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स्वतंत्रता दिवस 2018: जानें कहां तक पढ़ें थे शहीद ए आजम भगत सिंह, इस एक किताब ने बदल दी थी जिंदगी

देश 72 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की ओर बढ़ रहा है। लेकिन जैसे- जैसे वक्त गुजरता जा रहा हैं हम उन अमर जवानों को भूलते जा रहे हैं। जिनकी कुर्बानियों की बदौलत आज हम आजाद भारत में रह रहे हैं।

स्वतंत्रता दिवस 2018: जानें कहां तक पढ़ें थे शहीद ए आजम भगत सिंह, इस एक किताब ने बदल दी थी जिंदगी

देश 72 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की ओर बढ़ रहा है। लेकिन जैसे- जैसे वक्त गुजरता जा रहा है हम उन अमर जवानों को भूलते जा रहे हैं जिनकी कुर्बानियों की बदौलत आज हम आजाद भारत में रह रहे हैं।

आज भी मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई, महात्मा गांधी, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और भगत सिंह जैसे नायकों और महानायको को याद करने की जरुरत है जिन्होंने देश की आजादी में अपना सबकुछ बलिदान कर दिया।

भारत के सबसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भगत सिंह भारत देश की महान ताकत है जिन्होंने हमें अपने देश पर मर मिटने की ताकत दी है भगत सिहं का जन्म 27 सितम्बर 1907 हुआ था।

उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था। उन्होंने अपनी मात्र 23 साल की उम्र में ही अपने देश के लिए अपने प्राण न्योछाबर कर दी थे।

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भगत सिंह की शिक्षा

भगत सिंह ने अपनी प्राइमरी शिक्षा पैतृक गांव खट्कड़ कलाँ है से प्राप्त की थी जो आज पंजाब में स्थित है। भगत सिंह आगे की पढ़ाई के लिए वे पिता के पास नवांकोट, लाहौर से की थी।

भगत सिंह ने वहां उन्हें डी.ए.वी. स्कूल में प्रवेश लिया और वहां से नौवीं की परीक्षा पास की थी। 1923 में 12वीं की परीक्षा पास की थी इसी समय उनके घर वाले शादी के बंधन में बॉधना चाहते थे इसी कारण वे लाहौर से कानपुर भाग गए।

भगत सिंह 14 वर्ष की आयु से ही पंजाब की क्रांतिकारी संस्थाओं में हिस्सा लेने लगे। नेशनल कॉलेज में बीए के लिए प्रवेश लिया। जब भगत सिंह बीए कर रहे थे तब उनकी मुलाकात सुखदेव, भगवती चरण से हुई और बीच में ही अपनी बीए की पढ़ाई छोड कर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े और नौजवान भारत सभा की स्थापना की थी।

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