AI Impact Summit 2026: दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि भारत भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया को प्रतिबंधित करने की दिशा में कदम उठाएगा।
मैक्रों ने स्पष्ट कहा, "बच्चों की सुरक्षा करना केवल रेगुलेशन नहीं, बल्कि सभ्यता का कार्य है।" उन्होंने घोषणा की कि फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने जा रहा है और वे चाहते हैं कि भारत भी इस 'ग्लोबल सेफ्टी क्लब' का हिस्सा बने।
पीएम मोदी का रुख: 'एआई और डिजिटल स्पेस हो फैमिली-गाइडेड'
प्रधानमंत्री मोदी ने सीधे तौर पर 'बैन' शब्द का इस्तेमाल तो नहीं किया, लेकिन उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अपनी गंभीर चिंता जाहिर की। पीएम मोदी ने कहा कि जिस तरह स्कूल का पाठ्यक्रम (Syllabus) बच्चों की उम्र देखकर तय किया जाता है, वैसे ही डिजिटल और एआई स्पेस को भी 'चाइल्ड-सेफ' और 'फैमिली-गाइडेड' होना चाहिए।
उनके इस बयान को भविष्य में आने वाले कड़े नियमों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पीएम ने जोर दिया कि तकनीक का भविष्य तभी उज्ज्वल है जब हमारे बच्चे सुरक्षित हों।
आईटी मंत्रालय की तैयारी और ग्लोबल इम्पैक्ट
भारत में सोशल मीडिया के 75 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं, जिनमें किशोरों की संख्या काफी बड़ी है। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पहले ही संकेत दिया है कि सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के साथ 'गार्डरेल्स' यानी सुरक्षा मानकों पर बातचीत कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत 15 या 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर कोई पाबंदी या 'पैरेंटल लॉक' जैसे कड़े नियम लागू करता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की टेक कंपनियों पर पड़ेगा।
क्या बैन ही एकमात्र समाधान है?
सदन और समिट के भीतर इस बात पर भी चर्चा हुई कि क्या पूर्ण प्रतिबंध (Ban) व्यावहारिक है। राष्ट्रपति मैक्रों ने तर्क दिया कि जो चीजें वास्तविक दुनिया में गैर-कानूनी हैं, उन्हें ऑनलाइन दुनिया में बच्चों के लिए खुला नहीं छोड़ा जा सकता। भारत में भी बढ़ते साइबर बुलिंग और एडिक्शन के मामलों को देखते हुए अभिभावकों और शिक्षाविदों का एक बड़ा वर्ग सोशल मीडिया पर उम्र की पाबंदी (Age Restriction) का समर्थन कर रहा है।










