आदिवासी नेता के बाद बेटे की भी मौत: जेल से रिहा होने के बाद बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में तोड़ा दम, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
आदिवासी नेता जीवन ठाकुर के बाद उनके बेटे नीरज ठाकुर की तबियत ख़राब होने की वजह से अस्पताल में मौत हो गई है। जिसके बाद समाज में भारी आक्रोश है।
धरने पर बैठे आदिवासी नेता
गौरव श्रीवास्तव- कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में आदिवासी नेता जीवन ठाकुर के बाद उनके बेटे नीरज ठाकुर की मौत हो गई है। पिता की मौत के सप्ताह भर बाद बेटा नीरज ठाकुर जेल से रिहा हुआ था। जेल से रिहा होने के बाद स्वास्थ्य खराब होने से मौत हो गई। नीरज ठाकुर की मौत से आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है।
मिली जानकारी के अनुसार, वन अधिकार पट्टा मामले में जीवन ठाकुर और उनके बेटे सहित अन्य लोगों के खिलाफ चारामा थाने में केस दर्ज किया गया था। जिसके इन सभी की गिरफ्तारी 12 अक्टूबर 2025 को की गई थी। आदिवासी नेता जीवन ठाकुर को 2 दिसंबर को कांकेर जेल से रायपुर जेल शिफ्ट किया गया था। लेकिन 4 दिसंबर की सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
जेल से रिहा होने के बाद बिगड़ी तबियत
जीवन ठाकुर की मौत की खबर फैलते ही आदिवासी समाज और परिजनों में भारी रोष देखा गया। समाज के लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। इसी बीच 12 दिसंबर को जीवन ठाकुर के बेटे नीरज ठाकुर को जमानत पर रिहा किया गया। जेल से बाहर आने के कुछ ही दिनों बाद नीरज की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें इलाज के लिए रायपुर लेकर आए, लेकिन उपचार के दौरान उनकी भी मौत हो गई। पिता और बेटे की लगातार हुई मौतों ने मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।
समाज के लोगों ने दोषियों पर की कार्रवाई की मांग
आदिवासी नेता और उनके बेटे की मौत को लेकर आदिवासी समाज ने जेल प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि, हिरासत में रखे गए लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है। समाज ने इस मामले की उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।