Parenting Tips: टीनएज बच्चों के साथ इमोशनल बॉन्डिंग कम हो रही है? इन तरीकों से रिश्ते दोबारा होंगे बेहतर

How to improve emotional bonding with teenager child
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टीनएज बच्चों से बॉन्डिंग बढ़ाने के टिप्स।

Parenting Tips: किशोरावस्था में आते हुए बच्चों के साथ कई बार पैरेंट्स की बॉन्डिंग कम होने लगती है। ऐसे में कुछ टिप्स कारगर हो सकते हैं।

Parenting Tips: टीनएज एक ऐसा दौर होता है, जब बच्चे तेजी से बदलते हैं उनकी सोच, व्यवहार और प्राथमिकताएं सब कुछ अलग होने लगता है। इसी बदलाव के बीच कई माता-पिता महसूस करते हैं कि बच्चों से पहले जैसी खुलकर बात नहीं हो पाती। बातचीत कम होने लगती है और इमोशनल दूरी बढ़ने लगती है।

दरअसल, यह दूरी अचानक नहीं आती, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ती है। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो रिश्ते में गलतफहमियां और तनाव बढ़ सकता है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान और समझदारी भरे तरीकों से टीनएज बच्चों के साथ इमोशनल बॉन्डिंग को फिर से मजबूत किया जा सकता है।

टीनएज में क्यों बढ़ती है इमोशनल दूरी?

इस उम्र में बच्चे अपनी पहचान बनाने की कोशिश करते हैं। वे ज्यादा प्राइवेसी चाहते हैं और दोस्तों की राय को अहम मानने लगते हैं। माता-पिता का जरूरत से ज्यादा टोकना, तुलना करना या हर बात पर डांटना बच्चों को भावनात्मक रूप से दूर कर सकता है।

सुनना सीखें, जज करना नहीं: जब बच्चा कुछ शेयर करे, तो तुरंत सलाह या डांट देने के बजाय उसकी बात ध्यान से सुनें। उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी भावनाएं मायने रखती हैं। बिना जजमेंट के सुनना भरोसे की नींव मजबूत करता है।

बातचीत का तरीका बदलें: हर बातचीत सवाल-जवाब या पढ़ाई तक सीमित न रखें। कभी उनके पसंदीदा म्यूजिक, गेम्स या दोस्तों की बातें भी करें। इससे बच्चा आपसे जुड़ाव महसूस करेगा और खुलकर बात करने लगेगा।

तुलना और ताने से बचें: 'उसके बच्चे को देखो' जैसे वाक्य टीनएज बच्चों को अंदर से तोड़ सकते हैं। तुलना करने से आत्मविश्वास कमजोर होता है और वे खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं। हर बच्चे की क्षमता अलग होती है, इसे समझना जरूरी है।

क्वालिटी टाइम दें: हर दिन थोड़ा सा समय सिर्फ बच्चे के लिए निकालें। यह समय मोबाइल या टीवी से दूर हो। साथ टहलना, खाना बनाना या कोई छोटा सा काम करना भी रिश्ते में गर्मजोशी ला सकता है।

उनकी गलतियों को समझें: टीनएज में गलतियां होना स्वाभाविक है। हर गलती पर सजा देने के बजाय उसे सीखने का मौका दें। जब बच्चा यह समझेगा कि आप उसकी तरफ हैं, तो वह भावनात्मक रूप से आपसे जुड़ा रहेगा।

भरोसा बनाएं, जासूसी नहीं: हर समय बच्चों पर नजर रखना या उनकी चीजें चेक करना भरोसे को तोड़ सकता है। जरूरी है कि आप उन पर विश्वास दिखाएं। भरोसा मिलने पर बच्चे खुद ही अपनी बातें शेयर करने लगते हैं।

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