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Iran-Israel War Impact: ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। आमतौर पर युद्ध के समय गोल्ड-सिल्वर की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार डॉलर की मजबूती, मुनाफा बुकिंग और बाजार के रुझान ने कीमतों पर दबाव बनाया है। जानिए इसके पीछे के 5 बड़े कारण।

Iran-Israel War Impact: भू‑राजनीतिक तनाव, जैसे ईरान‑इज़राइल और अमेरिका‑ईरान के बीच बढ़ते संघर्षों के बीच सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों को हैरान कर दिया है। आमतौर पर युद्ध या वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आती है। लेकिन इस बार बाजार का रुख उल्टा रहा।

वैश्विक बाजारों में सोना‑चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है, जिसने निवेशकों को हैरानी में डाल दिया है। इसका असर न सिर्फ कमोडिटी मार्केट पर बल्कि शेयर बाजार और डॉलर की मजबूती पर भी देखा जा रहा है।  

युद्ध शुरू होते ही सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट
28 फरवरी को, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 5,416 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। लेकिन संघर्ष बढ़ने के बावजूद, 9 मार्च तक सोने की कीमत घटकर 5,103 डॉलर प्रति औंस हो गई, यानी करीब 5.7 प्रतिशत की गिरावट। भारत में भी इसी तरह का रुझान देखा गया। MCX पर 28 फरवरी को सोना लगभग 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो अब घटकर 1.60 लाख रुपये के स्तर पर आ गया। 

सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में अधिक गिरावट दर्ज की गई। 28 फरवरी को MCX पर चांदी की कीमत लगभग 2.89 लाख रुपये प्रति किलो थी, लेकिन 9 मार्च तक यह घटकर 2.63 लाख रुपये प्रति किलो हो गई, यानी एक हफ्ते में करीब 9 प्रतिशत की कमी देखने को मिली।

क्यों नहीं बढ़ रहे सोना‑चांदी के दाम? ये है 5 बड़े कारण 

1. अमेरिकी डॉलर की मजबूती
जब डॉलर इंडेक्स मजबूत होता है, तो सोना और चांदी जैसे डॉलर‑निर्देशित कमोडिटीज़ की कीमतों पर दबाव बनता है। जब डॉलर मजबूत होता है, निवेशक अन्य मुद्राओं में सोना खरीदने में तंगी महसूस करते हैं, जिससे मांग कम होती है और दाम गिरते हैं।

यह वही कारक है जो हाल के ट्रेडिंग सेशन्स में देखने को मिला, जहां डॉलर मजबूती दिखा रहा है और सोना‑चांदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरावट में रहा।  

2. मुनाफा बुकिंग (Profit Booking)
कुछ ट्रेडर्स और निवेशक, जिन्होंने पहले सोना‑चांदी में अच्छा रिटर्न लिया है, अब मुनाफा बुक कर रहे हैं।
इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ती है और कीमतों पर नकारात्मक दबाव आता है।  कई एनालिस्ट इस गिरावट को इसी मुनाफावसूली का परिणाम बता रहे हैं।

3. कच्चे तेल और डॉलर‑सोने का कॉम्प्लेक्स रिलेशन
युद्ध से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है (जो कई बार हुआ भी है) लेकिन इससे डॉलर की मांग भी बढ़ जाती है, क्योंकि तेल का व्यापार डॉलर में होता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना और चांदी के बढ़ने की क्षमता सीमित हो जाती है। कच्चे तेल और सोने के बीच सीधा संबंध नहीं हमेशा वैसा रहता जैसा निवेशक उम्मीद करते हैं। 

4. सुरक्षित निवेश विकल्पों का विभाजन
आज निवेशक सिर्फ सोना ही सुरक्षित निवेश नहीं देखते। बल्कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स, डॉलर‑मूल्य वाली सिक्योरिटीज़  के साथ अन्य एसेट क्लास निवेशकों को उच्च ब्याज दे रहे। इन विकल्पों के होने से पूरी मांग सोने‑चांदी की ओर नहीं जाती, जिससे कीमतों पर उछाल सीमित होता है।

5. शेयर बाजार में कमजोरी 
जैसे ही शेयर बाजार गिरता है, कुछ निवेशक तरलता (Liquidity) बढ़ाने के लिए अपने सोने‑चांदी के पोर्टफोलियो को बेचते हैं। इससे भी किसी समय कीमतों पर नीचे की दिशा का दबाव बनता है।  यह विशेष रूप से देखा गया है जब बाजारों में बड़ी गिरावट के साथ जोखिम की भावना बढ़ती है। 

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