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विश्व रक्तदान दिवस: रक्तदान से पहले रखें इन बातों का ध्यान

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1997 में 14 जून को स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नींव डाली थी।

विश्व रक्तदान दिवस: रक्तदान से पहले रखें इन बातों का ध्यान

नई दिल्ली. आज विश्व रक्तदान दिवस है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1997 में 14 जून को स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नींव डाली थी। तब से हर 14 जून को विश्व रक्त दान दिवस मनाया जाता है। इस रक्तदान नीति का मकसद था कि लोग रक्तदान को लेकर जागरूक हों।


रक्तदान करने के नियम
रक्तदान करने के लिए आपकी उम्र 18 से 60 साल तक होनी चाहिए। रक्तदान करने से पहले लोगों से कुछ सवाल किये जाते हैं और अगर इन सवालों में ऐसा कुछ निकलता है, जो रक्तदान के मापदंड में नहीं आता तो आपका ब्लड नहीं लिया जाता है। आइये जानते है की वो क्या सवाल हैं और क्या प्रिकॉशन लेने की जरुरत है। जब भी आप रक्तदान करने के लिए जाते हैं तो आपसे आपकी लाइफस्टाइल के बारे में पूछा जाता है। आपकी पसंद, नापसंद, बीमारियां और खास तौर पर सेक्स से सम्बंधित सवाल पूछे जाते हैं। इसके साथ ही नीचे लिखे प्रश्नों के आधार पर आपका ब्लड लिया जाता है। नाम, पता, जन्म का दिन, उम्र, लिंग, संपर्क (मोबाइल/ फ़ोन नंबर), ईमेल। अगर पहले कभी रक्तदान किया हो उसका ब्यौरा, कितनी बार किया है, क्या कोई समस्या या परेशानी का सामना करना पड़ा था। अगर 3 महीनों में डोनेट किया हो तो उसकी जानकारी। रोग (बिमारियों) की जानकारी। रक्तदान के 72 घंटों पहले तक की परिस्तिथि का ब्यौरा। गुस्सा, नशा, ड्रग्स आदि का सेवन। 24 घंटों पहले तक शराब के सेवन का ब्यौरा। सेक्स से जुड़ी हुई बातें।

महिलाओं के लिए
गर्भावस्था
गर्भपात (रक्तदान करने के 3 महीने पहले तक)
एक साल से छोटा बच्चा
महीने में आने वाले पिरेड्स की जानकारी
यह सभी जानकारी लेने के बाद ही खून लिया जाता है और फिर उसे अलग-अलग टेस्ट करके परखा जाता है कि कोई परेशानी या कोई ऐसी बीमारी तो नहीं जो खून के साथ दुसरे व्यक्ति के शरीर में चली जाए। अगर होती है तो वो खून को निकाल दिया जाता है।

रक्तदान करने के स्वास्थ्य लाभ
कई कारणों से इन दिनों रक्तदान जरूरी होता जा रहा है, लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि रक्त देने से जरूरतमंद लोगों को जीवन दान मिलता है, बल्कि रक्तदाता को स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होते हैं। रक्त में कई जीवनरक्षक तत्व होते हैं जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों व चोटों को ठीक करने में मददगार होते हैं। कई लोगों के लिये रक्तदाता उनकी लाइफलाइन होते हैं। रक्तदान करने से किसी के जीवन को करीब से छूने का सुंदर अनुभव प्राप्त होता है। यह वो अनुभव है, जो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। 18 से 60 वर्ष की आयु के स्वास्थ्य व्यक्ति जिनका वजन 50 किलो से ऊपर होता है, वो 450 मिली लीटर रक्तदान कर सकते हैं। पुरुष तीन महीने में एक बार और महिलाएं चार महीने में एक बार रक्तदान कर सकती हैं। जिस व्यक्ति का वजन 45 से 55 किलोग्राम के आसपास है, ऐसे लोगों के शरीर से एक बार में 350 मिलीलीटर से 440 मिलीलीटर खून लिया जा सकता है।

1. नियमित अंतराल पर रक्तदान करने से शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित रहती है और रक्तदाता को हृदय आघात से दूर रखता है।
2. इससे रक्तदाता व्यक्ति को विभिन्न अंगों में कैंसर के रिस्क से दूर रखता है।
3. यह कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और रक्तचाप को नियंत्रित करता है।
4. इससे ज्यादा कैलोरी और वसा को बर्न होता है और पूरे शरीर को फिट रखता है।
5. रक्तदान करने से न केवल किसी व्यक्ति का जीवन बचता है, बल्कि रक्तदाता में नई कोशिकाओं का सृजन करता है।
6. इससे आयरन का स्तर नियंत्रित रहता है, जिससे रक्त गाढ़ा बनता है और उसमें फ्री रेडिकल डैमेज बढ़ता है। रक्तदान करने से, तमाम लोगों का जीवन बचाया जा सकता है और उन लोगों को जीने की उम्मीद मिलती है, जो उम्मीद खो चुके होते हैं।

जांच के बाद ही करें रक्तदान
हाल ही में आरटीआइ के जरिए पता चला है कि भारत में अक्टूबर 2014 से लेकर मार्च 2016 के बीच एचआइवी संक्रमण के 2234 मामले संक्रमित खून चढ़ाने की वजह से सामने आए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई ब्लड बैंक नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिसकी वजह से लोग जानलेवा बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।इस मामले में नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) के डिप्टी डायरेक्टर जनरल नरेश गोयल का कहना है कि दान किए गए खून में से 84 फ़ीसदी ब्लड यूनिट स्वेच्छा से दान किए गए हैं और लगता है कि यही समस्या की जड़ है। कानून के मुताबिक दान दिए गए खून की एचआइवी, एचबीवी, हैपेटाइटिस सी, मलेरिया और सिफलिस की जांच होनी चाहिए। ये मामले सामने आने के बाद रक्तदाताओं की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वो खून की जांच के बाद ही रक्तदान कराएं, जिससे लोगों को जानलेवा बीमारियों से बचाया जा सके।

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