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Action on Megha Engineering: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) और एनएमडीसी आयरन एंड स्टील प्लांट के आठ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामला NISP के लिए ₹315 करोड़ के प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। 

Action on Megha Engineering: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) और एनएमडीसी आयरन एंड स्टील प्लांट के आठ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामला NISP के लिए 315 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है।  MEIL चुनावी बांड की दूसरी सबसे बड़ी खरीददार है। कंपनी ने कुल 966 करोड़ रुपए के इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदे थे। MEIL के प्रोमोटर पामिरेड्डी पिची रेड्डी और पीवी कृष्णा रेड्डी हैं। अब यह कंपनी इलेक्टोरल बॉन्ड खरीद जांच के दायरे में आ गई है।

सीबीआई को MEIL के खिलाफ मिली थी शिकायत
सीबीआई ने कंपनी के खिलाफ मिली एक शिकायत के बाद एक्शन लिया है। शिकायत में एनआईएसपी, एनएमडीसी और मेकॉन लिमिटेड के अधिकारियों पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि इन अधिकारियों को मेघा इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल लिमिटेड को दिए गए ठेकों के बदले में रिश्वत मिली थी। कथित भ्रष्टाचार में शामिल व्यक्तियों का पता लगाने के लिए CBI ने जांच शुरू कर दी है। 

चुनावी बॉन्ड खरीदने के बाद कंपनी को मिले कई प्रोजेक्ट्स

हैदराबाद स्थित मेघा इंजीनियरिंग इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम (Electoral Bonda Scheme) के तहत दूसरी सबसे बड़ी डोनर है। इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदारों की जानकारी सामने आने के बाद से ही यह कंपनी सुर्खियों में है। जांच से एक पैटर्न का पता चला। यह पाया गया कि कंपनी ने चुनावी बांड खरीदने के तुरंत बाद कई परियोजनाएं हासिल कीं। 2019 और 2023 के बीच, मेघा इंजीनियरिंग ने कथित तौर पर इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदने के बाद पांच अहम कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए। इसके बाद प्रोजेक्ट अलॉटमेंट में भेदभाव होने का संदेह पैदा हुआ और कंपनी जांच के घेरे में आ गई। 

कंपनी ने 966 करोड़  रुपए का इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदा। कंपनी ने बीजेपी के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए 584 करोड़ रुपए डोनेट किए। इसके साथ ही BRS को 195 करोड़ रुपए और DNK को 95 करोड़ रुपए डोनेट किया। इसके साथ ही MEIL ने वाईएसआर कांग्रेस, तेलुगु देशम, कांग्रेस, जनता दल (यूनाइटेड), जनता दल (सेक्युलर) और जन सेना पार्टी जैसी अन्य पार्टियों के लिए भी चुनावी बॉन्ड खरीदा। यह बात सामने आने के बाद कॉर्पोरेट डोनेशन के बाद कंपनी को मिले प्रोजेक्ट्स और इसमें घालमेल को लेकर सवाल उठने लगे। 

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