Video: बीजेपी का युवा “नबीन” युग– कितने सफल होंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन? चर्चा में बड़े खुलासे
बीजेपी को मिला सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष। नितिन नबीन के सामने 272+ का लक्ष्य, गठबंधन की चुनौती और संगठन को मजबूत करने की परीक्षा। ‘चर्चा’ में जानिए पूरा विश्लेषण।
भारतीय राजनीति के सबसे बड़े दल, भारतीय जनता पार्टी में नेतृत्व का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। पटना से पांच बार विधायक और वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन को अनौपचारिक रूप से पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है।
अब सिर्फ औपचारिक ऐलान बाकी है और इसके साथ ही भाजपा की कमान देश के सबसे युवा हाथों में होगी। अमित शाह के मार्गदर्शन और जेपी नड्डा की विरासत को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी अब नितिन नबीन के कंधों पर है। गठबंधन की राजनीति के इस दौर में उन्हें संगठन को फिर से स्पष्ट बहुमत की दिशा में ले जाना होगा।
औपचारिक प्रक्रिया और निर्विरोध चयन की ओर
भाजपा के चुनाव कार्यक्रम के तहत आज नामांकन का अंतिम दिन था। इस प्रक्रिया में केवल नितिन नबीन ने ही पर्चा भरा, जिससे उनका निर्विरोध चुना जाना लगभग तय हो गया है। चुनाव नियमों के अनुसार कल उनके नाम की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
कार्यकारी अध्यक्ष से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर
कुछ समय पहले ही उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था, जिससे संकेत मिल गए थे कि पार्टी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने जा रही है। 26 वर्ष की उम्र में पहली बार विधायक बने नितिन नबीन ने संगठन और चुनावी मैदान, दोनों में अपनी मजबूत पकड़ साबित की है।
नबीन युग: सबसे युवा चेहरा
भाजपा के 40 से अधिक वर्षों के इतिहास में नितिन नवीन सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। इसे पार्टी के भीतर पीढ़ीगत बदलाव और युवाओं पर बढ़ते भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
अमित शाह और जेपी नड्डा की विरासत
नितिन नबीन, जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी होंगे और उन्हें अमित शाह के अनुभव का साथ मिलेगा। इन दोनों नेताओं के कार्यकाल में भाजपा ने कई ऐतिहासिक जीत दर्ज की थीं। अब उस विरासत को आगे बढ़ाना उनकी सबसे बड़ी परीक्षा है।
गठबंधन की सरकार और 272 का लक्ष्य
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा 240 सीटों पर सिमट गई थी। ऐसे में पार्टी को फिर से अपने दम पर 272+ तक पहुंचाना नितिन नबीन की प्राथमिक चुनौती होगी।
युवा कंधों पर तीन बड़ी चुनौतियां
1. संगठन का विस्तार और मजबूती: जमीनी स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना और पार्टी स्ट्रक्चर को और मजबूत बनाना।
2. सहयोगी दलों के साथ संतुलन: गठबंधन की राजनीति में भाजपा की निर्णायक भूमिका बनाए रखना।
3. भाजपा की अपनी ताकत बढ़ाना (272+ लक्ष्य): अमित शाह जैसी चुनावी रणनीति अपनाकर पार्टी को फिर से स्पष्ट बहुमत की ओर ले जाना।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि,
क्या नितिन नबीन युवा जोश के साथ अमित शाह और जेपी नड्डा जैसी चुनावी रणनीतियों को धरातल पर उतार पाएंगे?
‘चर्चा’ में बड़ा मंथन
इन सवालों व चुनौतियों पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने विशेष “चर्चा” की।
इस चर्चा में शामिल रहे-
- जगदीश सिंह (प्रवक्ता, सपा)
- रत्नाकर सिंह (प्रवक्ता, भाजपा)
- श्रवण गर्ग (वरिष्ठ पत्रकार)
- डॉ. अजय उपाध्याय (प्रवक्ता, कांग्रेस)
बड़ा सवाल-
बीजेपी के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन कितने सफल होंगे?
प्रवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे और कई अहम पहलुओं पर खुलकर चर्चा हुई।