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अगर आपके नवजात शिशु को भी है निमोनिया और ये गंभीर बीमारी, तो अपनाएं खास उपचार

बच्चे हर किसी को पसंद होते हैं। बच्चों की मासूमियत और भोलापन बरबस ही सभी को अपनी ओर खींच लेता है । बच्चों के साथ हर खेलते हुए हर कोई अपने बचपन में एक बार फिर जी ले लेते हैं।आप सभी ने तोते में राजा की जान बसी होने वाली कहावत तो जरूर होगी। उसी तरह माता-पिता की जान भी बच्चों में बसी रहती है। बच्चे की छोटी सी चोट भी माता-पिता को अंदर तक हिलाने के लिए काफी होती है।

अगर आपके नवजात शिशु को भी है निमोनिया और ये गंभीर बीमारी, तो अपनाएं खास उपचार

बच्चे हर किसी को पसंद होते हैं। बच्चों की मासूमियत और भोलापन बरबस ही सभी को अपनी ओर खींच लेता है। बच्चों के साथ हर कोई खेल खेलते हुए एक बार फिर अपने बचपन को जी लेते हैं।

आप सभी ने तोते में राजा की जान बसी होने वाली कहावत तो जरूर होगी। उसी तरह माता-पिता की जान भी बच्चों में बसी रहती है। बच्चे की छोटी सी चोट भी माता-पिता को अंदर तक हिलाने के लिए काफी होती है।

ऐसे में अगर जन्म के साथ ही बच्चे को कोई गंभीर बीमारी हो जाए तो माता-पिता की रातों की नींद तक गायब हो जाती है। इसलिए आज हम आपको नवजात शिशुओं में होने वाली बीमारियां और उपचार बताने जा रहे हैं। जिनके जरिए आप अपने बच्चों को रोगों से भी बचा पायेंगे साथ ही अच्छे से केयर कर सकते है।

नवजात शिशुओं में होने वाली बीमारियां :

1. निमोनिया - निमोनिया अब बच्चों में जन्म के साथ होने वाली एक आम बीमारी है। इसमे नवजात बच्चे को तेज बुखार ,खांसी,सांस लेने में परेशानी तक होने लगती हैं। कभी-कभी बच्चा दूध पीना भी छोड़ देता है। आमतौर पर नवजात को को RSV के संक्रमण से निमोनिया होती है।आपके बता दें ये निमोनिया फेफड़े में इंफेक्शन की बीमारी होती है।

इसके अलावा निमोनिया बैक्टीरियल और वायरल भी होता है। कई बार निमोनिया में नवजात बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर ऑक्सीजन भी लगाई जाती है। एंटीबायोटिक सुई और दवा से ही इसका इलाज संभव है।

2. पीलिया - पीलिया नवजात शिशुओं में होने वाली एक ओर कॉमन बीमारी है। इस बीमारी में पीलिया में बच्चे की त्वचा, आंख और छाती का रंग पीला हो जाता है। दरअसल पीला रंग रक्त में बिलुबरीन बनने से होता है। सामान्यतया लीवर का काम है कि वो बिलुबरीन को बनने नहीं देता या उसे कम कर देता है।

कई बच्चों का जन्म के बाद से ही लीवर सही ढंग से काम नहीं करता है। जिससे बच्चे को पीलिया की शिकायत हो जाती है। आपको बता दें कि जन्म के साथ ही पीलिया होने पर बच्चे को मानसिक रोग,बहरापन समेत कई और गंभीर बीमारी होने खतरा बढ़ जाता है।

3. सर्दी-खांसी-कफ - नवजात शिशुओं में सर्दी-खांसी और कफ की शिकायत भी आमतौर पर देखी जाती है। ये अक्सर नए माहौल के शरीर पर पड़ने वाले असर की वजह से होता है। इसके अलावा कई बार शिशुओं में एलर्जी और इंफेक्शन भी अहम भूमिका निभाता है। कई बार शिशु को कफ होने से उल्टी की भी शिकायत हो जाती है।

4.पेट में दर्द (उदरशूल) - अगर आपका शिशु लगातार 3 घंटों या उससे ज्यादा देर तक रोता रहता है तो इसका मतलब है कि उसे पेट दर्द यानि उदरशूल की समस्या है। कई शिशुओं में जन्म से ही पेट दर्द की शिकायत देखी जाती है।

5.डायरिया - पीलिया और निमोनया के अलावा डायरिया भी नवजात शिशुओं में होने वाली एक कॉमन बीमारी है। डायरिया होने पर शिशु को पतले दस्त की शिकायत हो जाती है, जिससे शिशु के शरीर में पानी की कमी हो जाती है।

अधिकतर ये बीमारी बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से होती है। आपको बता दें कि ज्यादा गंभीर स्थिति में डॉक्टर शिशु को नस के जरिए पानी और इलेक्ट्रोलाइट (सेलाइन) चढ़ाते हैं ताकि शिशु के शरीर में पानी की कमी न हो।

नवजात शिशुओं में होने वाली बीमारियां और उपचार -

1.सर्दी-खांसी-कफ - थोड़ा सा शहद लेकर उनके सर पर रगड़ें और स्लाइन ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें। उनके लिक्विड आहार की मात्रा बढ़ाने पर उनका कफ ढीला हो जाता है जिनसे उन्हें आराम मिलता है।

2. पेट में दर्द (उदरशूल) - इस बीमारी के होने पर शिशु के सीने और पेट पर हींग के पानी के साथ मिलाकर हल्के हाथ से मसाज करें।

3. डायरिया - इस बीमारी में शिशुओं को बच्चों को सूखे सीरियल्स,ब्रेड, चावल, मैश किए आलू, पतले बिस्किट आदि दें जिनसे उनकी सोडियम की कमी पूरी हो जाए। सॉफ्ट उबले आलू या दही भी काफी फायदेमंद हैं और जल्दी पच जाते हैं।

4. निमोनिया - निमोनिया होने पर शिशु को बेहतर देखभाल के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें ।

5.पीलिया - नवजात शिशु को पीलिया होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें पर पीलिया से पीड़ित बच्चों के लिए फोटोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें एक खास तरह की रोशनी में बच्चे को एक शीशे के जार में रखा जाता है। इस खास लाइट में रहने से रक्त में बिलुबरीन की मात्रा कम हो जाती है।

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