से महज कुछ घंटे पहले, मुख्यमंत्री ने राज्य के पुरोहितों और मुअज्जिनों के मासिक मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी करने का महत्वपूर्ण ऐलान किया है।
इस घोषणा के बाद अब इन सेवादारों को प्रति माह मिलने वाली राशि बढ़कर 2,000 रुपये हो जाएगी। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' के माध्यम से इस निर्णय की जानकारी साझा करते हुए समुदाय के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है।
I am pleased to announce an increase of ₹500 in the monthly honorariums extended to our purohits and muezzins, whose service sustains the spiritual and social life of our communities. With this revision, they will now receive ₹2,000 per month.
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) March 15, 2026
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पुरोहितों और मुअज्जिनों के मानदेय में 500 का इजाफा
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के धार्मिक सेवादारों के लिए खजाना खोलते हुए उनके मानदेय में वृद्धि की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि पुरोहितों और मुअज्जिनों की सेवा हमारे समुदायों के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को जीवंत बनाए रखती है।
इस नए संशोधन के प्रभावी होने के बाद, जिन्हें अब तक 1,500 रुपये मानदेय मिलता था, उन्हें अब हर महीने 2,000 रुपये प्राप्त होंगे। सरकार का यह कदम राज्य के हजारों धार्मिक सेवादारों को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में देखा जा रहा है।
चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले लिया गया निर्णय
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भारत निर्वाचन आयोग आज शाम 4 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहा है। इस पीसी में पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों (तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी) के विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान होना है।
जैसे ही चुनाव आयोग तारीखों की घोषणा करेगा, पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी, जिसके बाद सरकार किसी भी नई जन-कल्याणकारी योजना या वित्तीय वृद्धि की घोषणा नहीं कर पाती। इसी को देखते हुए ममता सरकार ने ऐन वक्त पर यह 'बड़ा कार्ड' खेला है।
पांच राज्यों में चुनावी बिगुल और 2021 का संदर्भ
चुनाव आयोग आज शाम उन राज्यों के लिए चुनावी कार्यक्रम जारी करेगा जिनका कार्यकाल मई और जून 2021 में समाप्त हो रहा है। अगर पिछले चुनावों (2021) की बात करें, तो बंगाल में आठ चरणों में मतदान हुआ था और तारीखों का ऐलान 26 फरवरी को किया गया था।
इस बार भी अप्रैल-मई के महीनों में चुनावी प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है, जिसे देखते हुए आयोग तैयारियों को अंतिम रूप दे चुका है।
ममता बनर्जी का आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश
मानदेय बढ़ाने के अपने फैसले को ममता बनर्जी ने समुदायों की एकता और सेवा से जोड़ा है। उन्होंने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वह पुरोहितों और मुअज्जिनों के योगदान का सम्मान करती हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक 1.5 घंटे पहले किया गया यह ऐलान सीधे तौर पर धार्मिक समुदायों को साधने की कोशिश है।
बंगाल की राजनीति में धार्मिक सेवादारों का प्रभाव काफी गहरा है, और चुनाव से पहले उनकी नाराजगी दूर करना तृणमूल कांग्रेस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









