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हिंदी दिवस विशेष: दुनिया में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा आज तक नहीं बन पाई राष्ट्रभाषा

अंग्रेजी और चीनी भाषा के बाद हिंदी दुनिया में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। इसके बावजूद भारत में आज भी इसे आज भी सिर्फ राजभाषा का ही दर्जा प्राप्त है राष्ट्रभाषा का नहीं।

हिंदी दिवस विशेष: दुनिया में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा आज तक नहीं बन पाई राष्ट्रभाषा

विश्व की प्राचीन और समृद्ध भाषा मानी जाने वाली हिंदी भाषा का दिवस आज यानि 14 सितंबर को मनाया जाता है। हिंदी भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में बोली जाती है। दुनिया की भाषाओं का आंकड़ा रखने वाली संस्था के मुताबिक हिंदी दुनिया में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। इसके बावजूद हिंदी पिछले 70 वर्षों में राष्ट्रभाषा नहीं बन पायी।

हिंदी को 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा राजभाषा बनाने का निर्णय लिया गया। देश का संविधान लागू होने के 15 साल बाद इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा देना था। हालांकि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा आजादी के बाद ही दिया जाना था। लेकिन कई राज्यों के विरोध के बाद 15 साल बाद 1965 में इसे राष्ट्रभाषा बनाने का फैसला किया गया। लेकिन 1965 में जब इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा देने की बारी आयी तो फिर विरोध शुरू हो गया। ऐसे में फिर कभी हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं पायी।

66 साल से मना रहे हिंदी दिवस

देश पिछले 66 साल से हिंदी दिवस मना रहा है। हिंदी के प्रचार-प्रसार पर जोर देने के लिए हिंदी दिवस मनाया जाता है। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर 1953 से पूरे भारत में 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

महात्मा गांधी ने रखा था राष्ट्रभाषा बनाने का प्रस्ताव

भारत एक विविधताओं वाला देश है, यहां हर राज्‍य की अपनी अलग सांस्‍कृति, सभ्यता और ऐतिहासिक पहचान है। इसके साथ ही यहां हर स्थान की बोली भी अलग है। इसी को देखते हुए यहां एक कहावत बहुत मशहुर है कोष-कोष पर बदले पानी चार कोष पे बानी। इसके बावजूद हिन्‍दी भारत की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है, यही वजह है कि राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी ने हिन्‍दी को जनमानस की भाषा कहा था। उन्‍होंने 1918 में आयोजित हिन्‍दी साहित्‍य सम्‍मेलन में हिन्‍दी को राष्‍ट्र भाषा बनाने का भी प्रस्ताव रखा था।

हिंदी के साथ अंग्रेजी भी है राजभाषा

भारत को आजादी मिलने के बाद आखिरकार 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिन्‍दी को राजभाषा बनाने का फैसला लिया। भारतीय संविधान के अनुसार 'संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी'। हिन्‍दी को राजभाषा बनाए जाने से बहुत से लोग खुश नहीं थे और इसका विरोध होने लगा इसी विरोध के चलते बाद में सरकार को अंग्रेजी को भी राजभाषा के रूप में मान्यता देनी पड़ी।

क्यो मनाया जाता है हिंदी दिवस



भारत 200 सालों तक अंग्रेजों का गुलाम रहा, इसी गुलामी का असर लोगों में देखने को मिला यहां तक कि इसका प्रभाव भाषा पर भी पड़ा। वैसे तो हिन्‍दी दुनिया की तीसरी ऐसी भाषा है जिसे सबसे ज्‍यादा लोग बोलते हैं लेकिन इसके बावजूद हिन्‍दी को अपने ही देश में हीन भावना से देखा जाता है, आमतौर पर हिन्‍दी बोलने वाले को पिछड़ा और अंग्रेजी में अपनी बात कहने वाले को आधुनिक माना जाता है।

इसे हिन्‍दी का दुर्भाग्‍य ही कहा जाएगा कि इतनी समृद्ध भाषा होने के बावजूद भी हिन्‍दी लिखते और बोलते वक्‍त ज्‍यादातर अंग्रेजी के शब्‍दों का इस्‍तेमाल किया जाता है,और हिन्‍दी का प्रचलन धीरे-2 घटता जा रहा है ऐसे में हिन्‍दी दिवस मनाना जरूरी है ताकि लोगों को यह याद रहे कि हिन्‍दी उनकी राजभाषा है और उसका सम्‍मान करना उनका कर्तव्‍य है। हिन्‍दी दिवस मनाने के पीछे मंशा यही है कि लोगों को एहसास दिलाया जा सके कि जब तक वे इसका इस्‍तेमाल नहीं करेंगे तब तक इस भाषा का विकास नहीं होगा।

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