ट्रंप का 'टैरिफ बम': 500% की धमकी से भारतीय बाजार में हाहाकार, निवेशकों के 8 लाख करोड़ डूबे!

इस खबर के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट आई, जिससे निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपये डूब गए। आईटी और रिलायंस जैसे बड़े शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखी गई।

Updated On 2026-01-08 17:29:00 IST

भारत की जीडीपी ग्रोथ अनुमान (7.4%) हैं, लेकिन ट्रंप के 'टैरिफ वॉर' ने घरेलू बाजार के लिए नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।

नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'सैंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2025' (Sanctioning Russia Act of 2025) को दिए गए समर्थन ने वैश्विक बाजारों सहित भारतीय शेयर बाजार को हिला कर रख दिया है।

गुरुवार, 8 जनवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक, सेंसेक्स और निफ्टी, में 1% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका द्वारा उन देशों पर 500% तक आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव है, जो रूस से तेल और ऊर्जा उत्पादों की खरीद जारी रखे हुए हैं।

इस खबर के फैलते ही दलाल स्ट्रीट में बिकवाली का दौर शुरू हो गया, जिससे महज एक दिन में निवेशकों की करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई।

क्या है 'सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025' और टैरिफ का खतरा

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश किए गए इस विवादित बिल को डोनाल्ड ट्रंप का खुला समर्थन मिल गया है। इस कानून के तहत अमेरिका उन देशों से आने वाले सामानों और सेवाओं पर न्यूनतम 500% का दंडात्मक टैरिफ लगाएगा जो रूसी तेल, गैस या यूरेनियम का आयात करते हैं।

चूंकि भारत वर्तमान में रूस के सबसे बड़े तेल खरीदारों में से एक है, इसलिए निवेशकों को डर है कि भारतीय निर्यात (जैसे आईटी सेवाएं, फार्मा और टेक्सटाइल) पर इसका बेहद बुरा असर पड़ेगा। ट्रंप का तर्क है कि भारत जैसे देश सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीनरी को फंड कर रहे हैं, जिसे रोकने के लिए वह इस सख्त टैरिफ का इस्तेमाल करेंगे।

सेंसेक्स और निफ्टी में कोहराम के बड़े आंकड़े

गुरुवार को बाजार खुलते ही लाल निशान पर ट्रेड करने लगा और बंद होते-होते बीएसई सेंसेक्स 780 अंक फिसलकर 84,181 के स्तर पर आ गया। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 264 अंकों की गिरावट के साथ 25,877 पर बंद हुआ।

पिछले चार कारोबारी दिनों में बाजार की यह लगातार चौथी गिरावट है, जिसमें सेंसेक्स कुल 1600 अंकों से ज्यादा टूट चुका है।

बाजार की इस गिरावट ने बीएसई के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन को 479.94 लाख करोड़ से घटाकर 471.82 लाख करोड़ रुपये पर ला खड़ा किया है।

आईटी और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली

ट्रंप के इस कदम का सबसे सीधा और घातक असर भारतीय आईटी सेक्टर पर देखा जा रहा है, क्योंकि भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है।

आज के कारोबार में एलएंडटी (L&T) के शेयर 3.35% तक टूट गए, जबकि टेक महिंद्रा और टीसीएस (TCS) जैसे दिग्गजों में भी 2.5% से 3% की भारी गिरावट रही।

इसके अलावा इंफोसिस, टाटा स्टील और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े शेयरों ने भी बाजार को नीचे खींचने में प्रमुख भूमिका निभाई। बाजार में डर है कि अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो अमेरिका को सेवाएं देना भारतीय कंपनियों के लिए बेहद महंगा और मुश्किल हो जाएगा।

भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में बढ़ता तनाव

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत को टैरिफ के मुद्दे पर घेरा है। हाल ही में उन्होंने संकेत दिया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सख्त टैरिफ फैसलों से "ज्यादा खुश नहीं हैं"।

भारत पहले से ही अमेरिकी सामानों पर 50% तक के टैरिफ का सामना कर रहा है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा रूसी तेल खरीद से जुड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस 500% टैरिफ की धमकी को एक 'लीवरेज' या दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि भारत को रूस से दूर किया जा सके।

हालांकि, भारत ने अब तक अपनी ऊर्जा सुरक्षा का हवाला देते हुए रूसी तेल की खरीद कम करने का कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया है।

निवेशकों के लिए आगे की राह और बाजार का रुख

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अस्थिरता और बढ़ सकती है क्योंकि अगले सप्ताह अमेरिकी कांग्रेस में इस बिल पर वोटिंग होने की संभावना है।

इसके साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बाजार से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है, जिन्होंने पिछले सत्र में ही 1,668 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की है।

हालांकि, भारत की जीडीपी ग्रोथ अनुमान (7.4%) सकारात्मक हैं, लेकिन ट्रंप के 'टैरिफ वॉर' ने घरेलू बाजार के लिए नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।

निवेशकों को फिलहाल बड़े निवेश से बचने और वैश्विक भू-राजनीतिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखने की सलाह दी गई है।


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