भारतीय शेयर बाजार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप एक बार फिर 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह वही स्तर है, जो अमेरिका-ईरान-इजरायल तनाव शुरू होने से पहले 27 फरवरी को देखा गया था। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी अभी भी अपने उस स्तर से नीचे चल रहे। इसके बावजूद कुल मार्केट वैल्यू में यह वापसी बाजार की मजबूती को दिखाती।
आंकड़ों के मुताबिक, 30 मार्च को बाजार में आई तेज गिरावट के दौरान कुल मार्केट कैप करीब 4.37 ट्रिलियन डॉलर तक गिर गया था। वहां से अब तक करीब 600 अरब डॉलर की रिकवरी हुई है। इस उछाल की सबसे बड़ी वजह अप्रैल महीने में आई तेजी रही,जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने करीब 6.5 फीसदी की बढ़त दर्ज की।
स्मॉल और मिडकैप शेयरों में अच्छी तेजी
सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बीएसई मिडकैप 150 इंडेक्स करीब 9.86 फीसदी और स्मॉलकैप 250 इंडेक्स 12.9 फीसदी तक चढ़ा। इन सेगमेंट ने बड़े सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया और कुछ समय के लिए अपने पुराने स्तर को भी छू लिया।
निफ्टी प्री-वॉर लेवल से 1200 अंक नीचे
इसके बावजूद सेंसेक्स अभी भी अपने प्री-वॉर स्तर से करीब 3900 अंक नीचे है, जबकि निफ्टी करीब 1100 अंक पीछे चल रहा है। यानी बाजार पूरी तरह पुराने स्तर पर नहीं पहुंचा है, लेकिन रिकवरी का ट्रेंड साफ दिख रहा है।
मध्य पूर्व संकट खत्म होने के आसार
इस तेजी के पीछे वैश्विक माहौल में सुधार भी एक अहम वजह है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी युद्धविराम को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो भारत जैसे आयातक देश के लिए चिंता का विषय है। इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बना रह सकता है।
विदेशी निवेशकों ने भी शुरू की खरीदारी
विदेशी निवेशकों की बात करें तो उन्होंने पिछले दो सत्रों में खरीदारी की है लेकिन कुल मिलाकर वे इस अवधि में 14 अरब डॉलर से ज्यादा की बिकवाली कर चुके। इस दौरान घरेलू निवेशकों ने बाजार को संभाला और लगातार खरीदारी कर संतुलन बनाए रखा।
एशिया के कुछ अन्य बाजारों, जैसे दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान, में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में बढ़ती दिलचस्पी के चलते इन बाजारों में निवेश बढ़ रहा है, जिससे भारत के पीछे छूटने की आशंका भी जताई जा रही।
विश्लेषकों का मानना है कि चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। मजबूत घरेलू मांग, सरकारी निवेश और बेहतर वित्तीय स्थिति बाजार को सपोर्ट दे रही। साथ ही, शेयरों की वैल्यूएशन में आई गिरावट ने निवेश के लिए अच्छा मौका भी तैयार किया है।
(प्रियंका कुमारी)









