एक मांग एक मंच अभियान के दूसरे चरण का शंखनाद: संगठन ने 80 माह का एरियर्स और देय तिथि से डीए तत्काल देने की रखी मांग

साढ़े चार लाख कर्मचारियों और एक लाख चवालीस हजार पेंशनरों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर एक मांग एक मंच अभियान ने अपनी मांगों को रखा।

Updated On 2026-01-12 18:35:00 IST

एक मांग एक मंच अभियान 

अनिल सामंत- जगदलपुर। प्रदेश के साढ़े चार लाख कर्मचारियों और एक लाख चवालीस हजार पेंशनरों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर शुरू हुआ एक मांग एक मंच अभियान अब निर्णायक मोड़ पर पहुँचता दिखाई दे रहा है। देय तिथि से महंगाई भत्ता और वर्ष 2017 से लंबित 80 महीनों के डीए एरियर्स की मांग अब केवल ज्ञापन नहीं, बल्कि जन-संकल्प का रूप ले चुकी है।

अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत देवी दंतेश्वरी के दर्शन के पश्चात की गई, जो इस संघर्ष को केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नैतिक बल भी प्रदान करता है। इसके तहत सिंधी कॉलोनी धर्मपुर और राजमहल के सामने स्थित बापू की कुटिया में दो अलग-अलग बैठकें आयोजित की गईं, जहाँ कर्मचारियों और पेंशनरों का आक्रोश, संयम और संकल्प एक साथ दिखाई दिया। 


16 हजार कर्मचारियों और पेंशनरों के हस्ताक्षर वित्त सचिव को जा चुके सौंपे
बैठकों में यह स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि बीते आठ वर्षों से कर्मचारी वर्ग को केवल आश्वासन मिलते रहे, अधिकार नहीं। जिन संगठनों ने अब तक नेतृत्व किया, वे कर्मचारियों को उनका हक दिलाने में असफल रहे। इसी असंतोष से जन्मा यह अभियान अब एक मांग, एक मंच, एक आवाज़ की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। यह भी बताया गया कि पहले चरण में 16 हजार कर्मचारियों और पेंशनरों के हस्ताक्षर वित्त सचिव को सौंपे जा चुके हैं। फरवरी तक पांचों संभागों में बैठकें पूरी कर राजधानी रायपुर में निर्णायक सम्मेलन की तैयारी की जाएगी, जहाँ आंदोलन की तिथि तय होगी। साफ संदेश था, अब प्रतीक्षा नहीं, संघर्ष होगा।

समिति के अध्यक्ष ने की कर्मचारियों से संगठन में जुड़ने की अपील
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई किसी संगठन की नहीं, बल्कि सम्मान,अधिकार और भविष्य की है। कर्मचारी वर्ग ने यह ठान लिया है कि अब उनकी आवाज सिर्फ फाइलों में नहीं, सड़कों पर भी गूंजेगी। कार्यक्रम में प्रदेश संचालन समिति के अध्यक्ष करन सिंह अटेरिया ने अभियान के उद्देश्यों को विस्तार से रखते हुए कर्मचारियों से अपील की कि वे बिना किसी संगठनात्मक भेदभाव के इस संघर्ष से जुड़ें। इस अवसर पर चंद्रिका सिंह ने सभी कर्मचारी संगठनों को एक मंच पर लाने के प्रयास की खुलकर सराहना की। 


हस्ताक्षर अभियान चलाकर मांगा गया समर्थन
यह आंदोलन केवल मांगों की सूची नहीं, बल्कि संघर्ष की रणनीति है। पहले चरण में हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से कर्मचारियों की वास्तविक संख्या और समर्थन को दर्ज किया गया। दूसरे चरण में संभाग स्तर पर बैठकें कर संगठनात्मक मजबूती दी जा रही है। तीसरे चरण में राजधानी रायपुर में महाआंदोलन की रूपरेखा तय होगी। चौथे चरण में सरकार पर प्रत्यक्ष दबाव बनाया जाएगा, अंतिम चरण में या तो न्याय मिलेगा, या आंदोलन और तेज होगा।

ये वरिष्ठ लोग रहे उपस्थित
बैठक को जितेंद्र सिंह ठाकुर, विद्याभूषण दुबे, जगदीश सिंह बामल, जीएस पांडे, जी शाही, अनंत मेहतो, डीडी सिंह, आर एस सूर्यवंशी, केआर रात्रे, राजेंद्र सिंह चौहान, केके मेहतो और एचवाई कुकडे ने भी संबोधित किया। इस दौरान डॉ. ओपी शंखवार, रमेश्वरी टंडन, सुनीता सूरी, सतीश चंद्राकर, बलिराम कश्यप सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी और पेंशनर उपस्थित रहे।

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