स्वामी विवेकानंद जयंती: एनएसएस का स्वदेशी संकल्प दौड़, मुख्य वक्ता बोले- आत्मनिर्भरता से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा

स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा आयोजित स्वदेशी संकल्प दौड़ आयोजित की गई।

Updated On 2026-01-12 18:17:00 IST

स्वदेशी संकल्प दौड़ का आयोजन 

अनिल सामंत- जगदलपुर। स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा आयोजित स्वदेशी संकल्प दौड़ आयोजित की गई। मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण से प्रारंभ इस आयोजन ने युवाओं को यह स्मरण कराया कि विकास का रास्ता आयात से नहीं, आत्मनिर्भरता से होकर गुजरता है।

उद्बोधन कार्यक्रम में यह स्पष्ट संदेश उभरा कि स्वदेशी कोई विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की अनिवार्यता है। वक्ताओं ने कहा कि विदेशी उपभोग की आदतें केवल आर्थिक निर्भरता नहीं बढ़ातीं, बल्कि सांस्कृतिक आत्मविश्वास को भी कमजोर करती हैं। इस संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के विचारों को वर्तमान संदर्भ में जीवंत करते हुए बताया गया कि आत्मबल, अनुशासन और लक्ष्यबोध ही राष्ट्र को ऊँचाई तक ले जाते हैं। दौड़ के दौरान युवाओं ने स्वदेशी अपनाने के नारे लगाए और यह संदेश दिया कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकारी योजनाओं से नहीं,बल्कि नागरिक संकल्प से पूरा होगा। 


मां दंतेश्वरी मंदिर से शुरू हुई यात्रा
मां दंतेश्वरी मंदिर से शुरू होकर संजय मार्केट, प्रमुख चौक-चौराहों से गुजरते हुए पुनः मंदिर परिसर में समाप्त हुई इस दौड़ ने पूरे शहर को वैचारिक ऊर्जा से भर दिया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण बना कि जब विचार आंदोलन का रूप लेते हैं, तो वे केवल सुनाई नहीं देते वे दिशा देते हैं। स्वामी विवेकानंद का संदेश उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको, इस कार्यक्रम की आत्मा में धड़कता रहा।

स्वदेशी अपनाए बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी- महेश कश्यप
कार्यक्रम में सांसद महेश कश्यप ने कहा कि बिना स्वदेशी अपनाए विकसित भारत की कल्पना अधूरी है। उन्होंने सभी को स्वदेशी उत्पादों के उपयोग की शपथ दिलाई और संकल्प दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 


स्वदेशी संकल्प दौड़ का वैचारिक संदेश
यह आयोजन केवल शारीरिक दौड़ नहीं, बल्कि चेतना की यात्रा था। प्रथम चरण में युवाओं को स्वदेशी के अर्थ और महत्व से परिचित कराया गया। द्वितीय चरण में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़ा गया। तृतीय चरण में यह बताया गया कि आर्थिक स्वतंत्रता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता अधूरी है। चतुर्थ चरण में स्वामी विवेकानंद के विचारों को वर्तमान संदर्भ में पुनः स्थापित किया गया और अंतिम चरण में युवाओं ने यह संकल्प लिया कि वे उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनेंगे।

ये वरिष्ठ लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर श्रीनिवास राव माटी, खेमसिंह देवांगन, योगेंद्र पांडे, डॉ. राम राकेश जांगिड़, डॉ. राजेश लालवानी, डॉ. सजीवन कुमार, डॉ. विनोद कुमार सोनी, डॉ. भुनेश्वर लाल साहू, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. दुर्गेश डिक्सेना, डॉ. नीरज वर्मा, पूर्णेन्द मीर्धा, डॉ. सोहन कुमार, डॉ. निरंजन सहित विभिन्न महाविद्यालयों के नोडल अधिकारी, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में भाजपा युवा मोर्चा के पदाधिकारियों का विशेष सहयोग रहा।

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