Rajpal Yadav bail: फिल्म अभिनेता राजपाल यादव को 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार (16 फरवरी) को उन्हें 18 मार्च तक अंतरिम जमानत दे दी। हाल ही में अभिनेता ने बकाया राशि के मामले में अदालत के आदेश पर सरेंडर किया था, जिसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। अब जमानत मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है।
भाई चंद्रपाल यादव ने जताई खुशी
अदालत के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए राजपाल यादव के भाई चंद्रपाल यादव ने भावुक अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने हाथ जोड़ते हुए कहा, “हमें किसी से कोई शिकायत नहीं है। जो भी दिन थे, वो हमारे दिन थे। अब हमारे अच्छे दिन आने वाले हैं। अभी बस यही कहेंगे।”
Delhi: On actor Rajpal Yadav, brother Chandrapal Yadav says, ''We have no complaints. Whatever days we had, our good days are yet to come. That is all we will say for now.'' pic.twitter.com/jn3cLsPF3R
— IANS (@ians_india) February 16, 2026
जब उनसे मामले और बॉलीवुड से मिल रहे समर्थन को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में खुद राजपाल ही विस्तार से बात करेंगे। बताया जा रहा है कि जेल से रिहा होने के बाद अभिनेता जल्द ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं।
कोर्ट ने किन शर्तों पर दी जमानत
दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेता की सजा पर 18 मार्च तक रोक लगाते हुए उन्हें अंतरिम जमानत दी है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने यह राहत 1 लाख रुपये के निजी मुचलके और एक जमानती की शर्त पर दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले 1.5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था।
राजपाल यादव को अगली सुनवाई तक जेल से बाहर रहने की अनुमति दी गई है। इस दौरान उनसे बकाया रकम का शेष भुगतान करने को कहा गया है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला करीब एक दशक पुराना है। साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म 2012 में रिलीज हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर असफल रही। इसके बाद अभिनेता समय पर कर्ज नहीं चुका सके और मामला अदालत तक पहुंच गया।
2018 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा को परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। सात चेक बाउंस होने के बाद उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी। 2019 में सत्र अदालत ने भी इस सजा को बरकरार रखा, जिसके बाद मामला हाई कोर्ट में पहुंचा।
समय के साथ बकाया राशि बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये हो गई। अदालत ने पहले भी उन्हें बकाया चुकाने के लिए “ईमानदार और गंभीर प्रयास” करने का निर्देश दिया था। हाल ही में रकम न चुका पाने की स्थिति में उन्हें सरेंडर करना पड़ा था।










