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अगर बच्चे की सेलेब्स के लिए दीवानगी करियर में बन रही है बाधा, तो अपनाएं ये टिप्स

टीनएज बच्चों में किसी हीरो, सिंगर या प्लेयर के प्रति दीवानगी इतनी बड़ी बात नहीं है कि पैरेंट्स इसे लेकर इतने ज्यादा चिंतित हो जाएं कि बच्चों पर कोई अंकुश लगा दें। इस तरह के सेलिब्रिटीज अफेक्शन को एक नेचुरल प्रोसेस मानें और इंतजार करें। एक समय बाद आपके टीनएजर बच्चे खुद ही इस तरह की बातों से उबर कर अपने करियर संवारने की राह में एक्टिव दिखेंगे।

अगर बच्चे की सेलेब्स के लिए दीवानगी करियर में बन रही है बाधा, तो अपनाएं ये टिप्स
दसवीं क्लास में पढ़ने वाली निहारिका को बॉलीवुड हीरो वरुण धवन बेहद पसंद है। वीकेंड पर वह घर में रहकर वरुण धवन अभिनीत फिल्मों को कई बार देखती है। वरुण धवन के प्रति उसकी यह दीवानगी, उसकी मां को जरा भी अच्छी नहीं लगती। उसकी मां एक ही फिल्म को दसियों बार जब उसे अपने लैपटॉप पर देखते हुए पाती है तो वह उस पर बिगड़ती हैं। यह अकेले निहारिका की ही बात नहीं है, कई ऐसे परिवार मिल जाएंगे, जहां निहारिका जैसी दीवानगी किसी सेलिब्रिटीज के प्रति टीनएज गर्ल में दिख जाएगी।

इनका हीरो सबसे बढ़कर

प्राय: देखा जा सकता है, टीनएज में लड़कियों के कमरों में उनके पसंदीदा हीरो, हीरोइन, मशहूर प्लेयर्स, पॉप स्टार या म्यूजिशियन के बड़े-बड़े पोस्टर लगे होते हैं। ये पोस्टर उनके कमरों की दीवारों पर ही नहीं, उनकी कॉपी-किताबों के कवर, पेंसिल बॉक्स या मग के बाहरी भाग पर भी चिपके दिखते हैं। इन चित्रों को बार-बार देखकर टीनएजर बच्चे तो नहीं लेकिन उनके मम्मी-पापा जरूर उकता जाते हैं। लेकिन उनके बच्चों के लिए तो उनके पसंदीदा स्टार्स और उनका जलवा ही सब कुछ होता है। खासतौर पर लड़कियां उनके हर एक्ट की नकल करके उनकी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ से जुड़ी छोटी से छोटी बातों पर अपने दोस्तों के साथ गूफ्तगू करती हैं। उनके लिए उनके जीवन में उस हीरो से बढ़कर और कोई नहीं होता। वे दिन-रात उसी के सपने भी देखती हैं।

फिजिकल-इमोशनल बदलाव भी हैं कारण

टीनएज में विशेषकर लड़कियों में कई ऐसे फिजिकल और इमोशनल बदलाव होते हैं, जिनसे वे असंतुष्ट रहती हैं। जैसे चेहरे पर होने वाले मुंहासे या फिर मोटापा। ये दोनों बातें कहीं न कहीं उनके कॉन्फिडेंस को कम करती हैं। दूसरी ओर ग्लैमर और चमक-दमक की दुनिया में रहने वाले हीरो-हीरोइन, जो स्क्रीन पर परफेक्ट दिखते हैं, जिनकी दुनिया रोमांचपूर्ण होती है, टीन एज लड़कियां उन्हीं की ओर आकर्षित होती हैं। उन्हें बस दिन-रात उन्हें देखना अच्छा लगता है, अपने फ्रेंड्स के साथ भी वह उन्हीं के बारे में बातें करती हैं।

सेलिब्रिटीज के प्रति आकर्षण स्वाभाविक

मनोविदों की मानें तो इस उम्र में फिल्मी सितारों, पॉप स्टार्स के प्रति टीनएज लड़कियों में आकर्षण पैदा होना स्वाभाविक है। इतना ही नहीं अगर उन्हें पता चले कि उनका पसंदीदा हीरो या पॉप स्टार उनके शहर में शूटिंग या किसी इवेंट में शिरकत कर रहा है तो उसकी एक झलक पाने के लिए बेताब हो जाती हैं। उन्हें लगता है, वह उनसे मिलकर उनका अपना हो जाएगा। टीनएज में लड़के-लड़कियां को अपने फेवरेट सेलिब्रिटीज के ख्यालों में डूबे रहने में एक अलग ही रुमानी अहसास होता है। दरअसल, वे उन्हें अपना रोल मॉडल मान लेते हैं, खुद भी उन्हीं के जैसा बनने की कोशिश करते हैं। उनके रोल मॉडल उनकी नजर में कामयाब, कॉन्फिडेंस से भरे और पॉपुलर होते हैं।

क्या कहते हैं मनोविद

मनोविदों का कहना है कि अपने किसी खास हीरो या हीरोइन के प्रति टीनएज की दीवानगी के पीछे कई कारण होते हैं। लड़कियां उस हीरो को ही अपना सर्वस्व मानने लगती हैं, उनमें उन्हें कोई खामी नहीं दिखती, जबकि उनके इर्द-गिर्द के लोग या उनके परिवार के अन्य सदस्य उनमें जान-बूझकर कमियां निकालते हैं। यह बात टीनएज गर्ल्स को बहुत बुरी लगती है। मनोविदों की मानें तो टीनएज में यह बेहद आम है, उनका हीरो फिल्म, खेल जगत से जुड़ी कोई हस्ती हो सकती है या संगीत की दुनिया का कोई सितारा, जिसके साथ टीनएजर्स जीना पसंद करते हैं। इसे मनोविद सहज बात मानते हैं, बशर्ते टीनएजर की यह दीवानगी सनक या जुनून में न बदल जाए।

विकासक्रम का नाजुक दौर

निहारिका को वरुण धवन पसंद है लेकिन उसकी मां को वरुण में कई खामियां दिखती हैं। वरुण के प्रति निहारिका की दीवानगी उसकी मां को जरा भी पसंद नहीं, नतीजा दोनों के बीच वरुण को लेकर बहसबाजी होती रहती है। निहारिका की मां इस बॉलीवुड अभिनेता के प्रति बेटी का प्यार या दीवानगी को गलत मानती है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। माता-पिता को समझना चाहिए कि इस उम्र में बच्चों के बीच इस तरह की बात कोई नई बात नहीं है। मनोविदों का मानना है कि माता-पिता को इस बात को समझना चाहिए कि किशोरावास्था, विकास क्रम में एक महत्वपूर्ण और नाजुक दौर है। किसी स्टार को पसंद करना, उसके जीवन से जुड़ी हर छोटी से छोटी चीज के बारे में पढ़ना, जानकारी जुटाना, उसे अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानकर उसी की तरह जीवन में सफल होने की ख्वाहिश पालना कोई गलत बात नहीं है। अपने पसंदीदा हीरो से मिलने के लिए प्रयास करना या उसकी बुराई सुनकर गुस्सा होना, लड़ना स्वाभाविक है। इसलिए पैरेंट्स इसको लेकर चिंतित ना हों।

क्या करें आप

माता-पिता द्वारा बेटी को उसके इस ‘हीरो वर्शिप’ यानी स्टार प्रेम को लेकर उस पर तंज नहीं कसना चाहिए। टीनएज में प्यार या दीवानगी जिस तरह उनके जीवन में एकाएक आती है, वैसे ही उम्र का यह दौर गुजर जाने के बाद खत्म भी हो जाती है। अगर टीनएज बेटी उसे अपने सपनों में देखती है, तो इसको लेकर परेशान ना हों। मां को चाहिए कि बेटी के इस हीरो प्रेम को स्वाभाविक रूप में लें। वह अपनी बेटी के साथ अपने जमाने के उन फिल्मी हीरो, स्पोर्ट्स स्टार या गायक, जो उसे बेहद पसंद थे, के अपने अनुभव शेयर कर सकती हैं। इस तरह दोनों के आपसी व्यवहार में संतुलन बनाना आसान होगा। हकीकत और सपना दोनों के नजरिए से बच्चा चीजों को देखता है लेकिन मां को इस बात का अहसास ही नहीं होता कि कब उसकी लाड़ली धीरे-धीरे जिंदगी की इस पड़ाव से निकलकर हकीकत की दुनिया में आकर अपने करियर के प्रति गंभीर हो गई है। इसलिए उसको समझें, उसके रोल मॉडल को जानने की कोशिश करें और उसके साथ अपना सहज संबंध बनाए रखें। साथ ही उसके लिए लचीले और ऐसे आसान नियम बनाएं, जिनका पालन करना उसके लिए आसान हो।
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