नई दिल्ली। चुनाव आयोग (ईसी) ने देश की मतदाता सूचियों को और अधिक सटीक और अद्यतन करने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू करने की घोषणा की है। चुनाव आयोग के सचिव ने 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि वे इस अभियान से जुड़ी तैयारियां जल्द पूरी करें। आयोग के अनुसार दिल्ली और कर्नाटक समेत शेष राज्यों में यह प्रक्रिया अप्रैल से शुरू होने की संभावना है।
इसका उद्देश्य मतदाता सूची अद्यतन करना
अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन करना है। समय के साथ लोगों का निवास स्थान बदलता है, कई मतदाताओं का निधन हो जाता है, तो कुछ नए युवा 18 वर्ष की आयु पूरी कर मतदाता बनने के पात्र हो जाते हैं। इन सभी परिवर्तनों को रिकॉर्ड में शामिल करना जरूरी होता है। इसी वजह से एसआईआर के तहत घर-घर जाकर जानकारी जुटाई जाती है और मतदाता सूची की बारीकी से जांच की जाती है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी भी योग्य नागरिक का नाम सूची से छूट न जाए और किसी अयोग्य व्यक्ति का नाम उसमें शामिल न रहे।
अभियान का पहला चरण बिहार में आयोजित
इस अभियान का पहला चरण बिहार में आयोजित किया गया था, जहां अंतिम सूची में करोड़ों मतदाताओं का सत्यापन किया गया। दूसरे चरण के तहत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया पहले से जारी है। कुछ राज्यों में सामान्य विशेष पुनरीक्षण भी किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर सूची को अपडेट किया जा सके। अब तीसरे चरण के रूप में बाकी राज्यों में व्यापक स्तर पर यह कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।
बीएलओ और बीएलए की होती है अहम भूमिका
एसआईआर की प्रक्रिया में ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करते हैं, उन्हें आवश्यक फॉर्म उपलब्ध कराते हैं और दी गई जानकारी का सत्यापन करते हैं। यदि किसी व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज पाया जाता है, तो उसे एक स्थान से हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। जिन लोगों का नाम सूची में नहीं है, वे निर्धारित फॉर्म भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना नाम जुड़वा सकते हैं।
इन्हें दी जाएगी दस्तावेजों के रूप में मान्यता
दस्तावेजों के रूप में सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, आधार कार्ड आदि मान्य होते हैं। इन प्रमाणों के आधार पर मतदाता की पहचान और पात्रता की पुष्टि की जाती है। अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी है कि जिन मतदाताओं का निधन हो चुका है या जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए हैं, उनके नाम सूची से हटाए जाएं। चुनाव आयोग का मानना है कि 1951 से 2004 तक कई बार व्यापक पुनरीक्षण हुए, लेकिन पिछले दो दशकों में जनसंख्या में भारी बदलाव आया है।










