फरीदाबाद: सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने नौकरी जाने के गम में ट्रेन के आगे लगाई छलांग, सुसाइड से पहले काफी देर तक ट्रैक के पास बैठा रहा
युवक निजी कंपनी में काम करता था, लेकिन एक महीने पहले उसकी नौकरी छूट गई थी। वह भविष्य को लेकर गहरे अवसाद में था। युवक की मां ने बताया कि सुसाइड से पहले उसने साथ बैठकर खाना खाया था।
हरियाणा के फरीदाबाद जिले में 35 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने मानसिक तनाव के चलते मौत को गले लगा लिया। युवक नौकरी छूट जाने के कारण लंबे समय से डिप्रेशन में था। शनिवार तड़के उसने न्यू टाउन रेलवे स्टेशन के पास तेज रफ्तार ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक का शरीर कई टुकड़ों में कटी हालत में मिला।
ट्रैक के किनारे बैठकर मौत का इंतजार कर रहा था
प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जांच के अनुसार शनिवार सुबह करीब 3 बजे फरीदाबाद के न्यू टाउन और ओल्ड रेलवे स्टेशन के बीच यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि सुसाइड करने से पहले इंजीनियर काफी देर तक रेलवे ट्रैक के नजदीक बैठा रहा। जैसे ही एक तेज रफ्तार ट्रेन आई, उसने अचानक ट्रैक पर छलांग लगा दी। जीआरपी (GRP) ने मौके पर पहुंचकर शरीर के अंगों को एकत्र किया।
मां के साथ आखिरी बार खाया था खाना
मृतक की पहचान विक्रमजीत सिंह के रूप में हुई है, जो सेक्टर-10 का निवासी था। उसकी मां सुमन देवी ने बताया कि शुक्रवार रात करीब 10 बजे विक्रमजीत ने उनके साथ बैठकर सामान्य रूप से खाना खाया था। हालांकि, उस दौरान उसके मन में चल रही उथल-पुथल का अंदाजा मां को नहीं था। खाना खाते समय उसने बातों-बातों में आत्महत्या करने के तरीकों का जिक्र किया था, जिस पर मां ने उसे काफी समझाया और ढांढस बंधाया था। खाना खाने के बाद वह अपने कमरे में चला गया, लेकिन देर रात वह चुपचाप घर से निकल गया।
बेरोजगारी और डिप्रेशन ने ली जान
विक्रमजीत सिंह पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और एक निजी कंपनी में कार्यरत था। कोरोना काल के बाद से वह 'वर्क फ्रॉम होम' कर रहा था, लेकिन करीब एक महीने पहले उसकी नौकरी चली गई थी। अपनी वृद्ध मां का इकलौता सहारा होने के कारण वह भविष्य को लेकर बहुत चिंतित रहने लगा था। मां के अनुसार नौकरी जाने के बाद से ही वह गहरे तनाव में था और अक्सर अनर्गल बातें करने लगा था। वह अविवाहित था और अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। उसके पिता हिसार में रहते हैं, जबकि वह अपनी मां के साथ फरीदाबाद में रह रहा था।
जैकेट में मिले मोबाइल से हुई पहचान
मामले की जांच कर रहे जीआरपी के एएसआई सूरत पाल ने बताया कि शनिवार सुबह रेलवे ट्रैक पर युवक का शव मिला था। शरीर बुरी तरह कट चुका था, जिससे पहचान करना मुश्किल था। तलाशी के दौरान मृतक की जैकेट की जेब से एक मोबाइल फोन मिला। उसी फोन के जरिए परिजनों से संपर्क किया गया और शव की शिनाख्त हो सकी। शनिवार शाम को शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसे परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मानसिक स्वास्थ्य और युवाओं पर बढ़ता दबाव
यह घटना आधुनिक कॉर्पोरेट जीवन में बढ़ते तनाव और रोजगार असुरक्षा की ओर इशारा करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक तंगी या करियर की असफलता किसी व्यक्ति को इस हद तक मजबूर कर सकती है कि वह घातक कदम उठा ले। ऐसे समय में परिवार का साथ और मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counseling) बहुत आवश्यक है।
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