फरीदाबाद: आतंकी सुराग मिलने के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी के नियमों में बड़ा फेरबदल, अब पुलिस जांच के बाद ही मिलेगा प्रवेश

यह बदलाव 10 नवंबर को दिल्ली में हुए आत्मघाती हमले के बाद की गई है, जिसमें संस्थान से जुड़े डॉक्टर और अन्य स्टाफ की संलिप्तता सामने आई थी। वर्तमान में एडमिशन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर डेटा पुलिस के साथ साझा किया जा रहा है।

Updated On 2026-01-14 11:51:00 IST

अल-फलाह यूनिवर्सिटी में प्रवेश के नियमों में आया बदलाव। 

हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी इन दिनों सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की कड़ी निगरानी में है। दिल्ली में हुए बम विस्फोटों के तार इस संस्थान से जुड़ने के बाद अब यहां की पूरी प्रवेश प्रणाली को ही बदल दिया गया है। अब यह तय किया गया है कि किसी भी नए विद्यार्थी को दाखिला देने या किसी भी व्यक्ति को नौकरी पर रखने से पहले उसका गहन पुलिस सत्यापन कराया जाएगा।

पुलिस की तीन विशेष टीमें तैनात

इस विशेष निगरानी अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए पुलिस ने तीन समर्पित टीमें तैनात की हैं। ये टीमें कैंपस के भीतर और बाहर होने वाली हर हलचल और नए नियुक्त होने वाले स्टाफ की पृष्ठभूमि पर पैनी नजर रख रही हैं। पुलिस का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संस्थान के भीतर किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दोबारा न पनप सके।

लाल किला ब्लास्ट और एनआईए की जांच

विश्वविद्यालय पर यह सख्ती उस आत्मघाती हमले के बाद शुरू हुई है, जिसे संस्थान से जुड़े डॉ. उमर नबी ने अंजाम दिया था, 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए भीषण विस्फोट में 15 लोगों ने जान गंवा दी थी। इस मामले की तहकीकात के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने संस्थान के दो अन्य चिकित्सकों, डॉ. मुजम्मिल और शाहीन सईद को भी दहशतगर्दों के मॉड्यूल से जुड़े होने के संदेह में हिरासत में लिया था।

एडमिशन के लिए बरती जाएगी सख्ती

वर्तमान में विश्वविद्यालय ने विभिन्न शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की है, किंतु इस बार नियम काफी कड़े हैं। अभ्यर्थियों को सर्वप्रथम ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा, जिसके बाद पुलिस उनकी पूरी जानकारी खंगालेगी। एनआईटी क्षेत्र के डीसीपी मकसूद अहमद ने स्पष्ट किया है कि पुलिस प्रशासन इस बार सुरक्षा को लेकर कोई कोताही नहीं बरत रहा है। पुलिस की टीमें न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि दूसरे राज्यों की पुलिस से संपर्क साधकर भी उम्मीदवारों के चरित्र और पुराने रिकॉर्ड की तस्दीक कर रही हैं।

स्टाफ की कमी बनी चुनौती

आतंकी नेटवर्क में नाम आने का असर विश्वविद्यालय के आंतरिक प्रशासन पर भी पड़ा है। सुरक्षा एजेंसियों की निरंतर पूछताछ और जांच के दबाव के कारण मेडिकल और अन्य संकायों के कई पुराने कर्मचारी इस्तीफा देकर जा चुके हैं। स्टाफ की इस भारी कमी को दूर करने के लिए नई भर्तियां तो निकाली गई हैं, लेकिन उम्मीदवारों को पुलिस वेरिफिकेशन की कड़ी अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा। संस्थान की खराब हुई छवि को सुधारने के लिए अब शिक्षकों को भी जनसंपर्क की जिम्मेदारी दी गई है।

भविष्य को लेकर छात्रों में डर और चिंता

वहीं, संस्थान में पढ़ रहे विद्यार्थियों के बीच डर व्याप्त है। चिकित्सा क्षेत्र की पढ़ाई कर रहे छात्रों का कहना है कि दिल्ली धमाकों के बाद से विश्वविद्यालय का नाम एक नकारात्मक पहचान बन गया है। उन्हें चिंता है कि जब वे स्नातक होकर पेशेवर दुनिया में कदम रखेंगे तो इस विवादित पृष्ठभूमि का असर उनके रोजगार की संभावनाओं पर पड़ सकता है। यही कारण है कि नए छात्र इस संस्थान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

अल्पसंख्यक दर्जे पर लटकी कानूनी तलवार

कानूनी मोर्चे पर भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी के लिए संकट गहराता जा रहा है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) ने यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर पूछा है कि आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोपों के मद्देनजर उसका अल्पसंख्यक दर्जा क्यों न खत्म कर दिया जाए। इस संवेदनशील मामले पर अगली सुनवाई 28 जनवरी को निर्धारित की है। पिछली सुनवाई के दौरान आयोग ने सरकार से विस्तृत जवाब पेश करने का आदेश दिया है। 

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