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हरियाली तीज की कहानी और महत्व, जानिए क्या है वैवाहिक जीवन से इसका संबंध

हरियाली तीज के लिए महिलाओं की तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया हरियाली तीज के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। सुहागिनों के लिए इस व्रत का बड़ा महत्व माना जाता है।

हरियाली तीज की कहानी और महत्व, जानिए क्या है वैवाहिक जीवन से इसका संबंध
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Hariyali Teej

हरियाली तीज (13 अगस्त, 2018) के लिए महिलाओं की तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रावण मास (सावन महीने) के शुक्ल पक्ष की तृतीया हरियाली तीज के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत (बिना कुछ खाए-पिए) रखती हैं। सुहागिनों (शादीशुदा महिलाएं) के लिए इस व्रत का बड़ा महत्व माना जाता है।

महिलाएं अपनी पति की लंबी उम्र या पति के साथ लंबे समय तक वैवाहिक जीवन के सुख की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। ऐसा माना जाता है कि जो सुहागिनें व्रत रखकर भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करती हैं उनके पति की दीर्घायु (लंबी उम्र) होती हैं।

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हरियाली तीज की कहानी

मान्यताओं और किवदंती के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन सैकड़ों वर्षों की साधना के बाद मां पार्वती भगवान शिव से मिली थी।

इतना ही नहीं भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने 107 बार जन्म लिया और 108वीं बार जन्म लेने के बाद इसी दिन उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाया था। तभी से इस व्रत का महत्व माना जाता है।

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हरियाली तीज का महत्व

माता पार्वती के कहने पर भगवान शिव ने ये वरदान दिया कि इस दिन जो भी सुहागिनें सोलह श्रृंगार करके शिव-पार्वती की पूजा करेंगी उनके पति की लंबी उम्र या पति के साथ लंबे समय तक वैवाहिक जीवन के सुख की प्राप्ति होगी। इसके अलावा अगर इस दिन कोई कुंवारी कन्या व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करती है तो उसे योग्य वर की प्राप्ति होती है।

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