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Anxiety Control: आजकल एंजाइटी की समस्या बेहद कॉमन हो चुकी है। ये एक ऐसी स्थिति है जिसमें हालात खराब होने पर दवाइयां भी लेनी पड़ सकती है।

Anxiety Control: आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में एंजाइटी यानी बेचैनी एक आम समस्या बनती जा रही है। काम का दबाव, भविष्य की चिंता, सोशल मीडिया का असर ये सब मिलकर दिमाग को लगातार तनाव में रखते हैं। कई लोग इस स्थिति में तुरंत दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन हर बार दवा ही इकलौता समाधान हो, यह ज़रूरी नहीं।

कुछ नेचुरल तरीकों को अपनाकर भी एंजाइटी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। ये तरीके न सिर्फ सुरक्षित हैं, बल्कि लंबे समय में मानसिक सेहत को मजबूत बनाने में भी मदद करते हैं। आइए जानते हैं ऐसे 5 असरदार नेचुरल उपाय, जिन्हें आप रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आसानी से अपना सकते हैं।

एंजाइटी कंट्रोल करने के नेचुरल तरीके

गहरी सांस लेने की आदत डालें
जब भी एंजाइटी बढ़ती है, सबसे पहले हमारी सांसें तेज़ और उथली हो जाती हैं। ऐसे में डीप ब्रीदिंग बहुत कारगर साबित होती है। रोज़ 10-15 मिनट गहरी सांस लेने का अभ्यास करने से नर्वस सिस्टम शांत होता है और दिमाग को रिलैक्स सिग्नल मिलता है।

योग और ध्यान को बनाएं रूटीन का हिस्सा
योग और मेडिटेशन एंजाइटी कम करने के सबसे पुराने और भरोसेमंद तरीके माने जाते हैं। भ्रामरी प्राणायाम, अनुलोम-विलोम और माइंडफुल मेडिटेशन तनाव को कम करने में मदद करते हैं। नियमित अभ्यास से मन ज्यादा स्थिर और फोकस्ड रहता है।

नींद से समझौता न करें
नींद की कमी एंजाइटी को और बढ़ा सकती है। रोज़ 7-8 घंटे की अच्छी नींद दिमाग को रीसेट करने का काम करती है। सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी बनाएं और एक तय समय पर सोने की आदत डालें।

खानपान पर दें खास ध्यान
हम जो खाते हैं, उसका सीधा असर हमारी मेंटल हेल्थ पर पड़ता है। कैफीन, जंक फूड और ज्यादा चीनी एंजाइटी को ट्रिगर कर सकते हैं। वहीं फल, हरी सब्ज़ियां, नट्स और ओमेगा-3 से भरपूर फूड दिमाग को पोषण देते हैं और मूड को बेहतर बनाते हैं।

फिजिकल एक्टिविटी और वॉक करें
हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ या रोज़ाना 30 मिनट की वॉक भी एंजाइटी कम करने में मददगार है। इससे शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज़ होता है, जिसे “फील गुड हार्मोन” कहा जाता है। यह नेचुरली तनाव और बेचैनी को कम करता है।

कब लें एक्सपर्ट की मदद?

अगर एंजाइटी लंबे समय तक बनी रहे, नींद, काम और रिश्तों को प्रभावित करने लगे, तो डॉक्टर या काउंसलर से सलाह लेना ज़रूरी है। नेचुरल तरीके सपोर्टिव होते हैं, लेकिन गंभीर स्थिति में प्रोफेशनल गाइडेंस बेहद अहम है।

(Disc।aimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी डॉक्टर/विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।)

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