बिना पंजीयन चल रहा था रियल इस्पात प्लांट: नियमों की खुली अवहेलना से गई 6 मजदूरों की जान, श्रम कानूनों की भी अनदेखी

भाटापारा तहसील के बकुलाही गांव स्थित मेसर्स रियल इस्पात एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड में 22 जनवरी को हुई भीषण औद्योगिक दुर्घटना प्रबंधन की घोर लापरवाही से घटी थी।

Updated On 2026-01-30 19:07:00 IST

रियल इस्पात प्लांट में हुआ था बड़ा हादसा 

कुश अग्रवाल-बलौदा बाजार। बलौदा बाजार जिले के तहसील भाटापारा अंतर्गत ग्राम बकुलाही स्थित मेसर्स रियल इस्पात एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड में 22 जनवरी को हुई भीषण औद्योगिक दुर्घटना ने उद्योग प्रबंधन की घोर लापरवाही और कानूनों की खुली अवहेलना को उजागर कर दिया है। कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कारखाना प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह में जवाब तलब किया गया है।

संयुक्त जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि, उक्त उद्योग पिछले दो वर्षों से जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र से पंजीयन एवं वाणिज्यिक उत्पादन की अनुमति लिए बिना संचालित किया जा रहा था, जो न केवल उद्योग नीति बल्कि शासन के स्पष्ट निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। इसके बावजूद प्लांट में बड़े पैमाने पर उत्पादन और श्रमिकों से जोखिम भरा कार्य कराया जाता रहा।

श्रमिकों से अत्यंत खतरनाक परिस्थितियों में कराया काम
जांच रिपोर्ट के अनुसार कारखाना प्रबंधन द्वारा किल्न क्रमांक-01 को शटडाउन किए बिना संचालन जारी रखते हुए श्रमिकों को अत्यंत खतरनाक परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया गया। डस्ट सेटलिंग चेंबर में जमे गर्म ऐश को हटाने के दौरान न तो उचित कार्य अनुमति जारी की गई और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया गया। नवनियुक्त श्रमिकों को बिना प्रशिक्षण और अनुमति सीधे जानलेवा कार्यस्थल में उतार दिया गया।

श्रम कानूनों की भी खुली अनदेखी
जांच में यह भी पाया गया कि प्रबंधन द्वारा न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के तहत वेतन एवं सुविधाओं का कोई विधिवत रिकॉर्ड नहीं रखा गया। संविदा श्रमिक अधिनियम 1970 के तहत आवश्यक अनुज्ञप्ति नहीं ली गई, जबकि 100 से अधिक श्रमिकों से कार्य कराया जा रहा था। तथा अंतर्राज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम 1979 के अंतर्गत बिना अनुमति बाहरी राज्यों के श्रमिकों से काम लिया गया। यह स्पष्ट करता है कि उद्योग प्रबंधन द्वारा श्रमिकों की सुरक्षा, अधिकार और जीवन को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

हादसे में 6 मजदूरों की मौत, 5 गंभीर
गौरतलब है कि 22 जनवरी 2026 को सुबह लगभग 9:40 बजे किल्न क्रमांक-01 के डस्ट सेटलिंग चेंबर में कार्य के दौरान अचानक विस्फोट और गर्म ऐश की बौछार से 6 श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 5 श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद प्रारंभिक जांच में कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 40(2) के तहत किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं मेंटेनेंस कार्यों पर तत्काल रोक लगा दी गई।

मुआवजा देकर नहीं बच सकता प्रबंधन
हालांकि कारखाना प्रबंधन द्वारा मृत 5 श्रमिकों के परिजनों को ₹20-20 लाख एवं 6 घायलों को ₹5-5 लाख मुआवजा राशि का भुगतान किया गया है, लेकिन जांच रिपोर्ट यह संकेत देती है कि मुआवजा प्रबंधन की जिम्मेदारी से मुक्ति नहीं दिला सकता। नियमों की अनदेखी कर दो वर्षों से अवैध रूप से उद्योग संचालन और सुरक्षा मानकों की घोर उपेक्षा इस हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है।

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