SECL के दीपिका खदान में हादसा: हैवी ब्लास्टिंग के दौरान पत्थर उड़कर कर्मचारी को लगा, मौके पर हुई मौत, सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप
कोरबा जिले के एसईसीएल की कोयला खदान में ब्लास्टिंग के दौरान एक कर्मी की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि, सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करवाया गया।
बाहर खड़े हुए लोग
उमेश यादव- कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के एसईसीएल की दीपका कोयला खदान में बुधवार की दोपहर ब्लास्टिंग के दौरान एक कर्मी की दर्दनाक मौत ने पूरे कोयला क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। यह हादसा सुआ-भोड़ी फेस पर उस वक्त हुआ, जब अमानक तरीके से ब्लास्टिंग कराई जा रही थी। बताया जा रहा है कि सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर ब्लास्टिंग कराई जा रही थी, जिसकी चपेट में आकर कर्मी की मौके पर ही मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ब्लास्टिंग से पहले न तो पर्याप्त सेफ्टी ज़ोन बनाया गया और न ही कर्मियों को सुरक्षित दूरी पर हटाया गया। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर किसके आदेश पर और किन परिस्थितियों में यह खतरनाक ब्लास्टिंग कराई जा रही थी? इस घटना के बाद खदान क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने दीपका प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यहां पहले भी कई बार नियमों की अनदेखी कर उत्पादन के दबाव में जान जोखिम में डाली गई है।
स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि दीपका खदान में उत्पादन पहले, सुरक्षा बाद में की नीति खुलेआम चल रही है। अगर समय रहते अमानक ब्लास्टिंग पर रोक लगाई जाती और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती, तो शायद आज एक और परिवार उजड़ने से बच जाता।
सवालों के घेरे में खदान प्रबंधन
हैरानी की बात यह है कि हादसे के बाद भी प्रबंधन की ओर से कोई ठोस बयान या जिम्मेदारी तय करने की पहल नहीं की गई है। सवाल यह है कि क्या इस मौत को भी पूर्व में हुए अन्य हादसों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा या फिर इस बार किसी बड़े अधिकारी पर गाज गिरेगी? अब देखना होगा कि कोल इंडिया और एसईसीएल के आला अधिकारी इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं, या फिर दीपका खदान में लापरवाही का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।